अल-अहकाफ · 18/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِرِينَ ۝١٨
Ulaaa`ikal lazeena haqqa `alaihimul qawlu feee umamin qad khalat min qablihim minal jinni wal insi innahum kaanoo khaasireen
📖 हिंदी अर्थ
ये वही लोग हैं कि जिन्नात और आदमियों की (दूसरी) उम्मतें जो उनसे पहले गुज़र चुकी हैं उन ही के शुमूल में उन पर भी अज़ाब का वायदा मुस्तहक़ हो चुका है ये लोग बेशक घाटा उठाने वाले थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ: उन पर अज़ाब का फ़ैसला सिद्ध हो गया, यानी अल्लाह की ओर से उनके लिए दंड की बात पक्की हो गई।
  • خَلَتْ: गुज़र चुकी हैं, बीत चुकी हैं।
  • خَاسِرِينَ: घाटे में रहने वाले, नुक़सान उठाने वाले।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने हक़ (सत्य) को सुनने के बाद भी उसे ठुकरा दिया और अपनी सरकशी और अहंकार पर अड़े रहे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यही वे लोग हैं जिन पर अज़ाब का फ़ैसला सिद्ध हो चुका है। यह फ़ैसला अकेले उन्हीं पर नहीं, बल्कि उन सब उम्मतों के साथ है जो उनसे पहले जिन्नों और इंसानों में से कुफ़्र और झुठलाने की राह पर चलीं और गुज़र चुकी हैं। यानी ये लोग उसी बुरी राह पर चल रहे हैं जिस पर पहले के काफ़िर चले थे, इसलिए उनका अंजाम भी वही होगा जो पहले वालों का हुआ।

अल्लाह ने उन्हें साफ़-साफ़ बता दिया कि वे घाटे में रहने वाले हैं। उन्होंने हिदायत के बदले गुमराही ख़रीदी, जन्नत की नेमतों के बदले जहन्नुम का अज़ाब पसंद किया। उन्होंने अपने आपको और अपने घर वालों को बड़े नुक़सान में डाला, क्योंकि उनका अंजाम जहन्नुम की आग है। यह सबसे बड़ा घाटा है — ऐसा घाटा जिसके बाद कोई मुआवज़ा नहीं, कोई राहत नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने हमें अक्ल दी, कान दिए, दिल दिया और अपने रसूल भेजे ताकि हम सही राह पहचानें। जो लोग इन नेमतों से फ़ायदा नहीं उठाते, वह अपना ही नुक़सान करते हैं। अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि इंसान ख़ुद अपने कर्मों से अपना अंजाम तय करता है।

आज भी हर इंसान के सामने यही दो रास्ते हैं: एक रास्ता अल्लाह की इताअत और रसूल की पैरवी का, जो जन्नत तक पहुँचाता है; और दूसरा रास्ता सरकशी और इनकार का, जो जहन्नम तक ले जाता है। अल्लाह ने कुरआन में बार-बार आगाह किया है ताकि कोई यह न कह सके कि उसे बताया नहीं गया। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को देखें, अपने अमल को सुधारें, और अल्लाह की रहमत की तरफ लौटें। अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है और अपनी रहमत से उन्हें माफ़ कर देता है। यही कामयाबी की राह है — वरना अंजाम वही होगा जो इन ख़ासिरीन (घाटे वालों) का हुआ।



📜 आयत 16-20 — अल-अहकाफ

16أُولَٰئِكَ الَّذِينَ نَتَقَبَّلُ عَنْهُمْ أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا وَنَتَجَاوَزُ عَن سَيِّئَاتِهِمْ فِي أَصْحَابِ الْجَنَّةِ ۖ وَعْدَ الصِّدْقِ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ
यही वह लोग हैं जिनके नेक अमल हम क़ुबूल फरमाएँगे और बेहिश्त (के जाने) वालों में उनके गुनाहों से दरग़ुज़र करेंगे (ये वह) सच्चा वायदा है जो उन से किया जाता था
17وَالَّذِي قَالَ لِوَالِدَيْهِ أُفٍّ لَّكُمَا أَتَعِدَانِنِي أَنْ أُخْرَجَ وَقَدْ خَلَتِ الْقُرُونُ مِن قَبْلِي وَهُمَا يَسْتَغِيثَانِ اللَّهَ وَيْلَكَ آمِنْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ فَيَقُولُ مَا هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
और जिसने अपने माँ बाप से कहा कि तुम्हारा बुरा हो, क्या तुम मुझे धमकी देते हो कि मैं दोबारा (कब्र से) निकाला जाऊँगा हालॉकि बहुत से लोग मुझसे पहले गुज़र चुके (और कोई ज़िन्दा न हुआ) और दोनों फ़रियाद कर रहे थे कि तुझ पर वाए हो ईमान ले आ ख़ुदा का वायदा ज़रूर सच्चा है तो वह बोल उठा कि ये तो बस अगले लोगों के अफ़साने हैं
18أُولَٰئِكَ الَّذِينَ حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِرِينَ
ये वही लोग हैं कि जिन्नात और आदमियों की (दूसरी) उम्मतें जो उनसे पहले गुज़र चुकी हैं उन ही के शुमूल में उन पर भी अज़ाब का वायदा मुस्तहक़ हो चुका है ये लोग बेशक घाटा उठाने वाले थे
19وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِّمَّا عَمِلُوا ۖ وَلِيُوَفِّيَهُمْ أَعْمَالَهُمْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और लोगों ने जैसे काम किये होंगे उसी के मुताबिक सबके दर्जे होंगे और ये इसलिए कि ख़ुदा उनके आमाल का उनको पूरा पूरा बदला दे और उन पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएं
20وَيَوْمَ يُعْرَضُ الَّذِينَ كَفَرُوا عَلَى النَّارِ أَذْهَبْتُمْ طَيِّبَاتِكُمْ فِي حَيَاتِكُمُ الدُّنْيَا وَاسْتَمْتَعْتُم بِهَا فَالْيَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ الْهُونِ بِمَا كُنتُمْ تَسْتَكْبِرُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَبِمَا كُنتُمْ تَفْسُقُونَ
और जिस दिन कुफ्फार जहन्नुम के सामने लाएँ जाएँगे (तो उनसे कहा जाएगा कि) तुमने अपनी दुनिया की ज़िन्दगी में अपने मज़े उड़ा चुके और उसमें ख़ूब चैन कर चुके तो आज तुम पर ज़िल्लत का अज़ाब किया जाएगा इसलिए कि तुम अपनी ज़मीन में अकड़ा करते थे और इसलिए कि तुम बदकारियां करते थे
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अनुवाद — अल-अहकाफ 18

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सूरा आयत 18/35 — अल-अहकाफ الأحقاف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहकाफ सुनें, अल-अहकाफ अनुवाद, अल-अहकाफ mp3, अल-अहकाफ pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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