अद-दुखान · 12/59
अनुवाद उच्चारण — सूरा अद-दुखान
رَّبَّنَا اكْشِفْ عَنَّا الْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَ ۝١٢
Rabbanak shif `annal `azaaba innaa mu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
कुफ्फ़ार भी घबराकर कहेंगे कि परवरदिगार हमसे अज़ाब को दूर दफ़ा कर दे हम भी ईमान लाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَبَّنَا – हे हमारे पालनहार!
  • اكْشِفْ – हटा दे, दूर कर दे।
  • الْعَذَابَ – यातना, अज़ाब।
  • إِنَّا مُؤْمِنُونَ – हम निश्चय ही ईमान लाने वाले हैं।

तफ़सीर:

जब अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ के दुश्मनों पर अपना अज़ाब नाज़िल करता है, तो वे सख्त मुसीबत और बदहाली में घिर जाते हैं। आसमान से एक साफ़ और स्पष्ट धुआँ (दुख़ान) आता है जो सभी लोगों को अपनी लपेट में ले लेता है, और यह उनके लिए एक दर्दनाक यातना बन जाता है। उस वक़्त उनसे कहा जाता है: "यह एक दर्दनाक अज़ाब है।" जब यह मुसीबत उन पर बहुत ज़्यादा सख्त हो जाती है, तो वे अपने रब की तरफ़ रुजू करते हैं, गिड़गिड़ाते हैं और दुआ करते हैं: "ऐ हमारे रब! हम पर से यह अज़ाब हटा दे, हम तेरी तरफ़ लौट आए हैं और तुझ पर ईमान लाते हैं।" वे वादा करते हैं कि अगर अल्लाह उनसे यह यातना हटा देगा, तो वे उस पर और उसके रसूल पर ईमान लाएँगे और उसकी रिसालत को सच मानेंगे।

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान जब मुसीबत में घिरता है, तो उसे अपने रब की तरफ़ ही रुजू करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही कष्टों को दूर करने वाला है। लेकिन अफ़सोस की बात है कि बहुत से लोग मुसीबत आने पर ईमान का दावा करते हैं, मगर जैसे ही राहत मिलती है, वे फिर से अपनी पुरानी हालत पर लौट जाते हैं। अल्लाह तआला हमें सच्चे दिल से ईमान लाने और हर हाल में उसकी तरफ़ रुजू करने की तौफ़ीक़ दे। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है — जब बंदा सच्चे दिल से तौबा करता है और उससे दुआ करता है, तो अल्लाह उसकी दुआ सुनता है और उस पर रहम फ़रमाता है। हमें चाहिए कि हम अपने रब की तरफ़ हमेशा रुजू रखें, क्योंकि वही हर मुसीबत को दूर करने वाला और हर दुआ को क़बूल करने वाला है।



📜 आयत 10-14 — सूरा अद-दुखान

10فَارْتَقِبْ يَوْمَ تَأْتِي السَّمَاءُ بِدُخَانٍ مُّبِينٍ
तो तुम उस दिन का इन्तेज़ार करो कि आसमान से ज़ाहिर ब ज़ाहिर धुऑं निकलेगा
11يَغْشَى النَّاسَ ۖ هَٰذَا عَذَابٌ أَلِيمٌ
(और) लोगों को ढाँक लेगा ये दर्दनाक अज़ाब है
12رَّبَّنَا اكْشِفْ عَنَّا الْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَ
कुफ्फ़ार भी घबराकर कहेंगे कि परवरदिगार हमसे अज़ाब को दूर दफ़ा कर दे हम भी ईमान लाते हैं
13أَنَّىٰ لَهُمُ الذِّكْرَىٰ وَقَدْ جَاءَهُمْ رَسُولٌ مُّبِينٌ
(उस वक्त) भला क्या उनको नसीहत होगी जब उनके पास पैग़म्बर आ चुके जो साफ़ साफ़ बयान कर देते थे
14ثُمَّ تَوَلَّوْا عَنْهُ وَقَالُوا مُعَلَّمٌ مَّجْنُونٌ
इस पर भी उन लोगों ने उससे मुँह फेरा और कहने लगे ये तो (सिखाया) पढ़ाया हुआ दीवाना है
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अद-दुखान 12

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Friday, October 2, 2026

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