अल-माइदा · 72/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
لَقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۖ وَقَالَ الْمَسِيحُ يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ اعْبُدُوا اللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمْ ۖ إِنَّهُ مَن يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَقَدْ حَرَّمَ اللَّهُ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ وَمَأْوَاهُ النَّارُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ ۝٧٢
Laqad kafaral lazeena qaalooo innal laaha Huwal maseehub nu Maryama wa qaalal Maseehu yaa Baneee Israaa`eela budul laaha Rabbee wa Rabbakum innnahoo many-yushrik ballaahi faqad harramal laahu `alaihil jannata wa maa waahun Naaru wa maa lizzaalimeena min ansaar
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे ईसा मसीह ख़ुदा हैं वह सब काफ़िर हैं हालॉकि मसीह ने ख़ुद यूं कह दिया था कि ऐ बनी इसराईल सिर्फ उसी ख़ुदा की इबादत करो जो हमारा और तुम्हारा पालने वाला है क्योंकि (याद रखो) जिसने ख़ुदा का शरीक बनाया उस पर ख़ुदा ने बेहिश्त को हराम कर दिया है और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَقَدْ كَفَرَ: निश्चय ही काफ़िर (अधर्मी) हो गए।
  • الْمَسِيحُ: ईसा अलैहिस्सलाम, जिन्हें मसीह कहा जाता है।
  • اعْبُدُوا: इबादत करो, उपासना करो।
  • حَرَّمَ: हराम कर दिया, रोक दिया।
  • مَأْوَاهُ: उसका ठिकाना, निवास स्थान।
  • أَنصَارٍ: सहायक, मददगार।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने स्पष्ट रूप से बताया कि जिन लोगों ने यह कहा कि "अल्लाह स्वयं मसीह (ईसा इब्ने मरयम) हैं", वे निश्चय ही काफ़िर हो गए। यह घोर शिर्क है, क्योंकि ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह की मख़लूक़ (सृष्टि) हैं, अल्लाह के बंदे और उसके रसूल हैं। उन्हें ख़ुदा कहना या उन्हें अल्लाह के साथ शरीक ठहराना पूर्ण अधर्म और कुफ़्र है।

अल्लाह ने यह भी बताया कि स्वयं मसीह (ईसा) ने अपनी क़ौम बनी इस्राईल से कहा था: "ऐ बनी इस्राईल! अल्लाह की इबादत करो, जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी।" यानी ईसा ने ख़ुद को अल्लाह का बंदा बताया और लोगों को एक अल्लाह की उपासना की ओर बुलाया। उन्होंने कभी अपने लिए उलूहियत (ख़ुदाई) का दावा नहीं किया, बल्कि वे तो अल्लाह के आज्ञाकारी बंदे और उसके पैग़म्बर थे।

फिर अल्लाह ने एक सामान्य नियम बताया: "जो कोई अल्लाह के साथ किसी और को शरीक ठहराएगा, अल्लाह ने उस पर जन्नत हराम कर दी है, और उसका ठिकाना जहन्नम (नर्क) की आग है।" यानी शिर्क करने वाले के लिए जन्नत में प्रवेश वर्जित है, और उसका अंतिम निवास नर्क है। ऐसे ज़ालिमों (अत्याचारियों) का कोई सहायक नहीं होगा जो उन्हें अल्लाह की यातना से बचा सके या उनकी मदद कर सके।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत सिखाती है कि अल्लाह की एकता (तौहीद) ही सच्चा धर्म है, और किसी भी नबी या इंसान को ख़ुदा बनाना या उसकी पूजा करना सबसे बड़ा पाप है।
  2. ईसा अलैहिस्सलाम की पाक सीरत से हमें सबक मिलता है कि सच्चे नबी अपनी उम्मत को हमेशा अल्लाह की इबादत की ओर बुलाते हैं, न कि अपनी तरफ़।
  3. शिर्क से बचना ही जन्नत की कुंजी है; जो व्यक्ति अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराता है, उसके सारे अच्छे काम बेकार हो जाते हैं और उसका अंजाम नर्क है।
  4. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे अपने ईमान की रक्षा करें, और ईसा अलैहिस्सलाम को केवल अल्लाह का बंदा और रसूल मानें, न कि अल्लाह का बेटा या ख़ुदा।
  5. अल्लाह की रहमत और अदालत दोनों का पता चलता है—वह शिर्क करने वालों को सज़ा देगा, लेकिन जो लोग उसकी इबादत करते हैं और उसके रसूलों पर ईमान लाते हैं, उनके लिए जन्नत तैयार है।


📜 आयत 70-74 — अल-माइदा

70لَقَدْ أَخَذْنَا مِيثَاقَ بَنِي إِسْرَائِيلَ وَأَرْسَلْنَا إِلَيْهِمْ رُسُلًا ۖ كُلَّمَا جَاءَهُمْ رَسُولٌ بِمَا لَا تَهْوَىٰ أَنفُسُهُمْ فَرِيقًا كَذَّبُوا وَفَرِيقًا يَقْتُلُونَ
हमने बनी इसराईल से एहद व पैमान ले लिया था और उनके पास बहुत रसूल भी भेजे थे (इस पर भी) जब उनके पास कोई रसूल उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ हुक्म लेकर आया तो इन (कम्बख्त) लोगों ने किसी को झुठला दिया और किसी को क़त्ल ही कर डाला
71وَحَسِبُوا أَلَّا تَكُونَ فِتْنَةٌ فَعَمُوا وَصَمُّوا ثُمَّ تَابَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ ثُمَّ عَمُوا وَصَمُّوا كَثِيرٌ مِّنْهُمْ ۚ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِمَا يَعْمَلُونَ
और समझ लिया कि (इसमें हमारे लिए) कोई ख़राबी न होगी पस (गोया) वह लोग (अम्र हक़ से) अंधे और बहरे बन गए (मगर बावजूद इसके) जब इन लोगों ने तौबा की तो फिर ख़ुदा ने उनकी तौबा क़ुबूल कर ली (मगर) फिर (इस पर भी) उनमें से बहुतेरे अंधे और बहरे बन गए और जो कुछ ये लोग कर रहे हैं अल्लाह तो देखता है
72لَقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۖ وَقَالَ الْمَسِيحُ يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ اعْبُدُوا اللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمْ ۖ إِنَّهُ مَن يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَقَدْ حَرَّمَ اللَّهُ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ وَمَأْوَاهُ النَّارُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे ईसा मसीह ख़ुदा हैं वह सब काफ़िर हैं हालॉकि मसीह ने ख़ुद यूं कह दिया था कि ऐ बनी इसराईल सिर्फ उसी ख़ुदा की इबादत करो जो हमारा और तुम्हारा पालने वाला है क्योंकि (याद रखो) जिसने ख़ुदा का शरीक बनाया उस पर ख़ुदा ने बेहिश्त को हराम कर दिया है और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं
73لَّقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ ثَالِثُ ثَلَاثَةٍ ۘ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۚ وَإِن لَّمْ يَنتَهُوا عَمَّا يَقُولُونَ لَيَمَسَّنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
जो लोग इसके क़ायल हैं कि ख़ुदा तीन में का (तीसरा) है वह यक़ीनन काफ़िर हो गए (याद रखो कि) ख़ुदाए यकता के सिवा कोई माबूद नहीं और (ख़ुदा के बारे में) ये लोग जो कुछ बका करते हैं अगर उससे बाज़ न आए तो (समझ रखो कि) जो लोग उसमें से (काफ़िर के) काफ़िर रह गए उन पर ज़रूर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल होगा
74أَفَلَا يَتُوبُونَ إِلَى اللَّهِ وَيَسْتَغْفِرُونَهُ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
तो ये लोग ख़ुदा की बारगाह में तौबा क्यों नहीं करते और अपने (क़सूरों की) माफ़ी क्यों नहीं मॉगते हालॉकि ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अल-माइदा 72

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Tuesday, August 18, 2026

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