अज़-ज़ुखरुफ · 17/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِمَا ضَرَبَ لِلرَّحْمَٰنِ مَثَلًا ظَلَّ وَجْهُهُ مُسْوَدًّا وَهُوَ كَظِيمٌ ۝١٧
Wa izaa bushshira ahaduhum bimaa daraba lir Rahmaani masalan zalla wajhuhoo muswaddanw wa hua kazeem
📖 हिंदी अर्थ
हालॉकि जब उनमें किसी शख़्श को उस चीज़ (बेटी) की ख़ुशख़बरी दी जाती है जिसकी मिसल उसने ख़ुदा के लिए बयान की है तो वह (ग़ुस्से के मारे) सियाह हो जाता है और ताव पेंच खाने लगता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بُشِّرَ: खुशखबरी दी गई
  • ضَرَبَ لِلرَّحْمٰنِ مَثَلًا: जिसे उन्होंने रहमान के लिए मिसाल ठहराया (यानी बेटियाँ)
  • ظَلَّ وَجْهُهُ مُسْوَدًّا: उसका चेहरा काला पड़ गया
  • كَظِيمٌ: ग़म और ग़ुस्से से भरा हुआ, जो अपने ग़ुस्से को अंदर ही अंदर दबाए हुए हो

तफ़सीर:

जब इनमें से किसी को उस चीज़ की खुशखबरी दी जाती है जिसे उन्होंने रहमान (अल्लाह) के लिए ठहराया है—यानी बेटियों को अल्लाह की संतान बताया—तो उसका चेहरा ग़म और शर्मिंदगी से काला पड़ जाता है और वह ग़ुस्से और दुख से भर जाता है। वह इस खुशखबरी को सुनकर इतना दुखी होता है कि उसका चेहरा बदल जाता है और वह अपने ग़ुस्से को अंदर ही अंदर दबाए रहता है, क्योंकि अरबों में बेटी की पैदाइश को बदनसीबी समझा जाता था।

अब ज़रा सोचिए! जिस इंसान को अपने लिए बेटी की पैदाइश इतनी बुरी लगती है कि उसका चेहरा काला पड़ जाता है और वह ग़म से भर जाता है, वही इंसान अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराता है! यह कैसी नाइंसाफ़ी है? वे अल्लाह के लिए वह चीज़ कैसे मान लेते हैं जिसे वे खुद अपने लिए अपमानजनक समझते हैं?

सुब्हानअल्लाह! यह आयत उन लोगों की बड़ी बेहूदगी और ज़ुल्म को उजागर करती है। अल्लाह तआला उनके इस झूठे और बेतुके दावे से बिल्कुल पाक और मुकद्दस है। वह किसी की संतान से परे है, न उसकी कोई बेटी है और न बेटा। वह हर कमी और हर बुराई से पाक है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की शान के बारे में सोचते समय हमें उसकी महानता और पाकीज़गी का पूरा ख़्याल रखना चाहिए। जो चीज़ हम खुद के लिए बुरी समझते हैं, उसे अल्लाह के लिए कैसे ठहरा सकते हैं? अल्लाह तआला हर उस चीज़ से पाक है जो ये ज़ालिम लोग उसके बारे में कहते हैं। वह सबसे बड़ा, सबसे श्रेष्ठ और सबसे पाक है। हमें चाहिए कि हम उसकी तारीफ़ में वही बात कहें जो उसने खुद कही है और उसके नबी (ﷺ) ने सिखाई है—और वह है: वह अकेला है, बेनियाज़ है, न उसने किसी को जन्म दिया और न वह किसी से जन्मा, और उसका कोई समकक्ष नहीं।



📜 आयत 15-19 — अज़-ज़ुखरुफ

15وَجَعَلُوا لَهُ مِنْ عِبَادِهِ جُزْءًا ۚ إِنَّ الْإِنسَانَ لَكَفُورٌ مُّبِينٌ
और उन लोगों ने उसके बन्दों में से उसके लिए औलाद क़रार दी है इसमें शक़ नहीं कि इन्सान खुल्लम खुल्ला बड़ा ही नाशक्रा है
16أَمِ اتَّخَذَ مِمَّا يَخْلُقُ بَنَاتٍ وَأَصْفَاكُم بِالْبَنِينَ
क्या उसने अपनी मख़लूक़ात में से ख़ुद तो बेटियाँ ली हैं और तुमको चुनकर बेटे दिए हैं
17وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِمَا ضَرَبَ لِلرَّحْمَٰنِ مَثَلًا ظَلَّ وَجْهُهُ مُسْوَدًّا وَهُوَ كَظِيمٌ
हालॉकि जब उनमें किसी शख़्श को उस चीज़ (बेटी) की ख़ुशख़बरी दी जाती है जिसकी मिसल उसने ख़ुदा के लिए बयान की है तो वह (ग़ुस्से के मारे) सियाह हो जाता है और ताव पेंच खाने लगता है
18أَوَمَن يُنَشَّأُ فِي الْحِلْيَةِ وَهُوَ فِي الْخِصَامِ غَيْرُ مُبِينٍ
क्या वह (औरत) जो ज़ेवरों में पाली पोसी जाए और झगड़े में (अच्छी तरह) बात तक न कर सकें (ख़ुदा की बेटी हो सकती है)
19وَجَعَلُوا الْمَلَائِكَةَ الَّذِينَ هُمْ عِبَادُ الرَّحْمَٰنِ إِنَاثًا ۚ أَشَهِدُوا خَلْقَهُمْ ۚ سَتُكْتَبُ شَهَادَتُهُمْ وَيُسْأَلُونَ
और उन लोगों ने फ़रिश्तों को कि वह भी ख़ुदा के बन्दे हैं (ख़ुदा की) बेटियाँ बनायी हैं लोग फरिश्तों की पैदाइश क्यों खड़े देख रहे थे अभी उनकी शहादत क़लम बन्द कर ली जाती है
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 17

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Tuesday, August 18, 2026

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