अज़-ज़ुखरुफ · 82/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
سُبْحَانَ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبِّ الْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ ۝٨٢
Subhaana Rabbis samaawaati wal ardi Rabbil Arshi `ammaa yasifoon
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग जो कुछ बयान करते हैं सारे आसमान व ज़मीन का मालिक अर्श का मालिक (ख़ुदा) उससे पाक व पाक़ीज़ा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُبْحَانَ: पाकी बयान करना, हर कमी और दोष से पाक होना।
  • رَبِّ: पालनहार, मालिक।
  • الْعَرْشِ: विशाल सिंहासन, जो सबसे बड़ी मख़लूक़ (सृष्टि) है।
  • عَمَّا يَصِفُونَ: उन बातों से (पाक है) जो ये लोग (मुशरिकीन) बयान करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपनी पाक ज़ात को हर उस बात से मुबर्रा (पाक) और मुनज़्ज़ह (दोष-रहित) क़रार दिया है जो मुशरिकीन उसके बारे में कहते हैं। ये लोग अल्लाह के लिए औलाद, शरीक, साथी और बीवी होने का झूठा दावा करते थे, जो कि सरासर बुहतान और इफ़्तिरा है। अल्लाह तआला उन सब झूठी बातों से पाक है।

अल्लाह तआला आसमानों और ज़मीन का पालनहार है, और अज़ीम अर्श (विशाल सिंहासन) का मालिक है। उसने इन बड़ी-बड़ी मख़लूक़ात का ज़िक्र इसलिए किया कि ये सबसे अज़ीम और बड़ी सृष्टियाँ हैं, और जो इनका पालनहार और मालिक है, वह हर कमी, हर दोष और हर झूठी बात से पाक है। जब ये बड़ी मख़लूक़ात उसकी क़ुदरत के सामने बेबस हैं, तो उसके लिए औलाद या शरीक होना कैसे मुमकिन हो सकता है?

ये आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला की ज़ात हर ऐब से पाक है। हमें चाहिए कि हम उसकी तारीफ़ में वही बातें कहें जो उसने खुद बयान की हैं, और उसके बारे में किसी भी ऐसी बात से बचें जो उसकी शान के खिलाफ़ हो। ये आयत हमारे लिए एक नसीहत है कि हम अल्लाह की बुज़ुर्गी और कमाल को समझें, और उसके सिवा किसी को उसका हमसर या शरीक न बनाएं।

अल्लाह तआला अपनी रहमत से हमें तौहीद की समझ अता करे और हमें शिर्क और झूठी बातों से महफ़ूज़ रखे। आमीन।



📜 आयत 80-84 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

80أَمْ يَحْسَبُونَ أَنَّا لَا نَسْمَعُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَاهُم ۚ بَلَىٰ وَرُسُلُنَا لَدَيْهِمْ يَكْتُبُونَ
क्या ये लोग कुछ समझते हैं कि हम उनके भेद और उनकी सरग़ोशियों को नहीं सुनते हॉ (ज़रूर सुनते हैं) और हमारे फ़रिश्ते उनके पास हैं और उनकी सब बातें लिखते जाते हैं
81قُلْ إِن كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ख़ुदा की कोई औलाद होती तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत को तैयार हूँ
82سُبْحَانَ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبِّ الْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो कुछ बयान करते हैं सारे आसमान व ज़मीन का मालिक अर्श का मालिक (ख़ुदा) उससे पाक व पाक़ीज़ा है
83فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो तुम उन्हें छोड़ दो कि पड़े बक बक करते और खेलते रहते हैं यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है
84وَهُوَ الَّذِي فِي السَّمَاءِ إِلَٰهٌ وَفِي الْأَرْضِ إِلَٰهٌ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ
उनके सामने आ मौजूद हो और आसमान में भी (उसी की इबादत की जाती है और वही ज़मीन में भी माबूद है और वही वाकिफ़कार हिकमत वाला है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
82आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 82

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये लोग जो कुछ बयान करते हैं सारे आसमान व…

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Friday, October 2, 2026

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