ग़ाफिर · 74/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا بَل لَّمْ نَكُن نَّدْعُو مِن قَبْلُ شَيْئًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ الْكَافِرِينَ ۝٧٤
Min doonil laahi qaaloo dalloo `annaa bal lam nakun nad`oo min qablu shai`aa; kazaalika yudillul laahul kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
(इस वक्त) क़हाँ हैं वह कहेंगे अब तो वह हमसे जाते रहे बल्कि (सच यूँ है कि) हम तो पहले ही से (ख़ुदा के सिवा) किसी चीज़ की परसतिश न करते थे यूँ ख़ुदा काफिरों को बौखला देगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَلُّوا عَنَّا: हमसे ग़ायब हो गए, हमें छोड़कर चले गए।
  • لَمْ نَكُن نَّدْعُو مِن قَبْلُ شَيْئًا: हम पहले किसी चीज़ की ही पूजा नहीं करते थे (अर्थात् अब हमें यक़ीन हो गया कि ये सब कुछ भी नहीं थे)।
  • يُضِلُّ اللهُ الْكَافِرِينَ: अल्लाह काफ़िरों को (सत्य से) भटका देता है।

तफ़सीर:

जब क़यामत के दिन काफ़िरों को जहन्नम की आग में डाला जाएगा और उनसे पूछा जाएगा: "कहाँ हैं वे माबूद जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते थे? क्या वे आज तुम्हारी मदद कर सकते हैं? उन्हें पुकारो, अगर वे तुम्हें इस अज़ाब से बचा सकते हैं!" — तो उस वक़्त उनका कोई सहारा न होगा, कोई मददगार न होगा। वे माबूद, जिन्हें वे दुनिया में पुकारते थे, उनसे ग़ायब हो जाएँगे और उनकी कोई हक़ीक़त सामने न आएगी।

तब वे कहेंगे: "वे हमसे ग़ायब हो गए, हम उन्हें देख नहीं सकते, और न ही वे हमारी कोई मदद कर सकते हैं।" फिर वे अपनी ग़लती का इज़हार करते हुए कहेंगे: "असल में हम पहले किसी चीज़ की ही पूजा नहीं करते थे — यानी हमारी पूजा बिल्कुल बेकार और बातिल थी, हमने कुछ भी हासिल नहीं किया, बल्कि हम ख़ुद को धोखे में रखे हुए थे।"

यह अल्लाह का क़ानून है — जिस तरह उसने इन काफ़िरों को गुमराह किया और उनके माबूदों को उनसे ग़ायब कर दिया, उसी तरह वह हर ज़माने और हर मुक़ाम पर उन लोगों को सत्य से भटका देता है जो उस पर ईमान नहीं लाते और उसकी आयतों को झुठलाते हैं। यह उनका अपना किया हुआ है — उन्होंने हक़ को छोड़ा, तो अल्लाह ने उन्हें उनकी हालत पर छोड़ दिया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में जिन चीज़ों को हम अपना सहारा बनाते हैं — चाहे वे माल हों, औलाद हों, रुतबा हो या कोई और चीज़ — वे क़यामत के दिन हमारे किसी काम न आएँगी। सिर्फ़ अल्लाह ही है जो उस दिन बचाने वाला है। इसलिए हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा पर क़ायम करें, क्योंकि जो लोग अल्लाह को छोड़कर दूसरों पर भरोसा करते हैं, वे आख़िरत में सिर्फ़ पछतावे के सिवा कुछ हासिल नहीं करेंगे। अल्लाह तआला अपने बंदों को सीधा रास्ता दिखाना चाहता है, और जो लोग हिदायत की तरफ़ कदम बढ़ाते हैं, अल्लाह उन्हें और भी हिदायत देता है और उनके दिलों को सुकून अता करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 72-76 — ग़ाफिर

72فِي الْحَمِيمِ ثُمَّ فِي النَّارِ يُسْجَرُونَ
फिर (जहन्नुम की) आग में झोंक दिए जाएँगे
73ثُمَّ قِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ تُشْرِكُونَ
फिर उनसे पूछा जाएगा कि ख़ुदा के सिवा जिनको (उसका) शरीक बनाते थे
74مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا بَل لَّمْ نَكُن نَّدْعُو مِن قَبْلُ شَيْئًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ الْكَافِرِينَ
(इस वक्त) क़हाँ हैं वह कहेंगे अब तो वह हमसे जाते रहे बल्कि (सच यूँ है कि) हम तो पहले ही से (ख़ुदा के सिवा) किसी चीज़ की परसतिश न करते थे यूँ ख़ुदा काफिरों को बौखला देगा
75ذَٰلِكُم بِمَا كُنتُمْ تَفْرَحُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَبِمَا كُنتُمْ تَمْرَحُونَ
(कि कुछ समझ में न आएगा) ये उसकी सज़ा है कि तुम दुनिया में नाहक (बात पर) निहाल थे और इसकी सज़ा है कि तुम इतराया करते थे
76ادْخُلُوا أَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۖ فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّرِينَ
अब जहन्नुम के दरवाज़े में दाख़िल हो जाओ (और) हमेशा उसी में (पड़े) रहो, ग़रज़ तकब्बुर करने वालों का भी (क्या) बुरा ठिकाना है
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अनुवाद — ग़ाफिर 74

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Tuesday, August 18, 2026

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