अज़-ज़ुखरुफ · 58/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَقَالُوا أَآلِهَتُنَا خَيْرٌ أَمْ هُوَ ۚ مَا ضَرَبُوهُ لَكَ إِلَّا جَدَلًا ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ خَصِمُونَ ۝٥٨
Wa qaalooo `a-aalihatunaa khairun am hoo; maa daraboohu laka illaa jadalaa; balhum qawmun khasimoon
📖 हिंदी अर्थ
और बोल उठे कि भला हमारे माबूद अच्छे हैं या वह (ईसा) उन लोगों ने जो ईसा की मिसाल तुमसे बयान की है तो सिर्फ झगड़ने को

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَآلِهَتُنَا: हमारे पूज्य (जिन्हें हम पूजते हैं)
  • خَيْرٌ: बेहतर
  • أَمْ هُوَ: या वह (अर्थात ईसा अलैहिस्सलाम)
  • مَا ضَرَبُوهُ لَكَ: उन्होंने यह उदाहरण आपके सामने नहीं रखा
  • إِلَّا جَدَلًا: सिर्फ झगड़े और हठधर्मिता के लिए
  • خَصِمُونَ: झगड़ालू, हठी, विवाद करने वाले

तफसीर (व्याख्या):

मक्का के मुशरिकीन ने जब यह देखा कि नबी करीम ﷺ ईसा अलैहिस्सलाम को अल्लाह का नेक बंदा और महान रसूल बताते हैं, तो उन्होंने एक बातिल (झूठा) और धोखेबाज़ सवाल उठाया। उन्होंने कहा: "क्या हमारे पूज्य (जिन्हें हम पूजते हैं) बेहतर हैं या ईसा?" उनका असली मकसद यह था कि अगर ईसा को अल्लाह का पसंदीदा बंदा माना जाए, और क़ुरआन में यह भी कहा गया है कि अल्लाह को छोड़कर जिन्हें पूजा जाता है वे जहन्नम का ईंधन होंगे, तो फिर ईसा भी तो पूजे जाते हैं (नासारा उन्हें पूजते हैं), तो क्या वह भी जहन्नम में जाएंगे? अगर हाँ, तो हमें भी कोई परवाह नहीं, हम अपने देवताओं के साथ जहन्नम में चले जाएंगे। इस तरह वे इस्लाम के खिलाफ एक भ्रामक दलील पेश करना चाहते थे।

अल्लाह तआला ने उनकी इस चाल का पर्दाफाश करते हुए फरमाया कि यह लोग यह उदाहरण सिर्फ झगड़े और हठधर्मिता के लिए लाए हैं, सच्चाई जानने के लिए नहीं। ये लोग स्वभाव से ही झगड़ालू और हठी हैं। इनका उद्देश्य कभी सत्य की खोज नहीं होता, बल्कि ये हर हाल में अपनी बात पर अड़े रहना चाहते हैं।

अगर ये सच में जानना चाहते तो उन्हें यह समझ लेना चाहिए था कि ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के नेक बंदे और रसूल थे, उन्होंने कभी खुद को पूजने का दावा नहीं किया। नासारा ने उन्हें पूजना शुरू कर दिया, यह उनकी अपनी गलती थी, ईसा अलैहिस्सलाम की नहीं। अल्लाह तआला ने उन्हें साफ कर दिया कि जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों को पूजते हैं, वे जहन्नम में जाएंगे, चाहे वे ईसा हों या कोई और। लेकिन ईसा अलैहिस्सलाम खुद तो अल्लाह के नेक बंदे थे, उन्होंने कभी पूजे जाने की इजाजत नहीं दी।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को कभी झगड़े और हठधर्मिता की नज़र से नहीं देखना चाहिए। इंसान को चाहिए कि वह खुले दिल से सत्य को स्वीकार करे। इस्लाम दुनिया को एक साफ और सच्चा रास्ता दिखाता है — सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करो, जो सारे जहान का मालिक है। ईसा अलैहिस्सलाम भी उसी अल्लाह के बंदे और रसूल थे। आइए हम झगड़े और हठधर्मिता को छोड़कर सच्चाई को अपनाएँ, क्योंकि सच्चाई ही कल (क़यामत के दिन) हमारे काम आएगी। अल्लाह तआला हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 56-60 — अज़-ज़ुखरुफ

56فَجَعَلْنَاهُمْ سَلَفًا وَمَثَلًا لِّلْآخِرِينَ
फिर हमने उनको गया गुज़रा और पिछलों के वास्ते इबरत बना दिया
57۞ وَلَمَّا ضُرِبَ ابْنُ مَرْيَمَ مَثَلًا إِذَا قَوْمُكَ مِنْهُ يَصِدُّونَ
और(ऐ रसूल) जब मरियम के बेटे (ईसा) की मिसाल बयान की गयी तो उससे तुम्हारी क़ौम के लोग खिलखिला कर हंसने लगे
58وَقَالُوا أَآلِهَتُنَا خَيْرٌ أَمْ هُوَ ۚ مَا ضَرَبُوهُ لَكَ إِلَّا جَدَلًا ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ خَصِمُونَ
और बोल उठे कि भला हमारे माबूद अच्छे हैं या वह (ईसा) उन लोगों ने जो ईसा की मिसाल तुमसे बयान की है तो सिर्फ झगड़ने को
59إِنْ هُوَ إِلَّا عَبْدٌ أَنْعَمْنَا عَلَيْهِ وَجَعَلْنَاهُ مَثَلًا لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ
बल्कि (हक़ तो यह है कि) ये लोग हैं झगड़ालू ईसा तो बस हमारे एक बन्दे थे जिन पर हमने एहसान किया (नबी बनाया और मौजिज़े दिये) और उनको हमने बनी इसराईल के लिए (अपनी कुदरत का) नमूना बनाया
60وَلَوْ نَشَاءُ لَجَعَلْنَا مِنكُم مَّلَائِكَةً فِي الْأَرْضِ يَخْلُفُونَ
और अगर हम चाहते तो तुम ही लोगों में से (किसी को) फ़रिश्ते बना देते जो तुम्हारी जगह ज़मीन में रहते
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
58आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 58

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Tuesday, August 18, 2026

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