अद-दुखान · 14/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
ثُمَّ تَوَلَّوْا عَنْهُ وَقَالُوا مُعَلَّمٌ مَّجْنُونٌ ۝١٤
Summaa tawallaw `anhu wa qaaloo mu`allamum majnoon
📖 हिंदी अर्थ
इस पर भी उन लोगों ने उससे मुँह फेरा और कहने लगे ये तो (सिखाया) पढ़ाया हुआ दीवाना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَوَلَّوْا – मुँह फेर लिया, विमुख हो गए
  • مُعَلَّمٌ – जिसे कोई दूसरा (इंसान या जिन्न) सिखाता हो
  • مَجْنُونٌ – पागल, दीवाना

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जिनके पास अल्लाह का स्पष्ट और सच्चा रसूल आया, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब उनके पास रसूल साफ़ और खुली हुई शिक्षा लेकर आए, तो उन्होंने उस पर ईमान लाने के बजाय उससे मुँह मोड़ लिया। यही नहीं, बल्कि उन्होंने रसूल के बारे में ऐसी बातें कहीं जो सच्चाई से कोसों दूर थीं।

कुछ लोगों ने कहा कि यह एक "सिखाया-पढ़ाया" इंसान है, जिसे किसी दूसरे ने ये बातें सिखा दी हैं, और यह अल्लाह की तरफ से कोई पैग़ाम नहीं लाया। वहीं कुछ दूसरे लोगों ने कहा कि यह "पागल" है, जो बिना समझे बोल रहा है। इस तरह उन्होंने रसूल की दावत को बदनाम करने की कोशिश की, ताकि लोग उनकी बात न सुनें।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि ये दोनों आरोप एक-दूसरे के खिलाफ़ हैं। अगर वह पागल होता, तो उसे कोई सिखा नहीं सकता था, और अगर उसे कोई सिखा रहा था, तो वह पागल नहीं हो सकता। यह उनकी सोच की गहरी गड़बड़ी और सच्चाई से भागने की कोशिश थी। वे किसी भी बहाने से सच्चाई को नकारना चाहते थे।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब इंसान के पास सच्चाई आती है, तो उसे खुली आँखों से देखना चाहिए और अहंकार या पूर्वाग्रह के कारण उसे ठुकराना नहीं चाहिए। रसूलों के साथ हमेशा यही हुआ कि उनके दुश्मनों ने उन्हें बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन अल्लाह अपने रसूलों की मदद करता है और सच्चाई को ऊपर उठाता है।

आज भी जब कोई इंसान सच्चाई की तरफ बुलाता है, तो कुछ लोग उसे बदनाम करने की कोशिश करते हैं। हमें चाहिए कि हम सच्चाई को पहचानें और उस पर अमल करें, चाहे लोग कुछ भी कहें। अल्लाह तआला हमें सच्चाई को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 12-16 — अद-दुखान

12رَّبَّنَا اكْشِفْ عَنَّا الْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَ
कुफ्फ़ार भी घबराकर कहेंगे कि परवरदिगार हमसे अज़ाब को दूर दफ़ा कर दे हम भी ईमान लाते हैं
13أَنَّىٰ لَهُمُ الذِّكْرَىٰ وَقَدْ جَاءَهُمْ رَسُولٌ مُّبِينٌ
(उस वक्त) भला क्या उनको नसीहत होगी जब उनके पास पैग़म्बर आ चुके जो साफ़ साफ़ बयान कर देते थे
14ثُمَّ تَوَلَّوْا عَنْهُ وَقَالُوا مُعَلَّمٌ مَّجْنُونٌ
इस पर भी उन लोगों ने उससे मुँह फेरा और कहने लगे ये तो (सिखाया) पढ़ाया हुआ दीवाना है
15إِنَّا كَاشِفُو الْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَائِدُونَ
(अच्छा ख़ैर) हम थोड़े दिन के लिए अज़ाब को टाल देते हैं मगर हम जानते हैं तुम ज़रूर फिर कुफ्र करोगे
16يَوْمَ نَبْطِشُ الْبَطْشَةَ الْكُبْرَىٰ إِنَّا مُنتَقِمُونَ
हम बेशक (उनसे) पूरा बदला तो बस उस दिन लेगें जिस दिन सख्त पकड़ पकड़ेंगे
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अनुवाद — अद-दुखान 14

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Tuesday, August 18, 2026

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