अद-दुखान · 29/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنظَرِينَ ۝٢٩
Famaa bakat `alaihimus samaaa`u wal ardu wa maa kaanoo munzareen
📖 हिंदी अर्थ
तो उन लोगों पर आसमान व ज़मीन को भी रोना न आया और न उन्हें मोहलत ही दी गयी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ: आसमान और ज़मीन का उन पर रोना (अर्थात् उनके लिए शोक मनाना)।
  • مُنظَرِينَ: देर दी गई, मोहलत दी गई, पीछे टाला गया।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर अल्लाह का अज़ाब आया और वे समुद्र में डूबकर हलाक हुए, तो न आसमान ने उन पर आँसू बहाए और न ज़मीन ने उनके लिए शोक मनाया। यह उनकी बेक़द्री और अल्लाह की नाराज़गी की सबसे बड़ी निशानी है। जब कोई नेक और ईमानवाला बंदा मरता है, तो आसमान और ज़मीन उस पर रोते हैं, क्योंकि उसकी इबादतों और नेकियों की बरकत से ये कायनात भी फ़ायदा उठाती थी। लेकिन फ़िरऔन और उसके साथियों के लिए यह सब कुछ ख़त्म हो गया — उनकी मौत पर न तो आसमान रोया और न ज़मीन।

इसके अलावा, उन्हें कोई मोहलत नहीं दी गई, कोई देर नहीं हुई। जब अल्लाह का फ़ैसला आया, तो वह तुरंत लागू हुआ। उन्हें तौबा करने का मौक़ा नहीं मिला, न कोई और मौका दिया गया। यह उनके कुफ्र और ज़ुल्म का नतीजा था कि अल्लाह ने उन्हें बिल्कुल भी राहत न दी।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारी ज़िंदगी का मक़सद क्या है? क्या हम ऐसी ज़िंदगी जीना चाहते हैं जिस पर आसमान और ज़मीन भी रोएँ? या फिर हमारा अंजाम फ़िरऔन जैसा हो? अल्लाह ने हमें मोहलत दी है, हमें तौबा करने का मौक़ा दिया है। यह अल्लाह की रहमत है कि हम अभी ज़िंदा हैं और अपने गुनाहों से बाज़ आ सकते हैं। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को ईमान और नेकियों से सजाएँ, ताकि हमारी मौत पर आसमान और ज़मीन रोएँ और हमें अल्लाह की रहमत मिले। याद रखें, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उससे भी बड़ी है। जो लोग उसकी ओर लौट आते हैं, उनके लिए खुशखबरी है।



📜 आयत 27-31 — अद-दुखान

27وَنَعْمَةٍ كَانُوا فِيهَا فَاكِهِينَ
जिनमें वह ऐश और चैन किया करते थे छोड़ गये यूँ ही हुआ
28كَذَٰلِكَ ۖ وَأَوْرَثْنَاهَا قَوْمًا آخَرِينَ
और उन तमाम चीज़ों का दूसरे लोगों को मालिक बना दिया
29فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنظَرِينَ
तो उन लोगों पर आसमान व ज़मीन को भी रोना न आया और न उन्हें मोहलत ही दी गयी
30وَلَقَدْ نَجَّيْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ مِنَ الْعَذَابِ الْمُهِينِ
और हमने बनी इसराईल को ज़िल्लत के अज़ाब से फिरऔन (के पन्जे) से नजात दी
31مِن فِرْعَوْنَ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَالِيًا مِّنَ الْمُسْرِفِينَ
वह बेशक सरकश और हद से बाहर निकल गया था
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अनुवाद — अद-दुखान 29

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Tuesday, August 18, 2026

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