अद-दुखान · 16/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
يَوْمَ نَبْطِشُ الْبَطْشَةَ الْكُبْرَىٰ إِنَّا مُنتَقِمُونَ ۝١٦
Yawma nabtishul batsha tal kubraa innaa muntaqimoon
📖 हिंदी अर्थ
हम बेशक (उनसे) पूरा बदला तो बस उस दिन लेगें जिस दिन सख्त पकड़ पकड़ेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नब्तिशु (नब्तिशु): हम पकड़ेंगे, हम अपनी पकड़ डालेंगे।
  • अल-बत्शत अल-कुबरा (अल-बत्शत अल-कुबरा): सबसे बड़ी पकड़, सबसे भयंकर पकड़।
  • मुन्तक़िमून (मुन्तक़िमून): बदला लेने वाले, प्रतिशोध करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस दिन की याद दिलाती है जब अल्लाह तआला अपनी सबसे बड़ी पकड़ से काफ़िरों को पकड़ेगा। इसका स्पष्ट संकेत उस दिन की ओर है जब अल्लाह ने क़ुरैश के काफ़िरों को बद्र के मैदान में अपनी भयंकर पकड़ से पकड़ा था। यह उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो अल्लाह के रसूल ﷺ को झुठलाते हैं और उनके संदेश को अस्वीकार करते हैं। अल्लाह ने फ़रमाया: "जिस दिन हम सबसे बड़ी पकड़ से पकड़ेंगे, हम निश्चित रूप से बदला लेने वाले हैं।"

यह आयत उन लोगों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं, और साथ ही मोमिनों के लिए एक तसल्ली है कि अल्लाह अपने दुश्मनों से बदला लेने वाला है। बद्र का दिन उस बड़ी पकड़ का प्रतीक था, और क़ियामत का दिन उससे भी बड़ी पकड़ का दिन होगा। अल्लाह ने इतिहास में कई बार अपनी पकड़ दिखाई है, और हर बार उसने अपने नबियों की मदद की और झुठलाने वालों को अपनी पकड़ में लिया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत कड़ी है, और वह अपने बंदों के साथ इंसाफ़ करता है। जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और उसके रसूल को झुठलाते हैं, उन्हें अल्लाह की पकड़ से बचने का कोई रास्ता नहीं। लेकिन जो लोग तौबा कर लें और अल्लाह की ओर लौट आएं, अल्लाह उन्हें माफ़ कर देता है और उन पर रहमत फरमाता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अल्लाह के दीन पर साबित क़दम रहना चाहिए, चाहे हालात कैसे भी हों। अल्लाह अपने मोमिन बंदों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है। यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत और उसके इंसाफ़ की याद दिलाती है, और हमें उसकी रहमत की तरफ़ बुलाती है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, और वह चाहता है कि हम उसकी इबादत करें और उसके रास्ते पर चलें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 14-18 — अद-दुखान

14ثُمَّ تَوَلَّوْا عَنْهُ وَقَالُوا مُعَلَّمٌ مَّجْنُونٌ
इस पर भी उन लोगों ने उससे मुँह फेरा और कहने लगे ये तो (सिखाया) पढ़ाया हुआ दीवाना है
15إِنَّا كَاشِفُو الْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَائِدُونَ
(अच्छा ख़ैर) हम थोड़े दिन के लिए अज़ाब को टाल देते हैं मगर हम जानते हैं तुम ज़रूर फिर कुफ्र करोगे
16يَوْمَ نَبْطِشُ الْبَطْشَةَ الْكُبْرَىٰ إِنَّا مُنتَقِمُونَ
हम बेशक (उनसे) पूरा बदला तो बस उस दिन लेगें जिस दिन सख्त पकड़ पकड़ेंगे
17۞ وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَاءَهُمْ رَسُولٌ كَرِيمٌ
और उनसे पहले हमने क़ौमे फिरऔन की आज़माइश की और उनके पास एक आली क़दर पैग़म्बर (मूसा) आए
18أَنْ أَدُّوا إِلَيَّ عِبَادَ اللَّهِ ۖ إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
(और कहा) कि ख़ुदा के बन्दों (बनी इसराईल) को मेरे हवाले कर दो मैं (ख़ुदा की तरफ से) तुम्हारा एक अमानतदार पैग़म्बर हूँ
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
16आयत

अनुवाद — अद-दुखान 16

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Tuesday, August 18, 2026

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