फुस्सिलत · 38/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
فَإِنِ اسْتَكْبَرُوا فَالَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ يُسَبِّحُونَ لَهُ بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَهُمْ لَا يَسْأَمُونَ ۩ ۝٣٨
Fa inis-takbaroo fallazee na `inda Rabbika yusabbihoona lahoo billaili wannnahaari wa hum laa yas`amoon
📖 हिंदी अर्थ
पस अगर ये लोग सरकशी करें तो (ख़ुदा को भी उनकी परवाह नहीं) वो लोग (फ़रिश्ते) तुम्हारे परवरदिगार की बारगाह में हैं वह रात दिन उसकी तसबीह करते रहते हैं और वह लोग उकताते भी नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَكْبَرُوا: अभिमान किया, घमंड किया, सिर उठाया।
  • عِندَ رَبِّكَ: आपके रब के पास (अर्थात अल्लाह की उपस्थिति में)।
  • يُسَبِّحُونَ: पवित्रता का वर्णन करते हैं, अल्लाह की तस्बीह करते हैं।
  • لَا يَسْأَمُونَ: नहीं थकते, नहीं ऊबते, नहीं मायूस होते।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए एक गहरा संदेश और चेतावनी है जो अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ते हैं और उसके सामने झुकने से इनकार करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यदि ये मुशरिकीन और काफ़िर लोग अल्लाह के सामने सजदा करने से अभिमान और घमंड करते हैं, और उसकी इबादत से इनकार करते हैं, तो उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि अल्लाह को उनकी इबादत की कोई ज़रूरत नहीं है। अल्लाह की उपस्थिति में ऐसे फ़रिश्ते हैं जो दिन-रात लगातार उसकी तस्बीह और तहलील करते रहते हैं। वे कभी थकते नहीं, कभी ऊबते नहीं, और न ही कभी इस इबादत से रुकते हैं। वे अल्लाह की पाकी बयान करते हैं और उसे हर कमी, हर ऐब और हर बुराई से पाक और मुबर्रा मानते हैं।

यह आयत उस समय नाज़िल हुई जब कुछ मुशरिकीन ने नबी करीम ﷺ के सामने सजदा करने से इनकार किया था। अल्लाह ने फ़रमाया कि अगर ये लोग सजदा नहीं करते, तो कोई बात नहीं, क्योंकि मेरे पास ऐसे फ़रिश्ते हैं जो हर वक़्त मेरी इबादत में मशगूल रहते हैं। यह बात मुसलमानों के लिए एक तसल्ली है कि सच्ची इबादत का दामन थामे रहें, चाहे दुनिया वाले मुँह मोड़ लें। अल्लाह की इबादत कभी बेकार नहीं जाती, और उसकी तस्बीह का सिला उसे मिलता है जो इसे करता है।

इस आयत में एक और बात सीखने की है कि इबादत में थकान और ऊब नहीं होनी चाहिए। फ़रिश्ते दिन-रात बिना रुके अल्लाह की तस्बीह करते हैं, और यह उनकी फ़ितरत है। इंसान को भी चाहिए कि वह अपनी इबादत में पाबंदी और लगन दिखाए, और अल्लाह की याद से कभी न थके। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ने वालों का अंजाम बुरा है, लेकिन अल्लाह के नेक बंदों की इबादत कभी रुकती नहीं, और उनका दर्जा अल्लाह के यहाँ बुलंद है।

इस आयत के अंत में सजदे की आयत है, जहाँ तिलावत करने वाले को सजदा करना सुन्नत है। यह सजदा अल्लाह की अज़मत के सामने अपने आप को झुकाने की निशानी है, और यह उन लोगों के मुक़ाबले में है जो अभिमान के कारण सजदा नहीं करते। मुसलमान को चाहिए कि वह इस सजदे को अदा करे और अल्लाह के करीब होने का मौका ग़नीमत जाने। यह सजदा इंसान के ईमान की ताज़गी का ज़रिया है और शैतान के वसवसों से बचाने वाला है।



📜 आयत 36-40 — सूरा फुस्सिलत

36وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطَانِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
और अगर तुम्हें शैतान की तरफ से वसवसा पैदा हो तो ख़ुदा की पनाह माँग लिया करो बेशक वह (सबकी) सुनता जानता है
37وَمِنْ آيَاتِهِ اللَّيْلُ وَالنَّهَارُ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُ ۚ لَا تَسْجُدُوا لِلشَّمْسِ وَلَا لِلْقَمَرِ وَاسْجُدُوا لِلَّهِ الَّذِي خَلَقَهُنَّ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ
और उसकी (कुदरत की) निशानियों में से रात और दिन और सूरज और चाँद हैं तो तुम लोग न सूरज को सजदा करो और न चाँद को, और अगर तुम ख़ुदा ही की इबादत करनी मंज़ूर रहे तो बस उसी को सजदा करो जिसने इन चीज़ों को पैदा किया है
38فَإِنِ اسْتَكْبَرُوا فَالَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ يُسَبِّحُونَ لَهُ بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَهُمْ لَا يَسْأَمُونَ ۩
पस अगर ये लोग सरकशी करें तो (ख़ुदा को भी उनकी परवाह नहीं) वो लोग (फ़रिश्ते) तुम्हारे परवरदिगार की बारगाह में हैं वह रात दिन उसकी तसबीह करते रहते हैं और वह लोग उकताते भी नहीं
39وَمِنْ آيَاتِهِ أَنَّكَ تَرَى الْأَرْضَ خَاشِعَةً فَإِذَا أَنزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ ۚ إِنَّ الَّذِي أَحْيَاهَا لَمُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۚ إِنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
उसकी क़ुदरत की निशानियों में से एक ये भी है कि तुम ज़मीन को ख़़ुश्क और बेआब ओ गयाह देखते हो फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने लगती है और फूल जाती है जिस ख़ुदा ने (मुर्दा) ज़मीन को ज़िन्दा किया वह यक़ीनन मुर्दों को भी जिलाएगा बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है
40إِنَّ الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي آيَاتِنَا لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَا ۗ أَفَمَن يُلْقَىٰ فِي النَّارِ خَيْرٌ أَم مَّن يَأْتِي آمِنًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ اعْمَلُوا مَا شِئْتُمْ ۖ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
जो लोग हमारी आयतों में हेर फेर पैदा करते हैं वह हरगिज़ हमसे पोशीदा नहीं हैं भला जो शख्स दोज़ख़ में डाला जाएगा वह बेहतर है या वह शख्स जो क़यामत के दिन बेख़ौफ व ख़तर आएगा (ख़ैर) जो चाहो सो करो (मगर) जो कुछ तुम करते हो वह (ख़ुदा) उसको देख रहा है
फुस्सिलतकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 38

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Monday, September 28, 2026

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