मुहम्मद · 28/38
अनुवाद उच्चारण — सूरा मुहम्मद
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اتَّبَعُوا مَا أَسْخَطَ اللَّهَ وَكَرِهُوا رِضْوَانَهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ ۝٢٨
Zaalika bi annahumut taba`oo maaa askhatal laaha wa karihoo ridwaanahoo fa ahbata a`maalahum
📖 हिंदी अर्थ
ये इस सबब से कि जिस चीज़ों से ख़ुदा नाख़ुश है उसकी तो ये लोग पैरवी करते हैं और जिसमें ख़ुदा की ख़ुशी है उससे बेज़ार हैं तो ख़ुदा ने भी उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَسْخَطَ اللَّهَ: जिससे अल्लाह नाराज़ हो।
  • رِضْوَانَهُ: अल्लाह की खुशी और प्रसन्नता।
  • فَأَحْبَطَ: तो उसने बेकार कर दिया, नष्ट कर दिया।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह अज़ाब और यह बुरा अंजाम जो उन्हें मिला, वह इसलिए था क्योंकि उन्होंने उन रास्तों और कामों को अपनाया जिनसे अल्लाह नाराज़ होता है — जैसे शैतान की आज्ञा मानना, कुफ़्र और निफ़ाक़ (पाखंड) अपनाना, और अल्लाह तथा उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की दुश्मनी करना। उन्होंने अल्लाह की नाराज़गी को खरीदा और उसकी खुशी को ठुकरा दिया। वे उन अच्छे कामों से नफ़रत करते थे जो अल्लाह को पसंद हैं — जैसे ईमान, नेकी, अल्लाह के रास्ते में जिहाद, सच्चाई और भलाई के काम। उन्होंने अल्लाह की रज़ा (खुशी) को अपने लिए बोझ समझा और उससे दूर भागे। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उनके सारे अच्छे काम — चाहे वे दान-पुण्य हों, रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार हो या कोई और नेकी — सब बेकार कर दिए और उनका कोई बदला उन्हें नहीं मिलेगा।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है: इंसान का अंजाम उसके ईमान और उसके कर्मों पर निर्भर करता है। अगर कोई व्यक्ति अल्लाह की नाराज़गी के काम करता है और उसकी खुशी के कामों से नफ़रत करता है, तो उसकी सारी नेकियाँ भी उसे क़यामत के दिन कोई फ़ायदा नहीं पहुँचा सकतीं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में हर उस काम से बचें जो अल्लाह को नाराज़ करे, और हर उस काम को अपनाएँ जो उसे पसंद है — क्योंकि अल्लाह की रज़ा ही असली कामयाबी है। जिसे अल्लाह की खुशी मिल गई, उसने सब कुछ पा लिया, और जो उसकी नाराज़गी का शिकार हुआ, उसने सब कुछ खो दिया।



📜 आयत 26-30 — सूरा मुहम्मद

26ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوا لِلَّذِينَ كَرِهُوا مَا نَزَّلَ اللَّهُ سَنُطِيعُكُمْ فِي بَعْضِ الْأَمْرِ ۖ وَاللَّهُ يَعْلَمُ إِسْرَارَهُمْ
यह इसलिए जो लोग ख़ुदा की नाज़िल की हुई(किताब) से बेज़ार हैं ये उनसे कहते हैं कि बाज़ कामों में हम तुम्हारी ही बात मानेंगे और ख़ुदा उनके पोशीदा मशवरों से वाक़िफ है
27فَكَيْفَ إِذَا تَوَفَّتْهُمُ الْمَلَائِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَارَهُمْ
तो जब फ़रिश्तें उनकी जान निकालेंगे उस वक्त उनका क्या हाल होगा कि उनके चेहरों पर और उनकी पुश्त पर मारते जाएँगे
28ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اتَّبَعُوا مَا أَسْخَطَ اللَّهَ وَكَرِهُوا رِضْوَانَهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ
ये इस सबब से कि जिस चीज़ों से ख़ुदा नाख़ुश है उसकी तो ये लोग पैरवी करते हैं और जिसमें ख़ुदा की ख़ुशी है उससे बेज़ार हैं तो ख़ुदा ने भी उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया
29أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ أَن لَّن يُخْرِجَ اللَّهُ أَضْغَانَهُمْ
क्या वह लोग जिनके दिलों में (नेफ़ाक़ का) मर्ज़ है ये ख्याल करते हैं कि ख़ुदा दिल के कीनों को भी न ज़ाहिर करेगा
30وَلَوْ نَشَاءُ لَأَرَيْنَاكَهُمْ فَلَعَرَفْتَهُم بِسِيمَاهُمْ ۚ وَلَتَعْرِفَنَّهُمْ فِي لَحْنِ الْقَوْلِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ أَعْمَالَكُمْ
तो हम चाहते तो हम तुम्हें इन लोगों को दिखा देते तो तुम उनकी पेशानी ही से उनको पहचान लेते अगर तुम उन्हें उनके अन्दाज़े गुफ्तगू ही से ज़रूर पहचान लोगे और ख़ुदा तो तुम्हारे आमाल से वाक़िफ है
मुहम्मदकुरान सूची
38आयत
मदनीअवतरण स्थान
28आयत

अनुवाद — मुहम्मद 28

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Friday, October 2, 2026

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