ग़ाफिर · 76/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
ادْخُلُوا أَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۖ فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّرِينَ ۝٧٦
Udkhulooo abwaaba Jahannama khaalideena feehaa fabi`sa maswal mutakabbireen
📖 हिंदी अर्थ
अब जहन्नुम के दरवाज़े में दाख़िल हो जाओ (और) हमेशा उसी में (पड़े) रहो, ग़रज़ तकब्बुर करने वालों का भी (क्या) बुरा ठिकाना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अबवाब (أبواب): दरवाज़े, प्रवेश द्वार।
  • जहन्नम (جهنم): नरक, जो आख़िरत की सबसे भयानक जगह है।
  • ख़ालिदीन (خالدين): हमेशा रहने वाले, कभी न मरने वाले।
  • मस्वा (مثوى): ठिकाना, निवास स्थान, रहने की जगह।
  • मुतकब्बिरीन (المتكبرين): अहंकारी, घमंडी, जो सत्य को मानने से इनकार करें और लोगों पर बड़प्पन जताएँ।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला काफ़िरों और अहंकारियों को नरक में डालने का आदेश देगा, तो उनसे कहा जाएगा: "दाख़िल हो जाओ जहन्नम के दरवाज़ों में, हमेशा हमेशा के लिए।" ये वो दरवाज़े हैं जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार किए हैं — सात दरवाज़े, जिनमें से हर दरवाज़े के लिए अलग-अलग समूह नियत हैं। ये दरवाज़े उनके कुफ़्र, शिर्क और अल्लाह की नाफ़रमानी की सज़ा हैं।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "बहुत बुरा ठिकाना है अहंकारियों का!" यानी ये जगह उन लोगों के लिए कितनी बुरी है जो दुनिया में अल्लाह के आगे झुकने से इनकार करते थे, सत्य को सुनकर भी उसे मानने से सिर उठाते थे, और अपने घमंड की वजह से अल्लाह की आयतों और रसूलों को झुठलाते थे। आज उनका वही घमंड उन्हें इस जगह तक ले आया है।

ग़ौर करने की बात यह है कि अल्लाह ने यह नहीं कहा "बुरा है दाख़िल होने की जगह" बल्कि फ़रमाया "बुरा है ठिकाना" — क्योंकि यहाँ रहने का इरादा है, न कि सिर्फ़ गुज़रने का। यानी ये उनका स्थायी निवास है, जहाँ से कोई निकलना नहीं।


नसीहत (उपदेश):

ऐ अल्लाह के बंदो! ये आयत हमें बताती है कि अहंकार और घमंड कितनी बड़ी बीमारी है — ये इंसान को जहन्नम तक ले जाती है। अल्लाह के सामने अपने आप को छोटा करो, उसकी इबादत में झुको, और उसके दीन को कबूल करो। जो लोग दुनिया में अल्लाह के आगे झुकते हैं, अल्लाह उनके लिए जन्नत के दरवाज़े खोल देगा। लेकिन जो लोग घमंड करते हैं और सत्य को नहीं मानते, उनके लिए जहन्नम के दरवाज़े खोल दिए जाएँगे। अल्लाह हमें अहंकार से बचाए और हमें सच्ची विनम्रता और ईमान की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 74-78 — ग़ाफिर

74مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا بَل لَّمْ نَكُن نَّدْعُو مِن قَبْلُ شَيْئًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ الْكَافِرِينَ
(इस वक्त) क़हाँ हैं वह कहेंगे अब तो वह हमसे जाते रहे बल्कि (सच यूँ है कि) हम तो पहले ही से (ख़ुदा के सिवा) किसी चीज़ की परसतिश न करते थे यूँ ख़ुदा काफिरों को बौखला देगा
75ذَٰلِكُم بِمَا كُنتُمْ تَفْرَحُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَبِمَا كُنتُمْ تَمْرَحُونَ
(कि कुछ समझ में न आएगा) ये उसकी सज़ा है कि तुम दुनिया में नाहक (बात पर) निहाल थे और इसकी सज़ा है कि तुम इतराया करते थे
76ادْخُلُوا أَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۖ فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّرِينَ
अब जहन्नुम के दरवाज़े में दाख़िल हो जाओ (और) हमेशा उसी में (पड़े) रहो, ग़रज़ तकब्बुर करने वालों का भी (क्या) बुरा ठिकाना है
77فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۚ فَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذِي نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيْنَا يُرْجَعُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम सब्र करो ख़ुदा का वायदा यक़ीनी सच्चा है तो जिस (अज़ाब) की हम उन्हें धमकी देते हैं अगर हम तुमको उसमें कुछ दिखा दें या तुम ही को (इसके क़ब्ल) दुनिया से उठा लें तो (आख़िर फिर) उनको हमारी तरफ लौट कर आना है,
78وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلًا مِّن قَبْلِكَ مِنْهُم مَّن قَصَصْنَا عَلَيْكَ وَمِنْهُم مَّن لَّمْ نَقْصُصْ عَلَيْكَ ۗ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأْتِيَ بِآيَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ فَإِذَا جَاءَ أَمْرُ اللَّهِ قُضِيَ بِالْحَقِّ وَخَسِرَ هُنَالِكَ الْمُبْطِلُونَ
और तुमसे पहले भी हमने बहुत से पैग़म्बर भेजे उनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिनके हालात हमने तुमसे बयान कर दिए, और कुछ ऐसे हैं जिनके हालात तुमसे नहीं दोहराए और किसी पैग़म्बर की ये मजाल न थी कि ख़ुदा के ऐख्तेयार दिए बग़ैर कोई मौजिज़ा दिखा सकें फिर जब ख़ुदा का हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा तो ठीक ठीक फैसला कर दिया गया और अहले बातिल ही इस घाटे में रहे,
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अनुवाद — ग़ाफिर 76

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Tuesday, August 18, 2026

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