अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُنَشَّأُ – पाला-पोसा जाता है, परवरिश पाता है।
- الْحِلْيَةِ – ज़ीनत, गहने, सजावट।
- الْخِصَامِ – झगड़ा, तकरार, बहस।
- غَيْرُ مُبِينٍ – स्पष्ट बात न कर सकने वाला, अपनी बात को साफ़ तौर पर पेश न कर सकने वाला।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों पर अल्लाह की ओर से कड़ी फटकार और तंज़ है जो फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहते थे, या जो लड़कियों को अल्लाह की संतान ठहराते थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या तुम अल्लाह के लिए वह (औलाद) ठहराते हो जो ज़ीनत और गहनों में पाली-पोसी जाती है—यानी लड़कियाँ—और वह झगड़े या बहस के वक़्त अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं कह पाती, क्योंकि उसकी नाज़ुक फ़ितरत और कमज़ोरी होती है?
यानी तुम उस हस्ती को अल्लाह की संतान कहते हो जो अपनी कमज़ोरी के कारण किसी मुक़दमे या झगड़े में अपना पक्ष साफ़ तौर पर पेश नहीं कर सकती, जबकि तुम ख़ुद लड़कियों को अपने लिए इज़्ज़त की चीज़ नहीं समझते और उन्हें बुरा मानते हो। जब तुम्हें किसी को बेटी मिलती है तो तुम्हारा चेहरा काला पड़ जाता है, फिर तुम अल्लाह के लिए उसी चीज़ को कैसे ठहरा सकते हो जिसे तुम अपने लिए अपमान समझते हो?
यह आयत उन अरब मुशरिकों के बारे में है जो कहते थे कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं। अल्लाह ने उनके इस झूठे और बेतुके दावे का खंडन किया और उनकी नादानी को उजागर किया। साथ ही यह भी बताया कि अल्लाह की पाक ज़ात किसी औलाद से पाक और मुबर्रा है, वह हर उस चीज़ से बिल्कुल पाक है जो ये लोग उसके बारे में कहते हैं।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला की ज़ात किसी भी इंसानी औसाफ़ से पाक है। हमें अल्लाह के बारे में सिर्फ़ वही कहना चाहिए जो उसने ख़ुद अपने बारे में बताया है। इस्लाम हमें सिखाता है कि बेटियाँ अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत हैं, और जो व्यक्ति बेटियों की परवरिश अच्छे तरीके से करता है, उसके लिए यह जहन्नम से बचाव का ज़रिया बनेगी। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "जिसने दो लड़कियों की परवरिश की यहाँ तक कि वे बालिग़ हो गईं, वह क़यामत के दिन मेरे साथ इस तरह आएगा" — और आपने अपनी दो उंगलियों को जोड़कर दिखाया। (सहीह मुस्लिम)
इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की नेमतों की क़द्र करें, उसकी पाक ज़ात के बारे में सिर्फ़ वही बात कहें जो क़ुरआन और सुन्नत से साबित है, और अपनी बेटियों को इज़्ज़त दें, क्योंकि यही अल्लाह की पसंदीदा शिक्षा है।
📜 आयत 16-20 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 18
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या वह (औरत) जो ज़ेवरों में पाली पोसी जाए और…सूरा आयत 18/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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