अल-अहकाफ · 7/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ قَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ هَٰذَا سِحْرٌ مُّبِينٌ ۝٧
Wa izaa tutlaa `alaihim Aayaatunaa baiyinaatin qaalal lazeena kafaroo lilhaqqi lammaa jaaa`ahum haazaa sihrum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और जब हमारी खुली खुली आयतें उनके सामने पढ़ी जाती हैं तो जो लोग काफिर हैं हक़ के बारे में जब उनके पास आ चुका तो कहते हैं ये तो सरीही जादू है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُتْلَىٰ – पढ़ी जाए, सुनाई जाए
  • بَيِّنَاتٍ – स्पष्ट और खुली हुई (आयतें)
  • لِلْحَقِّ – सत्य (कुरआन) के लिए
  • لَمَّا جَاءَهُمْ – जब वह उनके पास आया
  • سِحْرٌ مُّبِينٌ – खुला जादू, स्पष्ट जादू

तफसीर (व्याख्या):

जब इन मुशरिकों (बहुदेववादियों) के सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, जो बिल्कुल स्पष्ट, रोशन और सच्चाई पर आधारित होती हैं, तो वे उन पर विचार नहीं करते, न ही उनसे सीख लेते हैं। बल्कि जब सत्य (कुरआन) उनके पास आता है, तो वे उसे ठुकराते हुए कहते हैं: "यह तो सिर्फ खुला जादू है!"

यह उनकी ज़िद और हठधर्मिता की सबसे बड़ी मिसाल है। उनके पास जो सबूत और निशानियाँ आईं, वे इतनी स्पष्ट थीं कि किसी भी समझदार इंसान के लिए उन्हें नकारना संभव नहीं था। फिर भी उन्होंने अपने घमंड और अहंकार की वजह से सच्चाई को जादू कहकर खारिज कर दिया।

अल्लाह तआला की आयतें इंसान की भलाई के लिए आती हैं, उसे अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाने के लिए। लेकिन जिन लोगों के दिलों पर पर्दा पड़ा होता है, वे हर सच्चाई को उल्टे नज़रिए से देखते हैं। वे जादू का शब्द इसलिए इस्तेमाल करते हैं ताकि लोगों को कुरआन से दूर रखें, जबकि कुरआन तो खुद एक जीवंत चमत्कार है जो सच्चाई और हिदायत से भरा हुआ है।

इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि हम कभी भी सच्चाई को सुनकर उसे नकारने वालों में न बनें। जब हमारे पास कुरआन की रोशनी पहुँचे, तो हमें उसे खुले दिल से कबूल करना चाहिए, क्योंकि यही हमारी दुनिया और आख़िरत की कामयाबी का ज़रिया है। अल्लाह की आयतें हमारे लिए रहमत हैं, और जो उन्हें अपनाता है, वह कभी नाकाम नहीं होता।



📜 आयत 5-9 — अल-अहकाफ

5وَمَنْ أَضَلُّ مِمَّن يَدْعُو مِن دُونِ اللَّهِ مَن لَّا يَسْتَجِيبُ لَهُ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَهُمْ عَن دُعَائِهِمْ غَافِلُونَ
और उस शख़्श से बढ़ कर कौन गुमराह हो सकता है जो ख़ुदा के सिवा ऐसे शख़्श को पुकारे जो उसे क़यामत तक जवाब ही न दे और उनको उनके पुकारने की ख़बरें तक न हों
6وَإِذَا حُشِرَ النَّاسُ كَانُوا لَهُمْ أَعْدَاءً وَكَانُوا بِعِبَادَتِهِمْ كَافِرِينَ
और जब लोग (क़यामत) में जमा किये जाएगें तो वह (माबूद) उनके दुशमन हो जाएंगे और उनकी परसतिश से इन्कार करेंगे
7وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ قَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ هَٰذَا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और जब हमारी खुली खुली आयतें उनके सामने पढ़ी जाती हैं तो जो लोग काफिर हैं हक़ के बारे में जब उनके पास आ चुका तो कहते हैं ये तो सरीही जादू है
8أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ إِنِ افْتَرَيْتُهُ فَلَا تَمْلِكُونَ لِي مِنَ اللَّهِ شَيْئًا ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَا تُفِيضُونَ فِيهِ ۖ كَفَىٰ بِهِ شَهِيدًا بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۖ وَهُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
क्या ये कहते हैं कि इसने इसको ख़ुद गढ़ लिया है तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर मैं इसको (अपने जी से) गढ़ लेता तो तुम ख़ुदा के सामने मेरे कुछ भी काम न आओगे जो जो बातें तुम लोग उसके बारे में करते रहते हो वह ख़ूब जानता है मेरे और तुम्हारे दरमियान वही गवाही को काफ़ी है और वही बड़ा बख्शने वाला है मेहरबान है
9قُلْ مَا كُنتُ بِدْعًا مِّنَ الرُّسُلِ وَمَا أَدْرِي مَا يُفْعَلُ بِي وَلَا بِكُمْ ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ وَمَا أَنَا إِلَّا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं कोई नया रसूल तो आया नहीं हूँ और मैं कुछ नहीं जानता कि आइन्दा मेरे साथ क्या किया जाएगा और न (ये कि) तुम्हारे साथ क्या किया जाएगा मैं तो बस उसी का पाबन्द हूँ जो मेरे पास वही आयी है और मैं तो बस एलानिया डराने वाला हूँ
अल-अहकाफकुरान सूची
35आयत
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7आयत

अनुवाद — अल-अहकाफ 7

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Tuesday, August 18, 2026

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