अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَآلِهَتُنَا: हमारे पूज्य (जिन्हें हम पूजते हैं)
- خَيْرٌ: बेहतर
- أَمْ هُوَ: या वह (अर्थात ईसा अलैहिस्सलाम)
- مَا ضَرَبُوهُ لَكَ: उन्होंने यह उदाहरण आपके सामने नहीं रखा
- إِلَّا جَدَلًا: सिर्फ झगड़े और हठधर्मिता के लिए
- خَصِمُونَ: झगड़ालू, हठी, विवाद करने वाले
तफसीर (व्याख्या):
मक्का के मुशरिकीन ने जब यह देखा कि नबी करीम ﷺ ईसा अलैहिस्सलाम को अल्लाह का नेक बंदा और महान रसूल बताते हैं, तो उन्होंने एक बातिल (झूठा) और धोखेबाज़ सवाल उठाया। उन्होंने कहा: "क्या हमारे पूज्य (जिन्हें हम पूजते हैं) बेहतर हैं या ईसा?" उनका असली मकसद यह था कि अगर ईसा को अल्लाह का पसंदीदा बंदा माना जाए, और क़ुरआन में यह भी कहा गया है कि अल्लाह को छोड़कर जिन्हें पूजा जाता है वे जहन्नम का ईंधन होंगे, तो फिर ईसा भी तो पूजे जाते हैं (नासारा उन्हें पूजते हैं), तो क्या वह भी जहन्नम में जाएंगे? अगर हाँ, तो हमें भी कोई परवाह नहीं, हम अपने देवताओं के साथ जहन्नम में चले जाएंगे। इस तरह वे इस्लाम के खिलाफ एक भ्रामक दलील पेश करना चाहते थे।
अल्लाह तआला ने उनकी इस चाल का पर्दाफाश करते हुए फरमाया कि यह लोग यह उदाहरण सिर्फ झगड़े और हठधर्मिता के लिए लाए हैं, सच्चाई जानने के लिए नहीं। ये लोग स्वभाव से ही झगड़ालू और हठी हैं। इनका उद्देश्य कभी सत्य की खोज नहीं होता, बल्कि ये हर हाल में अपनी बात पर अड़े रहना चाहते हैं।
अगर ये सच में जानना चाहते तो उन्हें यह समझ लेना चाहिए था कि ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के नेक बंदे और रसूल थे, उन्होंने कभी खुद को पूजने का दावा नहीं किया। नासारा ने उन्हें पूजना शुरू कर दिया, यह उनकी अपनी गलती थी, ईसा अलैहिस्सलाम की नहीं। अल्लाह तआला ने उन्हें साफ कर दिया कि जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों को पूजते हैं, वे जहन्नम में जाएंगे, चाहे वे ईसा हों या कोई और। लेकिन ईसा अलैहिस्सलाम खुद तो अल्लाह के नेक बंदे थे, उन्होंने कभी पूजे जाने की इजाजत नहीं दी।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को कभी झगड़े और हठधर्मिता की नज़र से नहीं देखना चाहिए। इंसान को चाहिए कि वह खुले दिल से सत्य को स्वीकार करे। इस्लाम दुनिया को एक साफ और सच्चा रास्ता दिखाता है — सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करो, जो सारे जहान का मालिक है। ईसा अलैहिस्सलाम भी उसी अल्लाह के बंदे और रसूल थे। आइए हम झगड़े और हठधर्मिता को छोड़कर सच्चाई को अपनाएँ, क्योंकि सच्चाई ही कल (क़यामत के दिन) हमारे काम आएगी। अल्लाह तआला हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफीक दे। आमीन।
📜 आयत 56-60 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 58
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बोल उठे कि भला हमारे माबूद अच्छे हैं या…सूरा आयत 58/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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