Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَمَا لَنَا: हमें क्या हो गया है, अर्थात हमारे लिए कौन सी रुकावट है।
- نُؤْمِنُ: हम ईमान लाएँ।
- الْحَقِّ: सत्य, जो अल्लाह की ओर से आया (क़ुरआन और इस्लाम)।
- نَطْمَعُ: हम आशा रखते हैं, लालच रखते हैं।
- الْقَوْمِ الصَّالِحِينَ: नेक लोग, अल्लाह के आज्ञाकारी और सच्चे बंदे।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन ईमानवालों के कथन को बयान करती है जिन्होंने सच्चाई को पहचानने के बाद उसे अपना लिया। वे कहते हैं: "हमें क्या हो गया है कि हम अल्लाह पर ईमान न लाएँ, जबकि हमारे पास वह सत्य (हक़) आ चुका है जो अल्लाह की ओर से भेजा गया? और हम यह भी आशा रखते हैं कि हमारा रब हमें अपने नेक बंदों के साथ (जन्नत में) दाखिल करेगा।"
यह बात उन लोगों ने कही जब उन्हें यहूदियों की ओर से ताने मिले कि तुमने मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान क्यों लाया? उन्होंने जवाब में यह बात कही कि जब सत्य स्पष्ट हो चुका है और हमारे पास अल्लाह का भेजा हुआ हक़ आ चुका है, तो फिर हमें ईमान लाने से कौन रोक सकता है? हमें इस बात की कोई शर्म या डर नहीं है, बल्कि हमें तो यह आशा है कि हमारा रब हमें अपने नेक बंदों के साथ जन्नत में दाखिल करेगा। यह उनके ईमान की गहराई और सच्चाई को दर्शाता है कि उन्होंने दुनिया की परवाह नहीं की, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसके नेक बंदों की संगत को सबसे बड़ा लक्ष्य बनाया।
फ़ायदे (उपदेश):
- सच्चाई के सामने झुकना: जब इंसान के पास सत्य पहुँच जाए, तो उसे बिना किसी झिझक या देरी के उसे स्वीकार कर लेना चाहिए। यही ईमान की निशानी है।
- लोगों की तानों की परवाह न करना: जब इंसान अल्लाह पर ईमान लाता है, तो उसे समाज के तानों, उपहास या विरोध की परवाह नहीं करनी चाहिए। सच्चाई पर चलना ही सबसे बड़ी जीत है।
- नेक लोगों की संगत की आशा: मोमिन की सबसे बड़ी चाहत यह होनी चाहिए कि उसे अल्लाह के नेक बंदों के साथ जन्नत में जगह मिले। यह आशा इंसान को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करती है।
- ईमान में शर्म या डर नहीं: ईमान लाना कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि यह सबसे बड़ा सम्मान और सौभाग्य है। जो लोग ईमान पर ताने कसते हैं, वे वास्तव में सत्य से दूर हैं।
- अल्लाह की रहमत पर भरोसा: यह आयत सिखाती है कि हमें अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए और उससे अच्छी आशा रखनी चाहिए कि वह हमें अपने नेक बंदों के साथ दाखिल करेगा।
📜 आयत 82-86 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 84
सूरा अल-माइदा आयत 84 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमको क्या हो गया है कि हम ख़ुदा और…सूरा आयत 84/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 82–86. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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