Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَرْثَ الآخِرَةِ: आख़िरत की खेती, यानी वह अमल जो आख़िरत का फल पाने के लिए किया जाए।
- حَرْثَ الدُّنْيَا: दुनिया की खेती, यानी वह काम जो सिर्फ़ दुनिया का माल-मता और फायदा हासिल करने के लिए किया जाए।
- نَزِدْ لَهُ: हम उसके लिए बढ़ा देंगे (यानी उसके अमल में बरकत और अज्र में इज़ाफ़ा कर देंगे)।
- نُؤْتِهِ مِنْهَا: हम उसे दुनिया में से (उसका मुक़द्दर किया हुआ हिस्सा) दे देंगे।
- نَصِيبٍ: हिस्सा, भाग।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मुक़द्दस क़ुरआन का वह नूरानी पैग़ाम है जो इंसान के दिल को जगाती है और उसे सही रास्ता दिखाती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो शख्स अपने अमल से सिर्फ़ आख़िरत का इरादा रखता है—यानी उसकी नीयत साफ़ हो, वह अल्लाह की रज़ा के लिए काम करे, अपने फ़र्ज़ अदा करे, दूसरों को भलाई की तरफ़ बुलाए, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ ढाले—तो अल्लाह उसकी इस नेक खेती में बरकत डालता है। यानी उसके एक नेक अमल का सवाब दस गुना से शुरू होकर सात सौ गुना तक और फिर अल्लाह की मर्ज़ी से उससे भी कहीं ज़्यादा बढ़ा दिया जाता है। यह अल्लाह का फज़ल है कि वह अपने बंदे की छोटी सी कोशिश को भी बड़ा इनाम देता है।
और जो शख्स सिर्फ़ दुनिया की ख्वाहिश रखता है—यानी उसका सारा ध्यान सिर्फ़ माल, शोहरत, और दुनियावी सुख-सुविधाओं पर हो, और वह अल्लाह के हुक्म को भूलकर सिर्फ़ दुनिया के लिए जुट जाए—तो अल्लाह उसे दुनिया में से उतना ही देता है जितना उसके मुक़द्दर में लिखा है। लेकिन उसे आख़िरत में कोई हिस्सा नहीं मिलेगा, क्योंकि उसने आख़िरत के लिए कुछ भी नहीं भेजा। यह बड़ी अफ़सोसनाक बात है कि इंसान अपनी सारी उम्र दुनिया की खेती में लगा दे, और आख़िरत की खेती को खाली छोड़ दे, फिर उस दिन उसे पछताने के सिवा कुछ हासिल न हो।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी नीयतें सही हों। हमें दुनिया में रहकर भी आख़िरत की तैयारी करनी है। दुनिया को हम अपनी मंज़िल न बनाएं, बल्कि उसे आख़िरत की खेती का ज़रिया बनाएं। जो शख्स अपने कामों में अल्लाह की रज़ा को सामने रखता है, अल्लाह उसके कामों में बरकत डालता है और उसे दुनिया में भी इत्मिनान और कामयाबी देता है और आख़िरत में भी बेहतरीन इनाम। लेकिन जो सिर्फ़ दुनिया के पीछे भागता है, वह न तो दुनिया में सुकून पाता है और न आख़िरत में उसका कोई हिस्सा होता है।
तो आओ, हम अपनी नीयतों को सुधारें, अपने अमल को अल्लाह की रज़ा के लिए खास करें, और उस दिन की तैयारी करें जब कोई माल और औलाद काम न आएगी, सिवाय उसके जो साफ़ दिल के साथ अल्लाह के पास आएगा। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 18-22 — सूरा अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 20
सूरा अश-शूरा आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो शख़्श आखेरत की खेती का तालिब हो हम उसके…सूरा आयत 20/53 — सूरा अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शूरा सुनें, सूरा अश-शूरा अनुवाद, सूरा अश-शूरा mp3, सूरा अश-शूरा pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


