मुहम्मद · 27/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
فَكَيْفَ إِذَا تَوَفَّتْهُمُ الْمَلَائِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَارَهُمْ ۝٢٧
Fakaifa izaa tawaffat humul malaaa`ikatu yadriboona wujoohahum wa adbaa rahum
📖 हिंदी अर्थ
तो जब फ़रिश्तें उनकी जान निकालेंगे उस वक्त उनका क्या हाल होगा कि उनके चेहरों पर और उनकी पुश्त पर मारते जाएँगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَوَفَّتْهُمُ: उनकी आत्माएँ क़ब्ज़ कर लीं।
  • الْمَلَائِكَةُ: मौत के फ़रिश्ते।
  • يَضْرِبُونَ: मारते हैं।
  • وُجُوهَهُمْ: उनके चेहरों को।
  • أَدْبَارَهُمْ: उनकी पीठों को (पीछे की तरफ़)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) की भयानक हालत का ज़िक्र कर रहे हैं, जो दुनिया में ईमान का दिखावा करते हैं, लेकिन दिल में कुफ़्र और नफ़रत छिपाए रखते हैं। जब उनकी मौत का वक़्त आएगा और फ़रिश्ते उनकी रूह क़ब्ज़ करने के लिए आएँगे, तो वे उनके चेहरों और पीठों पर लोहे के हथौड़ों (मुक़ामे) से मारेंगे। यह वो दृश्य होगा जिसे देखकर हर समझदार इंसान काँप उठेगा।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त चेतावनी है जो अल्लाह के दीन का मज़ाक उड़ाते हैं, रसूलुल्लाह ﷺ की शान में गुस्ताख़ी करते हैं, और मुसलमानों के ख़िलाफ़ साज़िशें रचते हैं। अल्लाह फ़रमाता है: "फिर उनका क्या हाल होगा जब फ़रिश्ते उनकी जान निकालेंगे और उनके चेहरों और पीठों पर मारेंगे?" यानी उस वक़्त उन्हें अपने किए पर पछतावा होगा, लेकिन पछतावा किसी काम न आएगा।

यह दृश्य हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपनी ज़िंदगी कैसे गुज़ार रहे हैं। क्या हम सच्चे मुसलमान हैं या सिर्फ़ दिखावा कर रहे हैं? अल्लाह तआला हमें मौत से पहले तौबा करने की तौफ़ीक़ दे, और हमें उन लोगों में से न बनाए जिनके चेहरे और पीठ क़ियामत के दिन फ़रिश्तों की मार से ज़ख़्मी होंगे।

याद रखिए, यह दुनिया की ज़िंदगी एक इम्तिहान है। जो लोग अल्लाह के हुक्मों की परवाह नहीं करते और अपनी ज़िद में अड़े रहते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। लेकिन जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, उनके लिए जन्नत की खुशख़बरी है। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 25-29 — मुहम्मद

25إِنَّ الَّذِينَ ارْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِهِم مِّن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَى ۙ الشَّيْطَانُ سَوَّلَ لَهُمْ وَأَمْلَىٰ لَهُمْ
बेशक जो लोग राहे हिदायत साफ़ साफ़ मालूम होने के बाद उलटे पाँव (कुफ़्र की तरफ) फिर गये शैतान ने उन्हें (बुते देकर) ढील दे रखी है और उनकी (तमन्नाओं) की रस्सियाँ दराज़ कर दी हैं
26ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوا لِلَّذِينَ كَرِهُوا مَا نَزَّلَ اللَّهُ سَنُطِيعُكُمْ فِي بَعْضِ الْأَمْرِ ۖ وَاللَّهُ يَعْلَمُ إِسْرَارَهُمْ
यह इसलिए जो लोग ख़ुदा की नाज़िल की हुई(किताब) से बेज़ार हैं ये उनसे कहते हैं कि बाज़ कामों में हम तुम्हारी ही बात मानेंगे और ख़ुदा उनके पोशीदा मशवरों से वाक़िफ है
27فَكَيْفَ إِذَا تَوَفَّتْهُمُ الْمَلَائِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَارَهُمْ
तो जब फ़रिश्तें उनकी जान निकालेंगे उस वक्त उनका क्या हाल होगा कि उनके चेहरों पर और उनकी पुश्त पर मारते जाएँगे
28ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اتَّبَعُوا مَا أَسْخَطَ اللَّهَ وَكَرِهُوا رِضْوَانَهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ
ये इस सबब से कि जिस चीज़ों से ख़ुदा नाख़ुश है उसकी तो ये लोग पैरवी करते हैं और जिसमें ख़ुदा की ख़ुशी है उससे बेज़ार हैं तो ख़ुदा ने भी उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया
29أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ أَن لَّن يُخْرِجَ اللَّهُ أَضْغَانَهُمْ
क्या वह लोग जिनके दिलों में (नेफ़ाक़ का) मर्ज़ है ये ख्याल करते हैं कि ख़ुदा दिल के कीनों को भी न ज़ाहिर करेगा
मुहम्मदकुरान सूची
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अनुवाद — मुहम्मद 27

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Tuesday, August 18, 2026

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