अद-दुखान · 28/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
كَذَٰلِكَ ۖ وَأَوْرَثْنَاهَا قَوْمًا آخَرِينَ ۝٢٨
Kazaalika wa awrasnaahaa qawman aakhareen
📖 हिंदी अर्थ
और उन तमाम चीज़ों का दूसरे लोगों को मालिक बना दिया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَذَٰلِكَ – ऐसे ही (यानी इसी प्रकार की सज़ा हम उन्हें देते हैं जो हमारी नेमतों का इनकार करें)।
  • وَأَوْرَثْنَاهَا – और हमने उसे उत्तराधिकार में दे दिया (यानी उनकी दौलत, बाग़, चश्मे, खेती और महल)।
  • قَوْمًا آخَرِينَ – दूसरे लोगों को (यानी बनी इसराईल को, जिन्होंने फ़िरऔन और उसकी क़ौम की जगह ली)।

तफ़सीर:

यानी जिस तरह हमने फ़िरऔन और उसकी क़ौम को उनके कुफ़्र और सरकशी की वजह से पकड़ा और उन्हें डुबोकर हलाक कर दिया, उसी तरह हम उन सबको सज़ा देते हैं जो हमारी नेमतों का इनकार करते हैं और हमारे हुक्मों की नाफ़रमानी करते हैं। फिर अल्लाह तआला ने फ़िरऔनियों के उन तमाम नेमतों — बाग़ात, चश्मे, खेती, खज़ाने और आलीशान महलों — को उनसे छीनकर दूसरी क़ौम को दे दिया, और वह क़ौम बनी इसराईल थी, जिन्हें अल्लाह ने फ़िरऔन के ज़ुल्म से नजात दी और उनकी मिरास का मालिक बना दिया।

यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जब कोई क़ौम अल्लाह की नेमतों की क़द्र नहीं करती और उन्हें कुफ़्र में बदल देती है, तो अल्लाह उन नेमतों को उनसे छीनकर दूसरे लोगों को दे देता है, जो शुक्र करने वाले और अल्लाह के फ़रमाँबरदार हों। यह एक बड़ी इबरत (सबक) है कि दौलत, ताक़त और आराम की ज़िंदगी किसी के लिए हमेशा नहीं रहती — यह सब अल्लाह की अमानत है और जब वह चाहता है, किसी से छीनकर किसी और को दे देता है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करें, उन्हें अपनी ताक़त और ग़ुरूर का ज़रिया न बनाएँ, और याद रखें कि नेमतें अल्लाह की तरफ़ से इम्तिहान हैं। जो शुक्र करता है, अल्लाह उसे और देता है, और जो कुफ़्र करता है, अल्लाह की सज़ा बहुत सख्त है। यह क़ुरआन का पैग़ाम है कि अल्लाह के दीन की मदद करने वालों को अल्लाह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है, और ज़ालिमों की जड़ें उखाड़ देता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — अद-दुखान

26وَزُرُوعٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ
और नफीस मकानात और आराम की चीज़ें
27وَنَعْمَةٍ كَانُوا فِيهَا فَاكِهِينَ
जिनमें वह ऐश और चैन किया करते थे छोड़ गये यूँ ही हुआ
28كَذَٰلِكَ ۖ وَأَوْرَثْنَاهَا قَوْمًا آخَرِينَ
और उन तमाम चीज़ों का दूसरे लोगों को मालिक बना दिया
29فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنظَرِينَ
तो उन लोगों पर आसमान व ज़मीन को भी रोना न आया और न उन्हें मोहलत ही दी गयी
30وَلَقَدْ نَجَّيْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ مِنَ الْعَذَابِ الْمُهِينِ
और हमने बनी इसराईल को ज़िल्लत के अज़ाब से फिरऔन (के पन्जे) से नजात दी
अद-दुखानकुरान सूची
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मक्कीRevelation
28आयत

अनुवाद — अद-दुखान 28

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Tuesday, August 18, 2026

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