फुस्सिलत · 23/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
وَذَٰلِكُمْ ظَنُّكُمُ الَّذِي ظَنَنتُم بِرَبِّكُمْ أَرْدَاكُمْ فَأَصْبَحْتُم مِّنَ الْخَاسِرِينَ ۝٢٣
Wa zaalikum zannukumul lazee zanantum bi-Rabbikum ardaakum fa asbahtum minal khaasireen
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारी इस बदख्याली ने जो तुम अपने परवरदिगार के बारे में रखते थे तुम्हें तबाह कर छोड़ा आख़िर तुम घाटे में रहे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ظَنُّكُم – तुम्हारा गुमान (बुरा अनुमान)
  • أَرْدَاكُمْ – तुम्हें विनष्ट (बर्बाद) कर दिया
  • الْخَاسِرِينَ – घाटे में रहने वाले, नुकसान उठाने वाले

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की स्थिति बयान कर रहे हैं जिन्होंने दुनिया में गुनाह करते समय यह सोचा कि अल्लाह उनके कर्मों को नहीं जानता या उनके बारे में अल्लाह को पता नहीं चलेगा। उन्होंने यह गुमान किया कि वे अपने गुनाहों को छिपा सकते हैं और अल्लाह उनके बारे में नहीं जानेगा। यही उनका बुरा गुमान उनके विनाश का कारण बना।

यह वही लोग हैं जिन्होंने अल्लाह के बारे में बुरा अनुमान लगाया कि वह अपने बंदों के कर्मों से बेखबर है, या वह उनके गुनाहों को माफ कर देगा बिना किसी पकड़ के। यह गुमान उनके लिए घातक साबित हुआ, क्योंकि इसी ने उन्हें गुनाहों पर जारी रखा और तौबा से रोका। नतीजा यह हुआ कि आज वे अल्लाह के सामने खड़े हैं और अपने उस गलत अनुमान की सजा भुगत रहे हैं।

आज वे समझ गए हैं कि उनका यह अनुमान कितना गलत था, लेकिन अब पछताने का समय निकल चुका है। वे उन लोगों में से हो गए हैं जिन्होंने अपने आप को और अपने परिवारों को घाटे में डाल दिया। उन्होंने दुनिया भी गंवाई और आखिरत भी। यह सबसे बड़ा नुकसान है जो किसी इंसान को हो सकता है।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह के बारे में हमारा अनुमान हमेशा अच्छा होना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों के हर काम को देखता और जानता है। हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि हमारे गुनाह अल्लाह से छिपे रहेंगे। साथ ही, अल्लाह की रहमत से निराश भी नहीं होना चाहिए। सही रास्ता यह है कि हम अल्लाह से डरें, उसकी निगरानी का एहसास रखें, और साथ ही उसकी रहमत से उम्मीद भी रखें। अगर कभी गुनाह हो जाए तो तुरंत तौबा करें, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है। याद रखिए, अल्लाह के बारे में अच्छा गुमान ही हमारी सफलता की कुंजी है, और बुरा गुमान हमारी बर्बादी का कारण बन सकता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — फुस्सिलत

21وَقَالُوا لِجُلُودِهِمْ لِمَ شَهِدتُّمْ عَلَيْنَا ۖ قَالُوا أَنطَقَنَا اللَّهُ الَّذِي أَنطَقَ كُلَّ شَيْءٍ وَهُوَ خَلَقَكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और ये लोग अपने आज़ा से कहेंगे कि तुमने हमारे ख़िलाफ क्यों गवाही दी तो वह जवाब देंगे कि जिस ख़ुदा ने हर चीज़ को गोया किया उसने हमको भी (अपनी क़ुदरत से) गोया किया और उसी ने तुमको पहली बार पैदा किया था और (आख़िर) उसी की तरफ लौट कर जाओगे
22وَمَا كُنتُمْ تَسْتَتِرُونَ أَن يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَا أَبْصَارُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ وَلَٰكِن ظَنَنتُمْ أَنَّ اللَّهَ لَا يَعْلَمُ كَثِيرًا مِّمَّا تَعْمَلُونَ
और (तुम्हारी तो ये हालत थी कि) तुम लोग इस ख्याल से (अपने गुनाहों की) पर्दा दारी भी तो नहीं करते थे कि तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे और तुम्हारे आज़ा तुम्हारे बरख़िलाफ गवाही देंगे बल्कि तुम इस ख्याल मे (भूले हुए) थे कि ख़ुदा को तुम्हारे बहुत से कामों की ख़बर ही नहीं
23وَذَٰلِكُمْ ظَنُّكُمُ الَّذِي ظَنَنتُم بِرَبِّكُمْ أَرْدَاكُمْ فَأَصْبَحْتُم مِّنَ الْخَاسِرِينَ
और तुम्हारी इस बदख्याली ने जो तुम अपने परवरदिगार के बारे में रखते थे तुम्हें तबाह कर छोड़ा आख़िर तुम घाटे में रहे
24فَإِن يَصْبِرُوا فَالنَّارُ مَثْوًى لَّهُمْ ۖ وَإِن يَسْتَعْتِبُوا فَمَا هُم مِّنَ الْمُعْتَبِينَ
फिर अगर ये लोग सब्र भी करें तो भी इनका ठिकाना दोज़ख़ ही है और अगर तौबा करें तो भी इनकी तौबा क़ुबूल न की जाएगी
25۞ وَقَيَّضْنَا لَهُمْ قُرَنَاءَ فَزَيَّنُوا لَهُم مَّا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَحَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِرِينَ
और हमने (गोया ख़ुद शैतान को) उनका हमनशीन मुक़र्रर कर दिया था तो उन्होने उनके अगले पिछले तमाम उमूर उनकी नज़रों में भले कर दिखाए तो जिन्नात और इन्सानो की उम्मतें जो उनसे पहले गुज़र चुकी थीं उनके शुमूल (साथ) में (अज़ाब का) वायदा उनके हक़ में भी पूरा हो कर रहा बेशक ये लोग अपने घाटे के दरपै थे
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीRevelation
23आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 23

सूरा फुस्सिलत आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारी इस बदख्याली ने जो तुम अपने परवरदिगार के…

सूरा आयत 23/54 — फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फुस्सिलत सुनें, फुस्सिलत अनुवाद, फुस्सिलत mp3, फुस्सिलत pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए