अद-दुखान · 36/59
अनुवाद उच्चारण — सूरा अद-दुखान
فَأْتُوا بِآبَائِنَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٣٦
Faatoo bi aabaaa`inaaa inkuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
तो अगर तुम सच्चे हो तो हमारे बाप दादाओं को (ज़िन्दा करके) ले आओ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأْتُوا – लाओ, प्रस्तुत करो
  • بِآبَائِنَا – हमारे बाप-दादाओं को
  • إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ – यदि तुम सच्चे हो

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों की उस बात का उत्तर है जो वे मज़ाक़ और अंदाज़े-तकब्बुर (घमंड) में कहा करते थे। जब नबी करीम ﷺ उन्हें मौत के बाद दोबारा जी उठने (हश्र-ओ-नश्र) की ख़बर देते थे, तो वे हैरान होकर कहते थे: "हमारे बाप-दादा जो मर चुके हैं, क्या वे सचमुच दोबारा ज़िंदा होंगे?" और फिर चुनौती देते हुए कहते: "अगर तुम सच्चे हो, तो हमारे मुर्दा बाप-दादाओं को ले आओ, उन्हें ज़िंदा करके दिखाओ!"

यह चुनौती उनके अंदर के इनकार और हक़ से मुँह मोड़ने की सख़्त हालत को दिखाती है। वे यह भूल गए थे कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे हर चीज़ मुमकिन है। जिस अल्लाह ने पहली बार पैदा किया, वही दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। क़ुरआन में कई जगह अल्लाह तआला ने इसी तरह की चुनौतियों का जवाब दिया है कि यह मुश्किल नहीं, बल्कि उसके लिए बेहद आसान है।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि इंसान अपनी अक़्ल और समझ को ही सब कुछ न समझ ले। अल्लाह की क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है। मौत के बाद ज़िंदगी का आना, क़ब्रों से उठना, हिसाब-किताब होना – यह सब अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता। जो लोग इसे मज़ाक़ समझते हैं, वही अंत में पछताएँगे।

यह भी याद रखें कि नबी ﷺ का काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचाना था, न कि उनकी माँगों पर मुर्दों को ज़िंदा करना। अल्लाह ने चाहा तो मुर्दे ज़िंदा होंगे, लेकिन उसके अपने वादे के मुताबिक़, किसी की ज़िद पर नहीं। हमारा ईमान है कि क़यामत का दिन ज़रूर आएगा, और हर इंसान अपने किए का बदला पाएगा। यही ईमान हमें अच्छे कामों की तरफ़ ले जाता है और बुराइयों से रोकता है।



📜 आयत 34-38 — सूरा अद-दुखान

34إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَيَقُولُونَ
ये (कुफ्फ़ारे मक्का) (मुसलमानों से) कहते हैं
35إِنْ هِيَ إِلَّا مَوْتَتُنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُنشَرِينَ
कि हमें तो सिर्फ एक बार मरना है और फिर हम दोबारा (ज़िन्दा करके) उठाए न जाएँगे
36فَأْتُوا بِآبَائِنَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
तो अगर तुम सच्चे हो तो हमारे बाप दादाओं को (ज़िन्दा करके) ले आओ
37أَهُمْ خَيْرٌ أَمْ قَوْمُ تُبَّعٍ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ أَهْلَكْنَاهُمْ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا مُجْرِمِينَ
भला ये लोग (क़ूवत में) अच्छे हैं या तुब्बा की क़ौम और वह लोग जो उनसे पहले हो चुके हमने उन सबको हलाक कर दिया (क्योंकि) वह ज़रूर गुनाहगार थे
38وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَاعِبِينَ
और हमने सारे आसमान व ज़मीन और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान में हैं उनको खेलते हुए नहीं बनाया
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीअवतरण स्थान
36आयत

अनुवाद — अद-दुखान 36

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Friday, October 2, 2026

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