ग़ाफिर · 75/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
ذَٰلِكُم بِمَا كُنتُمْ تَفْرَحُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَبِمَا كُنتُمْ تَمْرَحُونَ ۝٧٥
Zaalikum bimaa kuntum tafrahoona fil ardi bighairil haqqi wa bimaa kuntum tamrahoon
📖 हिंदी अर्थ
(कि कुछ समझ में न आएगा) ये उसकी सज़ा है कि तुम दुनिया में नाहक (बात पर) निहाल थे और इसकी सज़ा है कि तुम इतराया करते थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَفْرَحُونَ: खुश होना, प्रसन्नता मनाना
  • تَمْرَحُونَ: इतराना, अकड़ना, खूब खुशियाँ मनाना, बेहद प्रसन्न होना

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फरमाते हैं कि उस दिन अहले जहन्नम से कहा जाएगा: "यह अज़ाब जो अब तुम्हें मिल रहा है, यह उसका ही बदला है जो तुम दुनिया में किया करते थे।"

दरअसल, यह सज़ा उन लोगों के लिए है जो दुनिया की ज़िंदगी में अल्लाह की इबादत से ग़ाफ़िल रहे और अपने गुनाहों पर खुशियाँ मनाते रहे। वे जब कोई गुनाह करते थे तो उस पर इतराते थे, उसे बड़ी शान समझते थे और उस पर फ़ख़्र करते थे। उनका यह फ़रह (खुशी) नाजायज़ था, क्योंकि वह शिर्क, तुग़यान (सरकशी) और अल्लाह के बंदों पर ज़ुल्म पर आधारित था।

वे दुनिया में जब किसी बुरे काम में कामयाब होते थे तो खुश होते थे, और जब अपनी मनमानी करते थे तो उस पर इतराते और अकड़ते थे। उन्हें यह अहसास ही नहीं था कि यह सब अल्लाह की नाराज़गी का सबब है। वे सोचते थे कि उनकी यह खुशियाँ और यह ऐश-ओ-आराम उनकी काबिलियत की वजह से है, जबकि हक़ीक़त में यह उनके लिए अज़ाब का ज़रिया बन रहा था।

नसीहत और दावत का पहलू:

यह आयत हम सबके लिए एक बहुत बड़ी सबक़ है। इंसान को चाहिए कि वह अपनी खुशियों में अल्लाह की रज़ा का ख़याल रखे। खुशी अगर अल्लाह की इबादत और नेक कामों पर हो तो वह बरकत वाली है, लेकिन जो खुशी गुनाह और नाफ़रमानी पर हो, वही इंसान को जहन्नम तक ले जाती है।

आज दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपनी नाजायज़ कमाई, रिश्वत, धोखाधड़ी और ज़ुल्म पर खुश होते हैं और उसे अपनी कामयाबी समझते हैं। वे भूल जाते हैं कि यही खुशियाँ क़यामत के दिन उनके लिए पछतावे और अज़ाब का सबब बनेंगी।

अल्लाह तआला हमें सच्ची खुशी अता फरमाए — वह खुशी जो उसकी रज़ा में हो, उसके दीन की खिदमत में हो और उसके बंदों के साथ भलाई में हो। आमीन।



📜 आयत 73-77 — सूरा ग़ाफिर

73ثُمَّ قِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ تُشْرِكُونَ
फिर उनसे पूछा जाएगा कि ख़ुदा के सिवा जिनको (उसका) शरीक बनाते थे
74مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا بَل لَّمْ نَكُن نَّدْعُو مِن قَبْلُ شَيْئًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ الْكَافِرِينَ
(इस वक्त) क़हाँ हैं वह कहेंगे अब तो वह हमसे जाते रहे बल्कि (सच यूँ है कि) हम तो पहले ही से (ख़ुदा के सिवा) किसी चीज़ की परसतिश न करते थे यूँ ख़ुदा काफिरों को बौखला देगा
75ذَٰلِكُم بِمَا كُنتُمْ تَفْرَحُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَبِمَا كُنتُمْ تَمْرَحُونَ
(कि कुछ समझ में न आएगा) ये उसकी सज़ा है कि तुम दुनिया में नाहक (बात पर) निहाल थे और इसकी सज़ा है कि तुम इतराया करते थे
76ادْخُلُوا أَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۖ فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّرِينَ
अब जहन्नुम के दरवाज़े में दाख़िल हो जाओ (और) हमेशा उसी में (पड़े) रहो, ग़रज़ तकब्बुर करने वालों का भी (क्या) बुरा ठिकाना है
77فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۚ فَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذِي نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيْنَا يُرْجَعُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम सब्र करो ख़ुदा का वायदा यक़ीनी सच्चा है तो जिस (अज़ाब) की हम उन्हें धमकी देते हैं अगर हम तुमको उसमें कुछ दिखा दें या तुम ही को (इसके क़ब्ल) दुनिया से उठा लें तो (आख़िर फिर) उनको हमारी तरफ लौट कर आना है,
ग़ाफिरकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
75आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 75

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Tuesday, September 29, 2026

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