अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اسْتَكْبَرُوا: अभिमान किया, घमंड किया, सिर उठाया।
- عِندَ رَبِّكَ: आपके रब के पास (अर्थात अल्लाह की उपस्थिति में)।
- يُسَبِّحُونَ: पवित्रता का वर्णन करते हैं, अल्लाह की तस्बीह करते हैं।
- لَا يَسْأَمُونَ: नहीं थकते, नहीं ऊबते, नहीं मायूस होते।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के लिए एक गहरा संदेश और चेतावनी है जो अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ते हैं और उसके सामने झुकने से इनकार करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यदि ये मुशरिकीन और काफ़िर लोग अल्लाह के सामने सजदा करने से अभिमान और घमंड करते हैं, और उसकी इबादत से इनकार करते हैं, तो उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि अल्लाह को उनकी इबादत की कोई ज़रूरत नहीं है। अल्लाह की उपस्थिति में ऐसे फ़रिश्ते हैं जो दिन-रात लगातार उसकी तस्बीह और तहलील करते रहते हैं। वे कभी थकते नहीं, कभी ऊबते नहीं, और न ही कभी इस इबादत से रुकते हैं। वे अल्लाह की पाकी बयान करते हैं और उसे हर कमी, हर ऐब और हर बुराई से पाक और मुबर्रा मानते हैं।
यह आयत उस समय नाज़िल हुई जब कुछ मुशरिकीन ने नबी करीम ﷺ के सामने सजदा करने से इनकार किया था। अल्लाह ने फ़रमाया कि अगर ये लोग सजदा नहीं करते, तो कोई बात नहीं, क्योंकि मेरे पास ऐसे फ़रिश्ते हैं जो हर वक़्त मेरी इबादत में मशगूल रहते हैं। यह बात मुसलमानों के लिए एक तसल्ली है कि सच्ची इबादत का दामन थामे रहें, चाहे दुनिया वाले मुँह मोड़ लें। अल्लाह की इबादत कभी बेकार नहीं जाती, और उसकी तस्बीह का सिला उसे मिलता है जो इसे करता है।
इस आयत में एक और बात सीखने की है कि इबादत में थकान और ऊब नहीं होनी चाहिए। फ़रिश्ते दिन-रात बिना रुके अल्लाह की तस्बीह करते हैं, और यह उनकी फ़ितरत है। इंसान को भी चाहिए कि वह अपनी इबादत में पाबंदी और लगन दिखाए, और अल्लाह की याद से कभी न थके। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ने वालों का अंजाम बुरा है, लेकिन अल्लाह के नेक बंदों की इबादत कभी रुकती नहीं, और उनका दर्जा अल्लाह के यहाँ बुलंद है।
इस आयत के अंत में सजदे की आयत है, जहाँ तिलावत करने वाले को सजदा करना सुन्नत है। यह सजदा अल्लाह की अज़मत के सामने अपने आप को झुकाने की निशानी है, और यह उन लोगों के मुक़ाबले में है जो अभिमान के कारण सजदा नहीं करते। मुसलमान को चाहिए कि वह इस सजदे को अदा करे और अल्लाह के करीब होने का मौका ग़नीमत जाने। यह सजदा इंसान के ईमान की ताज़गी का ज़रिया है और शैतान के वसवसों से बचाने वाला है।
📜 आयत 36-40 — फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 38
सूरा फुस्सिलत आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : पस अगर ये लोग सरकशी करें तो (ख़ुदा को भी…सूरा आयत 38/54 — फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फुस्सिलत सुनें, फुस्सिलत अनुवाद, फुस्सिलत mp3, फुस्सिलत pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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