अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- बिल-बय्यिनात: स्पष्ट प्रमाण, चमत्कार और खुले हुए सबूत।
- बला: हाँ (स्वीकारोक्ति)।
- फ़द्उ: तो तुम ही पुकारो।
- दुआ: पुकार, प्रार्थना।
- ज़लाल: बर्बादी, विफलता, भटकाव, व्यर्थता।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब काफ़िरों को जहन्नम में डाला जाएगा और वे अपनी पीड़ा से बेचैन होकर जहन्नम के पहरेदारों (ख़ज़ाना) से कहेंगे: "हमारे रब से प्रार्थना करो कि वह हमारी यातना में एक दिन की भी कमी कर दे," तो पहरेदार उन्हें फटकारते हुए कहेंगे: "क्या तुम्हारे पास तुम्हारे रसूल स्पष्ट प्रमाणों और खुले चमत्कारों के साथ नहीं आए थे? क्या उन्होंने तुम्हें सच्चाई नहीं बताई थी और इस दिन से नहीं डराया था?" इस पर काफ़िर अपनी ज़बान से स्वीकार करेंगे: "हाँ, वास्तव में हमारे पास रसूल स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए थे, लेकिन हमने उन्हें झुठलाया और उनकी बात नहीं मानी।" तब पहरेदार उनका मज़ाक उड़ाते हुए और उन्हें निराश करते हुए कहेंगे: "अच्छा, तो अब तुम खुद ही अपने रब को पुकारो! हम तुम्हारे लिए सिफ़ारिश नहीं करेंगे, क्योंकि तुम काफ़िर हो।" यह सुनकर वे अपने रब को पुकारेंगे, लेकिन उनकी पुकार कहीं नहीं पहुँचेगी। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और काफ़िरों की पुकार केवल बर्बादी और व्यर्थता में है।" यानी उनकी दुआ न तो क़ुबूल होती है और न ही उनके किसी काम आती है, बल्कि वह पूरी तरह नाकाम और बेकार जाती है, क्योंकि उन्होंने दुनिया में ईमान और अच्छे कर्मों का रास्ता छोड़ दिया था।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि दुआ और पुकार तभी क़ुबूल होती है जब दिल में ईमान और अल्लाह का डर हो। काफ़िरों की दुआ भी उनके काम नहीं आई, क्योंकि उनका दिल अल्लाह से दूर था। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में रसूलों की शिक्षाओं पर अमल करें, क्योंकि वे ही हमारे लिए रहनुमा हैं। जो व्यक्ति दुनिया में सच्चे दिल से अल्लाह को पुकारता है और अपने गुनाहों से तौबा करता है, अल्लाह उसकी दुआ ज़रूर सुनता है। याद रखिए, दुआ की क़ुबूलियत का दारोमदार ईमान और अमल-ए-सालिह पर है। आइए हम अपने रब से ऐसे तरीक़े से जुड़ें जो उसे पसंद हो, और उसके रसूलों के बताए रास्ते पर चलें, ताकि हमारी दुआएँ बेकार न जाएँ और हम उस दिन की शर्मिंदगी से बच जाएँ।
📜 आयत 48-52 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 50
सूरा ग़ाफिर आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह जवाब देंगे कि क्या तुम्हारे पास तुम्हारे पैग़म्बर साफ…सूरा आयत 50/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








