अद-दुखान · 15/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
إِنَّا كَاشِفُو الْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَائِدُونَ ۝١٥
Innaa kaashiful `azaabi qaleelaa; innakum `aaa`indoon
📖 हिंदी अर्थ
(अच्छा ख़ैर) हम थोड़े दिन के लिए अज़ाब को टाल देते हैं मगर हम जानते हैं तुम ज़रूर फिर कुफ्र करोगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَاشِفُو الْعَذَابِ: अज़ाब (यातना) को दूर करने वाले।
  • قَلِيلًا: थोड़े समय के लिए।
  • عَائِدُونَ: लौटने वाले (अपनी पिछली हालत की ओर)।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम उन काफ़िरों से अज़ाब को थोड़ी देर के लिए हटा लेंगे, लेकिन यह राहत उनके लिए सबक़ और हिदायत का ज़रिया नहीं बनेगी। जब अज़ाब हट जाएगा, तो वे फिर से अपनी पुरानी हालत की ओर लौट जाएंगे—कुफ़्र, गुमराही और झुठलाने की राह पर। यह उनकी आदत है कि जब मुसीबत आती है तो वे अल्लाह को याद करते हैं, मगर जैसे ही राहत मिलती है, उसे भूल जाते हैं और अपनी सरकशी में मशगूल हो जाते हैं। यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने नबी (ﷺ) के दौर में अज़ाब की दुआ मांगी थी, फिर जब अज़ाब आया तो उन्होंने फ़रियाद की, लेकिन जब वह टला, तो वे फिर से कुफ़्र पर डट गए।

नसीहत और दावत का पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और मोहलत का ग़लत फ़ायदा न उठाएं। जब अल्लाह हमें मुसीबत से निजात देता है, तो हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को सुधारना चाहिए, न कि फिर से गुनाहों की तरफ लौट जाना चाहिए। यह एक चेतावनी है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है—वह जब चाहता है पकड़ता है, और कोई उसे रोक नहीं सकता। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह हर हाल में अल्लाह की इताअत करे, और जब कोई मुसीबत आए तो तौबा और इस्तिग़फ़ार का रास्ता अपनाए, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत पसंद करता है और उन्हें माफ़ कर देता है। याद रखें, दुनिया की यह ज़िंदगी इम्तिहान की जगह है—जो यहाँ सब्र और शुक्र करेगा, वह आख़िरत में कामयाब होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 13-17 — अद-दुखान

13أَنَّىٰ لَهُمُ الذِّكْرَىٰ وَقَدْ جَاءَهُمْ رَسُولٌ مُّبِينٌ
(उस वक्त) भला क्या उनको नसीहत होगी जब उनके पास पैग़म्बर आ चुके जो साफ़ साफ़ बयान कर देते थे
14ثُمَّ تَوَلَّوْا عَنْهُ وَقَالُوا مُعَلَّمٌ مَّجْنُونٌ
इस पर भी उन लोगों ने उससे मुँह फेरा और कहने लगे ये तो (सिखाया) पढ़ाया हुआ दीवाना है
15إِنَّا كَاشِفُو الْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَائِدُونَ
(अच्छा ख़ैर) हम थोड़े दिन के लिए अज़ाब को टाल देते हैं मगर हम जानते हैं तुम ज़रूर फिर कुफ्र करोगे
16يَوْمَ نَبْطِشُ الْبَطْشَةَ الْكُبْرَىٰ إِنَّا مُنتَقِمُونَ
हम बेशक (उनसे) पूरा बदला तो बस उस दिन लेगें जिस दिन सख्त पकड़ पकड़ेंगे
17۞ وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَاءَهُمْ رَسُولٌ كَرِيمٌ
और उनसे पहले हमने क़ौमे फिरऔन की आज़माइश की और उनके पास एक आली क़दर पैग़म्बर (मूसा) आए
अद-दुखानकुरान सूची
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15आयत

अनुवाद — अद-दुखान 15

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Tuesday, August 18, 2026

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