ग़ाफिर · 51/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
إِنَّا لَنَنصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَيَوْمَ يَقُومُ الْأَشْهَادُ ۝٥١
Innaa lanansuru Rusulanaa wallazeena aamanoo fil hayaatid dunyaa wa Yawma yaqoomul ashhaad
📖 हिंदी अर्थ
हम अपने पैग़म्बरों की और ईमान वालों की दुनिया की ज़िन्दगी में भी ज़रूर मदद करेंगे और जिस दिन गवाह (पैग़म्बर फरिश्ते गवाही को) उठ खड़े होंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الأَشْهَاد (अश्हाद): यह "شاهد" (गवाह) का बहुवचन है, जिसका अर्थ है गवाह। यहाँ इससे अभिप्राय वे गवाह हैं जो क़ियामत के दिन खड़े होंगे, जिनमें फ़रिश्ते, नबी और मोमिनीन शामिल हैं।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबियों और उन पर ईमान लाने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी और दिलासा दे रहे हैं। वह फ़रमाता है कि हम निश्चित रूप से अपने रसूलों और ईमान वालों की मदद करते हैं — यह मदद दो जगहों पर होती है:

पहली मदद — इस दुनिया की ज़िंदगी में: अल्लाह अपने रसूलों और मोमिनीन की दलील को स्पष्ट और प्रबल करता है, उनके दुश्मनों पर उन्हें ग़ालिब बनाता है, और उनके खिलाफ़ साज़िशें करने वालों को नाकाम करता है। चाहे दुनिया में उन्हें कितनी भी तकलीफ़ें दी जाएँ, लेकिन अल्लाह उनकी हुज्जत को क़ायम रखता है और उनके दीन को सरबुलंद करता है।

दूसरी मदद — क़ियामत के दिन: जब सारे गवाह खड़े होंगे — फ़रिश्ते, नबी और मोमिनीन — वे गवाही देंगे कि रसूलों ने अपना पैग़ाम पूरा पहुँचा दिया था, और उनकी उम्मतों ने उन्हें झुठलाया और उनका विरोध किया। उस दिन अल्लाह अपने रसूलों और मोमिनीन की मदद उन्हें जन्नत में दाख़िल करके करेगा, और उनके दुश्मनों को जहन्नम की सज़ा देकर।

यह आयत हर उस मोमिन के लिए एक ज़बरदस्त तसल्ली है जो राह-ए-ख़ुदा में मुश्किलों का सामना करता है। याद रखिए, अल्लाह की मदद का वादा सच्चा है — चाहे दुनिया में देर हो, लेकिन अल्लाह का फ़ैसला कभी नाकाम नहीं होता। जो लोग अल्लाह के दीन पर साबित-क़दम रहते हैं, उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त मिलती है और आख़िरत में भी कामयाबी। यही वह रास्ता है जो हर मुसलमान को अपनाना चाहिए — सब्र और यक़ीन के साथ अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह कभी अपने वादे के खिलाफ़ नहीं करता।



📜 आयत 49-53 — सूरा ग़ाफिर

49وَقَالَ الَّذِينَ فِي النَّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ادْعُوا رَبَّكُمْ يُخَفِّفْ عَنَّا يَوْمًا مِّنَ الْعَذَابِ
और जो लोग आग में (जल रहे) होंगे जहन्नुम के दरोग़ाओं से दरख्वास्त करेंगे कि अपने परवरदिगार से अर्ज़ करो कि एक दिन तो हमारे अज़ाब में तख़फ़ीफ़ कर दें
50قَالُوا أَوَلَمْ تَكُ تَأْتِيكُمْ رُسُلُكُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۚ قَالُوا فَادْعُوا ۗ وَمَا دُعَاءُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ
वह जवाब देंगे कि क्या तुम्हारे पास तुम्हारे पैग़म्बर साफ व रौशन मौजिज़े लेकर नहीं आए थे वह कहेंगे (हाँ) आए तो थे, तब फरिश्ते तो कहेंगे फिर तुम ख़़ुद (क्यों) न दुआ करो, हालाँकि काफ़िरों की दुआ तो बस बेकार ही है
51إِنَّا لَنَنصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَيَوْمَ يَقُومُ الْأَشْهَادُ
हम अपने पैग़म्बरों की और ईमान वालों की दुनिया की ज़िन्दगी में भी ज़रूर मदद करेंगे और जिस दिन गवाह (पैग़म्बर फरिश्ते गवाही को) उठ खड़े होंगे
52يَوْمَ لَا يَنفَعُ الظَّالِمِينَ مَعْذِرَتُهُمْ ۖ وَلَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوءُ الدَّارِ
(उस दिन भी) जिस दिन ज़ालिमों को उनकी माज़ेरत कुछ भी फायदे न देगी और उन पर फिटकार (बरसती) होगी और उनके लिए बहुत बुरा घर (जहन्नुम) है
53وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْهُدَىٰ وَأَوْرَثْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ الْكِتَابَ
और हम ही ने मूसा को हिदायत (की किताब तौरेत) दी और बनी इसराईल को (उस) किताब का वारिस बनाया
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
51आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 51

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Friday, October 2, 2026

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