अज़-ज़ुखरुफ · 22/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
بَلْ قَالُوا إِنَّا وَجَدْنَا آبَاءَنَا عَلَىٰ أُمَّةٍ وَإِنَّا عَلَىٰ آثَارِهِم مُّهْتَدُونَ ۝٢٢
Bal qaalooo innaa wajadnaaa aabaaa`anaa `alaaa ummatinw wa innaa `alaaa aasaarihim muhtadoon
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि ये लोग तो ये कहते हैं कि हमने अपने बाप दादाओं को एक तरीके पर पाया और हम उनको क़दम ब क़दम ठीक रास्ते पर चले जा रहें हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُمَّةٍ: यहाँ इसका अर्थ है तरीका, मार्ग, धर्म या पंथ।
  • آثَارِهِم: उनके निशानों पर, यानी उनके पदचिह्नों पर चलते हुए।
  • مُّهْتَدُونَ: हिदायत पाए हुए, सीधे रास्ते पर चलने वाले।

तफसीर:

यह आयत उन लोगों का जवाब दे रही है जो सच्चाई को सुनकर भी उसे कबूल नहीं करते। जब उन्हें तौहीद (एकेश्वरवाद) और सच्चे धर्म की दावत दी जाती है, तो वे कोई ठोस दलील नहीं देते, बल्कि सिर्फ यह कहते हैं: "हमने अपने बाप-दादाओं को एक तरीके और धर्म पर पाया है, और हम उन्हीं के निशानों पर चलते हुए हिदायत पाए हुए हैं।"

यानी उनकी सारी दलील सिर्फ अंधी पैरवी (blind following) है। वे अपने बुज़ुर्गों की राह को ही सच्चाई समझ बैठे हैं, चाहे वह राह कितनी ही गलत क्यों न हो। उन्होंने अपने पूर्वजों को जिस हाल पर पाया, उसे ही हक़ और हिदायत मान लिया, बिना यह देखे कि वह राह कुरान और सुन्नत के मुताबिक़ है या नहीं।

यह आयत हमें सिखाती है कि अंधी तक़लीद (blind imitation) हिदायत नहीं है। सच्ची हिदायत वही है जो अल्लाह की तरफ से आई हो। अगर हमारे बुज़ुर्ग किसी गलत रास्ते पर हों, तो हमें उनकी पैरवी नहीं करनी चाहिए, बल्कि सच्चाई को कबूल करना चाहिए, चाहे वह हमारे माँ-बाप या दादा-दादी के रास्ते से अलग ही क्यों न हो।

इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि इंसान को अपनी अक्ल और दिल से सच्चाई को परखना चाहिए। अल्लाह ने हमें अक्ल दी है ताकि हम सोचें-समझें, और कुरान भेजा है ताकि हम उस पर अमल करें। जो लोग सिर्फ इसलिए गुमराही पर हैं कि उनके बाप-दादा गुमराह थे, वे क़यामत के दिन कोई बहाना नहीं पेश कर सकेंगे।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने धर्म को समझकर अपनाएँ, सिर्फ इसलिए नहीं कि हमारे बुज़ुर्ग उस पर थे, बल्कि इसलिए कि वह सच्चा है और अल्लाह की तरफ से है। अल्लाह हमें सच्ची समझ और हिदायत अता फरमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — अज़-ज़ुखरुफ

20وَقَالُوا لَوْ شَاءَ الرَّحْمَٰنُ مَا عَبَدْنَاهُم ۗ مَّا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ
और (क़यामत) में उनसे बाज़पुर्स की जाएगी और कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो हम उनकी परसतिश न करते उनको उसकी कुछ ख़बर ही नहीं ये लोग तो बस अटकल पच्चू बातें किया करते हैं
21أَمْ آتَيْنَاهُمْ كِتَابًا مِّن قَبْلِهِ فَهُم بِهِ مُسْتَمْسِكُونَ
या हमने उनको उससे पहले कोई किताब दी थी कि ये लोग उसे मज़बूत थामें हुए हैं
22بَلْ قَالُوا إِنَّا وَجَدْنَا آبَاءَنَا عَلَىٰ أُمَّةٍ وَإِنَّا عَلَىٰ آثَارِهِم مُّهْتَدُونَ
बल्कि ये लोग तो ये कहते हैं कि हमने अपने बाप दादाओं को एक तरीके पर पाया और हम उनको क़दम ब क़दम ठीक रास्ते पर चले जा रहें हैं
23وَكَذَٰلِكَ مَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِي قَرْيَةٍ مِّن نَّذِيرٍ إِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَا إِنَّا وَجَدْنَا آبَاءَنَا عَلَىٰ أُمَّةٍ وَإِنَّا عَلَىٰ آثَارِهِم مُّقْتَدُونَ
और (ऐ रसूल) इसी तरह हमने तुमसे पहले किसी बस्ती में कोई डराने वाला (पैग़म्बर) नहीं भेजा मगर वहाँ के ख़ुशहाल लोगों ने यही कहा कि हमने अपने बाप दादाओं को एक तरीके पर पाया, और हम यक़ीनी उनके क़दम ब क़दम चले जा रहे हैं
24۞ قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكُم بِأَهْدَىٰ مِمَّا وَجَدتُّمْ عَلَيْهِ آبَاءَكُمْ ۖ قَالُوا إِنَّا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ كَافِرُونَ
(इस पर) उनके पैग़म्बर ने कहा भी जिस तरीक़े पर तुमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे मैं तुम्हारे पास इससे बेहतर राहे रास्त पर लाने वाला दीन लेकर आया हूँ (तो भी न मानोगे) वह बोले (कुछ हो मगर) हम तो उस दीन को जो तुम देकर भेजे गए हो मानने वाले नहीं
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 22

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Tuesday, August 18, 2026

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