अज़-ज़ुखरुफ · 83/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ ۝٨٣
Fazarhum yakhoodoo wa yal`aboo hattaa yulaaqoo Yawmahumul lazee yoo`adoon
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम उन्हें छोड़ दो कि पड़े बक बक करते और खेलते रहते हैं यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَذَرْهُمْ: उन्हें छोड़ दो।
  • يَخُوضُوا: (अपने बुत्परस्ती और झूठे विचारों में) डूबे रहें।
  • وَيَلْعَبُوا: और (दुनिया में) खेल-कूद में मशगूल रहें।
  • يُوعَدُونَ: जिस (अज़ाब) का उनसे वादा किया जा रहा है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! इन झूठे लोगों को छोड़ दीजिए जो अल्लाह पर झूठा आरोप लगाते हैं और उसकी आयतों का मज़ाक उड़ाते हैं। उन्हें उनकी हालत पर छोड़ दीजिए—वे अपने बुत्परस्ती और झूठे विचारों में डूबे रहें और दुनिया की खेल-कूद में मशगूल रहें। यह मत सोचिए कि वे बच जाएंगे या उनकी यह मस्ती हमेशा रहेगी। उनका अंजाम निकट है।

वे जिस दिन का वादा किया गया है उस दिन ज़रूर मिलेंगे—चाहे वह दुनिया में आने वाला अज़ाब हो, चाहे आख़िरत का दिन हो, या दोनों। यह वह दिन है जब उनके सारे झूठे खेल खत्म हो जाएंगे और वे अपने किए का सामना करेंगे। यह दिन उनके लिए बहुत कठिन होगा, जब उन्हें अपनी सारी ग़लतियों का हिसाब देना होगा।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी को तसल्ली दे रहे हैं कि आप उनकी बातों से दुखी न हों और उन्हें उनकी हालत पर छोड़ दें। यह एक चेतावनी भी है और एक रहमत भी—चेतावनी इसलिए कि ये लोग अपने अंजाम से बच नहीं सकते, और रहमत इसलिए कि अल्लाह उन्हें मौका दे रहा है कि वे अपनी ग़लतियों से तौबा कर लें।

हमें इस आयत से सबक लेना चाहिए कि दुनिया की यह ज़िंदगी एक खेल और मज़ाक है, जो जल्द ही खत्म हो जाएगी। असली ज़िंदगी आख़िरत की ज़िंदगी है, जो हमेशा रहेगी। इसलिए हमें उस दिन के लिए तैयारी करनी चाहिए, जब हम अपने रब के सामने खड़े होंगे और अपने हर अमल का हिसाब देंगे। यह दिन किसी से टलने वाला नहीं है, और जो लोग आज अल्लाह की नाफ़रमानी में मशगूल हैं, वे कल पछताएंगे, लेकिन तब पछताना किसी काम नहीं आएगा।

अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो दुनिया के खेल-कूद में मशगूल होकर आख़िरत को भूल जाते हैं। आमीन।



📜 आयत 81-85 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

81قُلْ إِن كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ख़ुदा की कोई औलाद होती तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत को तैयार हूँ
82سُبْحَانَ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبِّ الْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो कुछ बयान करते हैं सारे आसमान व ज़मीन का मालिक अर्श का मालिक (ख़ुदा) उससे पाक व पाक़ीज़ा है
83فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो तुम उन्हें छोड़ दो कि पड़े बक बक करते और खेलते रहते हैं यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है
84وَهُوَ الَّذِي فِي السَّمَاءِ إِلَٰهٌ وَفِي الْأَرْضِ إِلَٰهٌ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ
उनके सामने आ मौजूद हो और आसमान में भी (उसी की इबादत की जाती है और वही ज़मीन में भी माबूद है और वही वाकिफ़कार हिकमत वाला है
85وَتَبَارَكَ الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَعِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और वही बहुत बाबरकत है जिसके लिए सारे आसमान व ज़मीन और दोनों के दरमियान की हुक़ुमत है और क़यामत की ख़बर भी उसी को है और तुम लोग उसकी तरफ लौटाए जाओगे
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
83आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 83

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Friday, October 2, 2026

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