Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَزُخْرُفًا: सोना (यहाँ आभूषण और सजावट के रूप में सोना मुराद है)
- لَمَّا: अर्थात "إِلَّا" (के सिवा कुछ नहीं)
- مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا: दुनिया की ज़िंदगी का थोड़ा सा सामान और अस्थायी लाभ
- الْآخِرَةُ: आख़िरत का नेमत (यानी जन्नत)
- لِلْمُتَّقِينَ: उन लोगों के लिए जो अल्लाह से डरते हैं और उसके हुक्मों की पालना करते हैं
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि अगर हम चाहते तो काफ़िरों के घरों के दरवाज़े चाँदी के बना देते और उनके लिए सोने के आभूषण और साज-सामान मुहैया कर देते, जिन पर वे टेक लगाकर बैठते। लेकिन यह सब कुछ — चाहे वह चाँदी के दरवाज़े हों, सोने के ज़ेवर हों या और कोई ऐश-ओ-आराम — सिर्फ़ दुनिया की ज़िंदगी का थोड़ा सा अस्थायी सामान है, जो जल्द ही ख़त्म होने वाला है। इसका कोई स्थायी मूल्य नहीं है। यह दुनिया का माल-ओ-मताअ फ़ानी है, जो कुछ दिनों के लिए है और फिर समाप्त हो जाता है।
असली और हमेशा रहने वाला नेमत तो आख़िरत का है, जो अल्लाह के पास उसके डरने वाले बंदों के लिए महफ़ूज़ है। यह नेमत सिर्फ़ उन्हीं को मिलेगी जो अल्लाह के हुक्मों की पालना करते हैं, उसकी मनाही से बचते हैं, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारते हैं। यह नेमत काफ़िरों और गुनाहगारों के लिए नहीं है, बल्कि सिर्फ़ मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए है।
याद रखिए! दुनिया की दौलत और ऐश-ओ-आराम चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह बहुत थोड़ा और फ़ानी है। अल्लाह ने जो कुछ भी दुनिया में दिया है, वह सिर्फ़ एक इम्तिहान है। असली कामयाबी उसी की है जो आख़िरत को सामने रखकर ज़िंदगी गुज़ारे। अल्लाह तआला ने अपने रहमत से हमें बताया है कि जन्नत की नेमतें उनके लिए हैं जो उससे डरते हैं — यानी जो नेकी करते हैं, गुनाहों से बचते हैं, और अपने रब की इबादत में मशगूल रहते हैं।
तो प्यारे भाइयो और बहनो! हमें दुनिया के झूठे चमक-दमक में नहीं उलझना चाहिए, बल्कि अपनी आख़िरत को संवारना चाहिए। दुनिया की चीज़ें तो मिलेंगी और ख़त्म हो जाएँगी, लेकिन आख़िरत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं। अल्लाह से डरकर चलें, उसके हुक्मों पर अमल करें, ताकि उसकी जन्नत और उसकी रज़ा हासिल कर सकें। यही असली कामयाबी है, और यही सबसे बड़ी भलाई है।
📜 आयत 33-37 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 35
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये सब साज़ो सामान, तो बस दुनियावी ज़िन्दगी के (चन्द…सूरा आयत 35/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


