Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- شُرَكَاءُ: साझीदार, यहाँ अर्थ है वे झूठे देवता या मूर्तियाँ जिन्हें लोग अल्लाह का साझीदार बनाते हैं।
- شَرَعُوا: उन्होंने (धर्म) निर्धारित किया या क़ानून बनाया।
- كَلِمَةُ الْفَصْلِ: फ़ैसले का वचन, यानी अल्लाह का वह पहले से तय किया हुआ फ़ैसला जिसमें उसने क़यामत तक का समय निर्धारित कर दिया है।
- لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ: उनके बीच फ़ैसला कर दिया जाता (यानी सज़ा तुरंत दे दी जाती)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला उन लोगों पर सवाल उठाता है जो शिर्क (बहुदेववाद) में डूबे हुए हैं। अल्लाह पूछता है: क्या इन मुशरिकों के पास कोई ऐसे साझीदार (देवता) हैं जिन्होंने इनके लिए धर्म में ऐसी बातें निर्धारित की हैं जिनकी अल्लाह ने अनुमति नहीं दी? यानी उन्होंने अपनी मनमानी से हलाल को हराम और हराम को हलाल कर दिया, अल्लाह के साथ दूसरों की पूजा करना शुरू कर दिया, और ऐसी रस्में और क़ानून बना लिए जिनका अल्लाह ने कोई हुक्म नहीं भेजा।
यह एक बड़ा अन्याय है कि इंसान अपनी ओर से धर्म में ऐसी चीज़ें जोड़ ले जो अल्लाह ने नाज़िल नहीं कीं। अल्लाह तआला सिर्फ़ अपने पैग़म्बरों के ज़रिए जो हुक्म भेजता है, वही धर्म है। इसके अलावा जो कुछ भी है, वह मनगढ़ंत और बातिल है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: अगर अल्लाह का वह फ़ैसला न होता जो उसने पहले से तय कर रखा है (यानी सज़ा को क़यामत तक मुल्तवी करना), तो इन ज़ालिमों और मोमिनों के बीच दुनिया में ही फ़ैसला कर दिया जाता और इन्हें तुरंत सज़ा दे दी जाती। लेकिन अल्लाह की हिक्मत यह है कि उसने सज़ा के लिए एक निश्चित समय ठहराया है, ताकि लोगों को मौका मिले और उसकी रहमत का दरवाज़ा खुला रहे।
आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: जो लोग ज़ुल्म करते हैं (यानी शिर्क करते हैं और अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं), उनके लिए क़यामत के दिन दर्दनाक अज़ाब है। यह अज़ाब उनके उस ज़ुल्म का नतीजा होगा जो उन्होंने दुनिया में किया।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि धर्म में कोई नई बात गढ़ना और अल्लाह की इजाज़त के बिना उसे धर्म का हिस्सा बनाना कितना बड़ा ज़ुल्म है। हमें चाहिए कि हम सिर्फ़ क़ुरआन और सुन्नत को ही अपना रास्ता बनाएं, क्योंकि यही वह रास्ता है जिसे अल्लाह ने पसंद किया है। जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास जन्नत की खुशखबरी है, और जो लोग अपनी मनमानी करते हैं, उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है। अल्लाह बहुत रहम करने वाला है — उसने हमें दुनिया में मौका दिया है कि हम अपनी गलतियों से तौबा कर लें और सीधे रास्ते पर आ जाएं। यही सबसे बड़ी सफलता है।
📜 आयत 19-23 — सूरा अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 21
सूरा अश-शूरा आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों के (बनाए हुए) ऐसे शरीक हैं जिन्होंने…सूरा आयत 21/53 — सूरा अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शूरा सुनें, सूरा अश-शूरा अनुवाद, सूरा अश-शूरा mp3, सूरा अश-शूरा pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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