Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- जَعَلُوا – उन्होंने बना लिया / ठहरा लिया
- عِبَادُ الرَّحْمَنِ – रहमान (अल्लाह) के बंदे
- إِنَاثًا – लड़कियाँ / स्त्रियाँ
- أَشَهِدُوا – क्या वे उपस्थित थे / क्या उन्होंने देखा
- سَتُكْتَبُ – लिख दी जाएगी
- شَهَادَتُهُمْ – उनकी गवाही
- يُسْأَلُونَ – उनसे पूछा जाएगा
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मुशरिकों (बहुदेववादियों) की भ्रांत धारणा और झूठ का पर्दाफाश करती है जिन्होंने अल्लाह के फ़रिश्तों को उसकी बेटियाँ कहकर उन्हें औरत (स्त्री) क़रार दे दिया था। जबकि फ़रिश्ते अल्लाह के इज़्ज़तदार बंदे हैं, न तो वे नर हैं और न ही मादा — वे नूर (प्रकाश) से पैदा की गई मख़लूक़ हैं, जो अल्लाह के हुक्म की पूरी तरह पालना करती हैं।
अल्लाह तआला इस आयत में उनसे पूछता है: "क्या वे उस वक़्त मौजूद थे जब अल्लाह ने फ़रिश्तों को पैदा किया था, ताकि वे यह गवाही दे सकें कि वे औरतें हैं?" यह एक ऐसा सवाल है जो उनकी बेबुनियाद बात को शर्मसार कर देता है। उनके पास न कोई इल्म है, न कोई सबूत — सिर्फ़ अटकल और अंदाज़े से वे अल्लाह पर झूठ बोल रहे हैं।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि यह झूठी गवाही लिखी जाएगी, और क़यामत के दिन उनसे इसके बारे में पूछा जाएगा। वे अपनी इस बात का कोई जवाब नहीं दे पाएँगे, और उन्हें अपने इस कुकर्म की सज़ा मिलेगी।
दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के बारे में बिना इल्म के बात करना कितनी बड़ी ग़लती है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की पाक ज़ात और उसकी मख़लूक़ात के बारे में सिर्फ़ वही कहें जो क़ुरआन और सहीह हदीस से साबित हो। फ़रिश्ते अल्लाह के मुक़र्रब बंदे हैं, हमारे भाई नहीं, हमारी बहनें नहीं — वे एक अलग मख़लूक़ हैं जो हमेशा अल्लाह की इबादत में मशग़ूल रहते हैं।
इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि क़यामत के दिन हर इंसान से उसके कहे गए हर शब्द का हिसाब लिया जाएगा। इसलिए हमें अपनी ज़ुबान को झूठ, बदगुमानी और अल्लाह पर बोहतान लगाने से बचाना चाहिए। जो लोग अल्लाह और उसके दीन के बारे में झूठ फैलाते हैं, वे आख़िरत में शर्मिंदा होंगे और अपनी सज़ा पाएँगे।
हमें अल्लाह की पाक ज़ात और उसकी सिफ़ात को उसी तरह समझना चाहिए जैसे क़ुरआन और सुन्नत ने बताया है — बिना किसी तहरीफ़, तातील, तशबीह और तमसील के। यही सीधा रास्ता है, और यही हमें जन्नत तक पहुँचाने वाला है।
📜 आयत 17-21 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 19
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन लोगों ने फ़रिश्तों को कि वह भी ख़ुदा…सूरा आयत 19/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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