अज़-ज़ुखरुफ · 21/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
أَمْ آتَيْنَاهُمْ كِتَابًا مِّن قَبْلِهِ فَهُم بِهِ مُسْتَمْسِكُونَ ۝٢١
Am aatainaahum Kitaabam min qablihee fahum bihee mustamsikoon
📖 हिंदी अर्थ
या हमने उनको उससे पहले कोई किताब दी थी कि ये लोग उसे मज़बूत थामें हुए हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • आतयनाहुम – क्या हमने उन्हें दिया
  • किताबन – कोई किताब (ग्रंथ)
  • मिन क़ब्लिही – इस (क़ुरआन) से पहले
  • मुस्तम्सिकून – थामे हुए हैं, पकड़े हुए हैं

तफ़सीर:

यह आयत उन मुशरिकों (बहुदेववादियों) को संबोधित करती है जो रसूलुल्लाह ﷺ की शिक्षाओं का विरोध करते थे और अपने शिर्क (बहुदेववाद) को सही ठहराने के लिए अंधी परंपराओं का सहारा लेते थे। अल्लाह तआला उनसे पूछता है: क्या उन्होंने फ़रिश्तों की पैदाइश देखी थी? या क्या हमने उन्हें इस क़ुरआन से पहले कोई ऐसी किताब दी थी जो उन्हें अल्लाह के साथ दूसरों की इबादत की इजाज़त देती हो? क्या उनके पास कोई ऐसा लिखित प्रमाण है जिसे वे पकड़े हुए हैं और उसका हवाला देते हैं?

यह एक अलंकारिक प्रश्न है जो उनकी बुनियाद को हिला देता है। इसका उत्तर स्पष्ट है: नहीं! उनके पास न तो कोई आसमानी किताब है और न ही कोई ईश्वरीय आदेश। वे केवल अपने पूर्वजों की अंधी परंपराओं का अनुसरण कर रहे हैं, जो न तो कोई सबूत पेश कर सकते हैं और न ही कोई तर्क।

यह आयत हमें सिखाती है कि धर्म के मामले में केवल वही चीज़ मान्य है जो अल्लाह की किताब और उसके रसूल की सुन्नत से साबित हो। अंधी परंपराएं, पूर्वजों की नक़ल, या सामाजिक दबाव — इनमें से कोई भी हक़ीक़त का पैमाना नहीं हो सकता। अल्लाह ने इंसान को अक़्ल दी है और किताबें भेजीं ताकि वह सच को झूठ से अलग कर सके।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सच्चाई की तलाश की दावत देती है। जब हम क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में अपने जीवन को ढालते हैं, तो हम उस रास्ते पर चलते हैं जो अल्लाह ने हमारे लिए चुना है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में कामयाबी तक पहुंचाता है। आइए, हम अपने दिलों को क़ुरआन की रोशनी से रोशन करें और उसे अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाएं — क्योंकि यही वह किताब है जो हमें सीधे रास्ते पर चलाती है और हर भटकाव से बचाती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — अज़-ज़ुखरुफ

19وَجَعَلُوا الْمَلَائِكَةَ الَّذِينَ هُمْ عِبَادُ الرَّحْمَٰنِ إِنَاثًا ۚ أَشَهِدُوا خَلْقَهُمْ ۚ سَتُكْتَبُ شَهَادَتُهُمْ وَيُسْأَلُونَ
और उन लोगों ने फ़रिश्तों को कि वह भी ख़ुदा के बन्दे हैं (ख़ुदा की) बेटियाँ बनायी हैं लोग फरिश्तों की पैदाइश क्यों खड़े देख रहे थे अभी उनकी शहादत क़लम बन्द कर ली जाती है
20وَقَالُوا لَوْ شَاءَ الرَّحْمَٰنُ مَا عَبَدْنَاهُم ۗ مَّا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ
और (क़यामत) में उनसे बाज़पुर्स की जाएगी और कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो हम उनकी परसतिश न करते उनको उसकी कुछ ख़बर ही नहीं ये लोग तो बस अटकल पच्चू बातें किया करते हैं
21أَمْ آتَيْنَاهُمْ كِتَابًا مِّن قَبْلِهِ فَهُم بِهِ مُسْتَمْسِكُونَ
या हमने उनको उससे पहले कोई किताब दी थी कि ये लोग उसे मज़बूत थामें हुए हैं
22بَلْ قَالُوا إِنَّا وَجَدْنَا آبَاءَنَا عَلَىٰ أُمَّةٍ وَإِنَّا عَلَىٰ آثَارِهِم مُّهْتَدُونَ
बल्कि ये लोग तो ये कहते हैं कि हमने अपने बाप दादाओं को एक तरीके पर पाया और हम उनको क़दम ब क़दम ठीक रास्ते पर चले जा रहें हैं
23وَكَذَٰلِكَ مَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِي قَرْيَةٍ مِّن نَّذِيرٍ إِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَا إِنَّا وَجَدْنَا آبَاءَنَا عَلَىٰ أُمَّةٍ وَإِنَّا عَلَىٰ آثَارِهِم مُّقْتَدُونَ
और (ऐ रसूल) इसी तरह हमने तुमसे पहले किसी बस्ती में कोई डराने वाला (पैग़म्बर) नहीं भेजा मगर वहाँ के ख़ुशहाल लोगों ने यही कहा कि हमने अपने बाप दादाओं को एक तरीके पर पाया, और हम यक़ीनी उनके क़दम ब क़दम चले जा रहे हैं
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
21आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 21

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Tuesday, August 18, 2026

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