अज़-ज़ुखरुफ · 18/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
أَوَمَن يُنَشَّأُ فِي الْحِلْيَةِ وَهُوَ فِي الْخِصَامِ غَيْرُ مُبِينٍ ۝١٨
Awa mai yunashsha`u fil hilyati wa huwa fil khisaami ghairu mubeen
📖 हिंदी अर्थ
क्या वह (औरत) जो ज़ेवरों में पाली पोसी जाए और झगड़े में (अच्छी तरह) बात तक न कर सकें (ख़ुदा की बेटी हो सकती है)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُنَشَّأُ – पाला-पोसा जाता है, परवरिश पाता है।
  • الْحِلْيَةِ – ज़ीनत, गहने, सजावट।
  • الْخِصَامِ – झगड़ा, तकरार, बहस।
  • غَيْرُ مُبِينٍ – स्पष्ट बात न कर सकने वाला, अपनी बात को साफ़ तौर पर पेश न कर सकने वाला।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों पर अल्लाह की ओर से कड़ी फटकार और तंज़ है जो फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहते थे, या जो लड़कियों को अल्लाह की संतान ठहराते थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या तुम अल्लाह के लिए वह (औलाद) ठहराते हो जो ज़ीनत और गहनों में पाली-पोसी जाती है—यानी लड़कियाँ—और वह झगड़े या बहस के वक़्त अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं कह पाती, क्योंकि उसकी नाज़ुक फ़ितरत और कमज़ोरी होती है?

यानी तुम उस हस्ती को अल्लाह की संतान कहते हो जो अपनी कमज़ोरी के कारण किसी मुक़दमे या झगड़े में अपना पक्ष साफ़ तौर पर पेश नहीं कर सकती, जबकि तुम ख़ुद लड़कियों को अपने लिए इज़्ज़त की चीज़ नहीं समझते और उन्हें बुरा मानते हो। जब तुम्हें किसी को बेटी मिलती है तो तुम्हारा चेहरा काला पड़ जाता है, फिर तुम अल्लाह के लिए उसी चीज़ को कैसे ठहरा सकते हो जिसे तुम अपने लिए अपमान समझते हो?

यह आयत उन अरब मुशरिकों के बारे में है जो कहते थे कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं। अल्लाह ने उनके इस झूठे और बेतुके दावे का खंडन किया और उनकी नादानी को उजागर किया। साथ ही यह भी बताया कि अल्लाह की पाक ज़ात किसी औलाद से पाक और मुबर्रा है, वह हर उस चीज़ से बिल्कुल पाक है जो ये लोग उसके बारे में कहते हैं।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला की ज़ात किसी भी इंसानी औसाफ़ से पाक है। हमें अल्लाह के बारे में सिर्फ़ वही कहना चाहिए जो उसने ख़ुद अपने बारे में बताया है। इस्लाम हमें सिखाता है कि बेटियाँ अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत हैं, और जो व्यक्ति बेटियों की परवरिश अच्छे तरीके से करता है, उसके लिए यह जहन्नम से बचाव का ज़रिया बनेगी। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "जिसने दो लड़कियों की परवरिश की यहाँ तक कि वे बालिग़ हो गईं, वह क़यामत के दिन मेरे साथ इस तरह आएगा" — और आपने अपनी दो उंगलियों को जोड़कर दिखाया। (सहीह मुस्लिम)

इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की नेमतों की क़द्र करें, उसकी पाक ज़ात के बारे में सिर्फ़ वही बात कहें जो क़ुरआन और सुन्नत से साबित है, और अपनी बेटियों को इज़्ज़त दें, क्योंकि यही अल्लाह की पसंदीदा शिक्षा है।



📜 आयत 16-20 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

16أَمِ اتَّخَذَ مِمَّا يَخْلُقُ بَنَاتٍ وَأَصْفَاكُم بِالْبَنِينَ
क्या उसने अपनी मख़लूक़ात में से ख़ुद तो बेटियाँ ली हैं और तुमको चुनकर बेटे दिए हैं
17وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِمَا ضَرَبَ لِلرَّحْمَٰنِ مَثَلًا ظَلَّ وَجْهُهُ مُسْوَدًّا وَهُوَ كَظِيمٌ
हालॉकि जब उनमें किसी शख़्श को उस चीज़ (बेटी) की ख़ुशख़बरी दी जाती है जिसकी मिसल उसने ख़ुदा के लिए बयान की है तो वह (ग़ुस्से के मारे) सियाह हो जाता है और ताव पेंच खाने लगता है
18أَوَمَن يُنَشَّأُ فِي الْحِلْيَةِ وَهُوَ فِي الْخِصَامِ غَيْرُ مُبِينٍ
क्या वह (औरत) जो ज़ेवरों में पाली पोसी जाए और झगड़े में (अच्छी तरह) बात तक न कर सकें (ख़ुदा की बेटी हो सकती है)
19وَجَعَلُوا الْمَلَائِكَةَ الَّذِينَ هُمْ عِبَادُ الرَّحْمَٰنِ إِنَاثًا ۚ أَشَهِدُوا خَلْقَهُمْ ۚ سَتُكْتَبُ شَهَادَتُهُمْ وَيُسْأَلُونَ
और उन लोगों ने फ़रिश्तों को कि वह भी ख़ुदा के बन्दे हैं (ख़ुदा की) बेटियाँ बनायी हैं लोग फरिश्तों की पैदाइश क्यों खड़े देख रहे थे अभी उनकी शहादत क़लम बन्द कर ली जाती है
20وَقَالُوا لَوْ شَاءَ الرَّحْمَٰنُ مَا عَبَدْنَاهُم ۗ مَّا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ
और (क़यामत) में उनसे बाज़पुर्स की जाएगी और कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो हम उनकी परसतिश न करते उनको उसकी कुछ ख़बर ही नहीं ये लोग तो बस अटकल पच्चू बातें किया करते हैं
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 18

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Saturday, October 3, 2026

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