अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُمَّةٍ: यहाँ इसका अर्थ है तरीका, मार्ग, धर्म या पंथ।
- آثَارِهِم: उनके निशानों पर, यानी उनके पदचिह्नों पर चलते हुए।
- مُّهْتَدُونَ: हिदायत पाए हुए, सीधे रास्ते पर चलने वाले।
तफसीर:
यह आयत उन लोगों का जवाब दे रही है जो सच्चाई को सुनकर भी उसे कबूल नहीं करते। जब उन्हें तौहीद (एकेश्वरवाद) और सच्चे धर्म की दावत दी जाती है, तो वे कोई ठोस दलील नहीं देते, बल्कि सिर्फ यह कहते हैं: "हमने अपने बाप-दादाओं को एक तरीके और धर्म पर पाया है, और हम उन्हीं के निशानों पर चलते हुए हिदायत पाए हुए हैं।"
यानी उनकी सारी दलील सिर्फ अंधी पैरवी (blind following) है। वे अपने बुज़ुर्गों की राह को ही सच्चाई समझ बैठे हैं, चाहे वह राह कितनी ही गलत क्यों न हो। उन्होंने अपने पूर्वजों को जिस हाल पर पाया, उसे ही हक़ और हिदायत मान लिया, बिना यह देखे कि वह राह कुरान और सुन्नत के मुताबिक़ है या नहीं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अंधी तक़लीद (blind imitation) हिदायत नहीं है। सच्ची हिदायत वही है जो अल्लाह की तरफ से आई हो। अगर हमारे बुज़ुर्ग किसी गलत रास्ते पर हों, तो हमें उनकी पैरवी नहीं करनी चाहिए, बल्कि सच्चाई को कबूल करना चाहिए, चाहे वह हमारे माँ-बाप या दादा-दादी के रास्ते से अलग ही क्यों न हो।
इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि इंसान को अपनी अक्ल और दिल से सच्चाई को परखना चाहिए। अल्लाह ने हमें अक्ल दी है ताकि हम सोचें-समझें, और कुरान भेजा है ताकि हम उस पर अमल करें। जो लोग सिर्फ इसलिए गुमराही पर हैं कि उनके बाप-दादा गुमराह थे, वे क़यामत के दिन कोई बहाना नहीं पेश कर सकेंगे।
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने धर्म को समझकर अपनाएँ, सिर्फ इसलिए नहीं कि हमारे बुज़ुर्ग उस पर थे, बल्कि इसलिए कि वह सच्चा है और अल्लाह की तरफ से है। अल्लाह हमें सच्ची समझ और हिदायत अता फरमाए। आमीन।
📜 आयत 20-24 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 22
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बल्कि ये लोग तो ये कहते हैं कि हमने अपने…सूरा आयत 22/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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