अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- आतयनाहुम – क्या हमने उन्हें दिया
- किताबन – कोई किताब (ग्रंथ)
- मिन क़ब्लिही – इस (क़ुरआन) से पहले
- मुस्तम्सिकून – थामे हुए हैं, पकड़े हुए हैं
तफ़सीर:
यह आयत उन मुशरिकों (बहुदेववादियों) को संबोधित करती है जो रसूलुल्लाह ﷺ की शिक्षाओं का विरोध करते थे और अपने शिर्क (बहुदेववाद) को सही ठहराने के लिए अंधी परंपराओं का सहारा लेते थे। अल्लाह तआला उनसे पूछता है: क्या उन्होंने फ़रिश्तों की पैदाइश देखी थी? या क्या हमने उन्हें इस क़ुरआन से पहले कोई ऐसी किताब दी थी जो उन्हें अल्लाह के साथ दूसरों की इबादत की इजाज़त देती हो? क्या उनके पास कोई ऐसा लिखित प्रमाण है जिसे वे पकड़े हुए हैं और उसका हवाला देते हैं?
यह एक अलंकारिक प्रश्न है जो उनकी बुनियाद को हिला देता है। इसका उत्तर स्पष्ट है: नहीं! उनके पास न तो कोई आसमानी किताब है और न ही कोई ईश्वरीय आदेश। वे केवल अपने पूर्वजों की अंधी परंपराओं का अनुसरण कर रहे हैं, जो न तो कोई सबूत पेश कर सकते हैं और न ही कोई तर्क।
यह आयत हमें सिखाती है कि धर्म के मामले में केवल वही चीज़ मान्य है जो अल्लाह की किताब और उसके रसूल की सुन्नत से साबित हो। अंधी परंपराएं, पूर्वजों की नक़ल, या सामाजिक दबाव — इनमें से कोई भी हक़ीक़त का पैमाना नहीं हो सकता। अल्लाह ने इंसान को अक़्ल दी है और किताबें भेजीं ताकि वह सच को झूठ से अलग कर सके।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सच्चाई की तलाश की दावत देती है। जब हम क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में अपने जीवन को ढालते हैं, तो हम उस रास्ते पर चलते हैं जो अल्लाह ने हमारे लिए चुना है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में कामयाबी तक पहुंचाता है। आइए, हम अपने दिलों को क़ुरआन की रोशनी से रोशन करें और उसे अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाएं — क्योंकि यही वह किताब है जो हमें सीधे रास्ते पर चलाती है और हर भटकाव से बचाती है।
📜 आयत 19-23 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 21
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या हमने उनको उससे पहले कोई किताब दी थी कि…सूरा आयत 21/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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