ग़ाफिर · 50/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
قَالُوا أَوَلَمْ تَكُ تَأْتِيكُمْ رُسُلُكُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۚ قَالُوا فَادْعُوا ۗ وَمَا دُعَاءُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ ۝٥٠
Qaalooo awalam taku taateekum Rusulukum bilbaiyinaati qaaloo balaa` qaaloo fad`oo; wa maa du`aaa`ul kaafireena illaa fee dalaal
📖 हिंदी अर्थ
वह जवाब देंगे कि क्या तुम्हारे पास तुम्हारे पैग़म्बर साफ व रौशन मौजिज़े लेकर नहीं आए थे वह कहेंगे (हाँ) आए तो थे, तब फरिश्ते तो कहेंगे फिर तुम ख़़ुद (क्यों) न दुआ करो, हालाँकि काफ़िरों की दुआ तो बस बेकार ही है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बिल-बय्यिनात: स्पष्ट प्रमाण, चमत्कार और खुले हुए सबूत।
  • बला: हाँ (स्वीकारोक्ति)।
  • फ़द्उ: तो तुम ही पुकारो।
  • दुआ: पुकार, प्रार्थना।
  • ज़लाल: बर्बादी, विफलता, भटकाव, व्यर्थता।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब काफ़िरों को जहन्नम में डाला जाएगा और वे अपनी पीड़ा से बेचैन होकर जहन्नम के पहरेदारों (ख़ज़ाना) से कहेंगे: "हमारे रब से प्रार्थना करो कि वह हमारी यातना में एक दिन की भी कमी कर दे," तो पहरेदार उन्हें फटकारते हुए कहेंगे: "क्या तुम्हारे पास तुम्हारे रसूल स्पष्ट प्रमाणों और खुले चमत्कारों के साथ नहीं आए थे? क्या उन्होंने तुम्हें सच्चाई नहीं बताई थी और इस दिन से नहीं डराया था?" इस पर काफ़िर अपनी ज़बान से स्वीकार करेंगे: "हाँ, वास्तव में हमारे पास रसूल स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए थे, लेकिन हमने उन्हें झुठलाया और उनकी बात नहीं मानी।" तब पहरेदार उनका मज़ाक उड़ाते हुए और उन्हें निराश करते हुए कहेंगे: "अच्छा, तो अब तुम खुद ही अपने रब को पुकारो! हम तुम्हारे लिए सिफ़ारिश नहीं करेंगे, क्योंकि तुम काफ़िर हो।" यह सुनकर वे अपने रब को पुकारेंगे, लेकिन उनकी पुकार कहीं नहीं पहुँचेगी। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और काफ़िरों की पुकार केवल बर्बादी और व्यर्थता में है।" यानी उनकी दुआ न तो क़ुबूल होती है और न ही उनके किसी काम आती है, बल्कि वह पूरी तरह नाकाम और बेकार जाती है, क्योंकि उन्होंने दुनिया में ईमान और अच्छे कर्मों का रास्ता छोड़ दिया था।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि दुआ और पुकार तभी क़ुबूल होती है जब दिल में ईमान और अल्लाह का डर हो। काफ़िरों की दुआ भी उनके काम नहीं आई, क्योंकि उनका दिल अल्लाह से दूर था। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में रसूलों की शिक्षाओं पर अमल करें, क्योंकि वे ही हमारे लिए रहनुमा हैं। जो व्यक्ति दुनिया में सच्चे दिल से अल्लाह को पुकारता है और अपने गुनाहों से तौबा करता है, अल्लाह उसकी दुआ ज़रूर सुनता है। याद रखिए, दुआ की क़ुबूलियत का दारोमदार ईमान और अमल-ए-सालिह पर है। आइए हम अपने रब से ऐसे तरीक़े से जुड़ें जो उसे पसंद हो, और उसके रसूलों के बताए रास्ते पर चलें, ताकि हमारी दुआएँ बेकार न जाएँ और हम उस दिन की शर्मिंदगी से बच जाएँ।



📜 आयत 48-52 — ग़ाफिर

48قَالَ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُلٌّ فِيهَا إِنَّ اللَّهَ قَدْ حَكَمَ بَيْنَ الْعِبَادِ
तो बड़े लोग कहेंगें (अब तो) हम (तुम) सबके सब आग में पड़े हैं ख़ुदा (को) तो बन्दों के बारे में (जो कुछ) फैसला (करना था) कर चुका
49وَقَالَ الَّذِينَ فِي النَّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ادْعُوا رَبَّكُمْ يُخَفِّفْ عَنَّا يَوْمًا مِّنَ الْعَذَابِ
और जो लोग आग में (जल रहे) होंगे जहन्नुम के दरोग़ाओं से दरख्वास्त करेंगे कि अपने परवरदिगार से अर्ज़ करो कि एक दिन तो हमारे अज़ाब में तख़फ़ीफ़ कर दें
50قَالُوا أَوَلَمْ تَكُ تَأْتِيكُمْ رُسُلُكُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۚ قَالُوا فَادْعُوا ۗ وَمَا دُعَاءُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ
वह जवाब देंगे कि क्या तुम्हारे पास तुम्हारे पैग़म्बर साफ व रौशन मौजिज़े लेकर नहीं आए थे वह कहेंगे (हाँ) आए तो थे, तब फरिश्ते तो कहेंगे फिर तुम ख़़ुद (क्यों) न दुआ करो, हालाँकि काफ़िरों की दुआ तो बस बेकार ही है
51إِنَّا لَنَنصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَيَوْمَ يَقُومُ الْأَشْهَادُ
हम अपने पैग़म्बरों की और ईमान वालों की दुनिया की ज़िन्दगी में भी ज़रूर मदद करेंगे और जिस दिन गवाह (पैग़म्बर फरिश्ते गवाही को) उठ खड़े होंगे
52يَوْمَ لَا يَنفَعُ الظَّالِمِينَ مَعْذِرَتُهُمْ ۖ وَلَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوءُ الدَّارِ
(उस दिन भी) जिस दिन ज़ालिमों को उनकी माज़ेरत कुछ भी फायदे न देगी और उन पर फिटकार (बरसती) होगी और उनके लिए बहुत बुरा घर (जहन्नुम) है
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अनुवाद — ग़ाफिर 50

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Tuesday, August 18, 2026

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