Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَكَّنَّاهُمْ: हमने उन्हें (आद की क़ौम को) शक्ति और सामर्थ्य दिया।
- إِن مَّكَّنَّاكُمْ: जिसमें हमने तुम्हें (क़ुरैश को) शक्ति नहीं दी।
- أَفْئِدَةً: दिल (समझने की शक्ति)।
- يَجْحَدُونَ: इनकार करते थे।
- حَاقَ: उतर आया, घेर लिया।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में क़ुरैश के काफ़िरों को नसीहत और डरावा दे रहे हैं कि उनसे पहले आद की क़ौम गुज़री है। अल्लाह ने उन्हें दुनिया में इतनी ताक़त, लंबी उम्र, मज़बूत जिस्म, खूबसूरत शक्ल, और ढेर सारा माल-दौलत दी थी—इतना कुछ जो तुम्हें (ऐ क़ुरैश!) नहीं दिया गया। उन्हें कान दिए सुनने के लिए, आँखें देखने के लिए, और दिल समझने के लिए। लेकिन जब उन्होंने इन नेअमतों को अल्लाह की नाफ़रमानी में इस्तेमाल किया, और अल्लाह की आयतों को झुठलाया, तो ये कान, ये आँखें, और ये दिल उनके किसी काम न आए। जब अज़ाब आया तो इनमें से किसी ने भी उन्हें नहीं बचाया। वही अज़ाब उन पर उतर आया जिसका वे मज़ाक़ उड़ाया करते थे—यानी वो अज़ाब जिसकी उन्हें चेतावनी दी गई थी और वे उसे हँसी-मज़ाक़ समझते थे।
यह आयत क़ुरैश के काफ़िरों के लिए एक सख़्त चेतावनी है। अल्लाह फ़रमा रहे हैं: जब आद की क़ौम, जो तुमसे कहीं ज़्यादा ताक़तवर थी, उनकी ताक़त और सामर्थ्य उनके काम न आई, तो तुम कैसे समझते हो कि तुम्हारी कमज़ोर हालत तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा लेगी? यह एक ऐतिबार (सबक) है कि अल्लाह की पकड़ से कोई नहीं बच सकता।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की दी हुई नेअमतें—चाहे वो माल हो, औलाद हो, ताक़त हो, या इल्म हो—अगर इन्हें अल्लाह की राह में इस्तेमाल न किया जाए, तो ये सिर्फ़ हमारे लिए हुज्जत (सबूत) बन जाती हैं। जिस दिन अज़ाब आएगा, ये नेअमतें हमें छुड़ा नहीं सकतीं। इसलिए हमें चाहिए कि अल्लाह की हर नेअमत का शुक्र अदा करें, उसकी आयतों पर ईमान लाएँ, और उनका मज़ाक़ उड़ाने से बचें। अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत उन्हीं के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करें और उसके दीन को अपनाएँ। याद रखें, अल्लाह की पकड़ बहुत सख़्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत वसीअ है—बस ज़रूरत है सच्चे दिल से तौबा करने की।
📜 आयत 24-28 — सूरा अल-अहकाफ
अनुवाद — अल-अहकाफ 26
सूरा अल-अहकाफ आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उनको ऐसे कामों में मक़दूर दिये थे जिनमें…सूरा आयत 26/35 — सूरा अल-अहकाफ الأحقاف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अहकाफ सुनें, सूरा अल-अहकाफ अनुवाद, सूरा अल-अहकाफ mp3, सूरा अल-अहकाफ pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अहकाफ
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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