अज़-ज़ुखरुफ · 35/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
وَزُخْرُفًا ۚ وَإِن كُلُّ ذَٰلِكَ لَمَّا مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۚ وَالْآخِرَةُ عِندَ رَبِّكَ لِلْمُتَّقِينَ ۝٣٥
Wa zukhrufaa; wa in kullu zaalika lammaa mataa`ul hayaatid dunyaa; wal aakhiratu `inda Rabbika lilmuttaqeen
📖 हिंदी अर्थ
ये सब साज़ो सामान, तो बस दुनियावी ज़िन्दगी के (चन्द रोज़ा) साज़ो सामान हैं (जो मिट जाएँगे) और आख़ेरत (का सामान) तो तुम्हारे परवरदिगार के यहॉ ख़ास परहेज़गारों के लिए है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَزُخْرُفًا: सोना (यहाँ आभूषण और सजावट के रूप में सोना मुराद है)
  • لَمَّا: अर्थात "إِلَّا" (के सिवा कुछ नहीं)
  • مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا: दुनिया की ज़िंदगी का थोड़ा सा सामान और अस्थायी लाभ
  • الْآخِرَةُ: आख़िरत का नेमत (यानी जन्नत)
  • لِلْمُتَّقِينَ: उन लोगों के लिए जो अल्लाह से डरते हैं और उसके हुक्मों की पालना करते हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि अगर हम चाहते तो काफ़िरों के घरों के दरवाज़े चाँदी के बना देते और उनके लिए सोने के आभूषण और साज-सामान मुहैया कर देते, जिन पर वे टेक लगाकर बैठते। लेकिन यह सब कुछ — चाहे वह चाँदी के दरवाज़े हों, सोने के ज़ेवर हों या और कोई ऐश-ओ-आराम — सिर्फ़ दुनिया की ज़िंदगी का थोड़ा सा अस्थायी सामान है, जो जल्द ही ख़त्म होने वाला है। इसका कोई स्थायी मूल्य नहीं है। यह दुनिया का माल-ओ-मताअ फ़ानी है, जो कुछ दिनों के लिए है और फिर समाप्त हो जाता है।

असली और हमेशा रहने वाला नेमत तो आख़िरत का है, जो अल्लाह के पास उसके डरने वाले बंदों के लिए महफ़ूज़ है। यह नेमत सिर्फ़ उन्हीं को मिलेगी जो अल्लाह के हुक्मों की पालना करते हैं, उसकी मनाही से बचते हैं, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारते हैं। यह नेमत काफ़िरों और गुनाहगारों के लिए नहीं है, बल्कि सिर्फ़ मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए है।

याद रखिए! दुनिया की दौलत और ऐश-ओ-आराम चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह बहुत थोड़ा और फ़ानी है। अल्लाह ने जो कुछ भी दुनिया में दिया है, वह सिर्फ़ एक इम्तिहान है। असली कामयाबी उसी की है जो आख़िरत को सामने रखकर ज़िंदगी गुज़ारे। अल्लाह तआला ने अपने रहमत से हमें बताया है कि जन्नत की नेमतें उनके लिए हैं जो उससे डरते हैं — यानी जो नेकी करते हैं, गुनाहों से बचते हैं, और अपने रब की इबादत में मशगूल रहते हैं।

तो प्यारे भाइयो और बहनो! हमें दुनिया के झूठे चमक-दमक में नहीं उलझना चाहिए, बल्कि अपनी आख़िरत को संवारना चाहिए। दुनिया की चीज़ें तो मिलेंगी और ख़त्म हो जाएँगी, लेकिन आख़िरत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं। अल्लाह से डरकर चलें, उसके हुक्मों पर अमल करें, ताकि उसकी जन्नत और उसकी रज़ा हासिल कर सकें। यही असली कामयाबी है, और यही सबसे बड़ी भलाई है।



📜 आयत 33-37 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

33وَلَوْلَا أَن يَكُونَ النَّاسُ أُمَّةً وَاحِدَةً لَّجَعَلْنَا لِمَن يَكْفُرُ بِالرَّحْمَٰنِ لِبُيُوتِهِمْ سُقُفًا مِّن فِضَّةٍ وَمَعَارِجَ عَلَيْهَا يَظْهَرُونَ
और अगर ये बात न होती कि (आख़िर) सब लोग एक ही तरीक़े के हो जाएँगे तो हम उनके लिए जो ख़ुदा से इन्कार करते हैं उनके घरों की छतें और वही सीढ़ियाँ जिन पर वह चढ़ते हैं (उतरते हैं)
34وَلِبُيُوتِهِمْ أَبْوَابًا وَسُرُرًا عَلَيْهَا يَتَّكِئُونَ
और उनके घरों के दरवाज़े और वह तख्त जिन पर तकिये लगाते हैं चाँदी और सोने के बना देते
35وَزُخْرُفًا ۚ وَإِن كُلُّ ذَٰلِكَ لَمَّا مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۚ وَالْآخِرَةُ عِندَ رَبِّكَ لِلْمُتَّقِينَ
ये सब साज़ो सामान, तो बस दुनियावी ज़िन्दगी के (चन्द रोज़ा) साज़ो सामान हैं (जो मिट जाएँगे) और आख़ेरत (का सामान) तो तुम्हारे परवरदिगार के यहॉ ख़ास परहेज़गारों के लिए है
36وَمَن يَعْشُ عَن ذِكْرِ الرَّحْمَٰنِ نُقَيِّضْ لَهُ شَيْطَانًا فَهُوَ لَهُ قَرِينٌ
और जो शख़्श ख़ुदा की चाह से अन्धा बनता है हम (गोया ख़ुद) उसके वास्ते शैतान मुक़र्रर कर देते हैं तो वही उसका (हर दम का) साथी है
37وَإِنَّهُمْ لَيَصُدُّونَهُمْ عَنِ السَّبِيلِ وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُم مُّهْتَدُونَ
और वह (शयातीन) उन लोगों को (ख़ुदा की) राह से रोकते रहते हैं बावजूद इसके वह उसी ख्याल में हैं कि वह यक़ीनी राहे रास्त पर हैं
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 35

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Saturday, October 3, 2026

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