Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَفِيضُ مِنَ الدَّمْعِ: आँखों से आँसू बह निकलना, अत्यधिक रोना।
- مِمَّا عَرَفُوا مِنَ الْحَقِّ: उस सत्य को पहचानने के कारण जो उन्होंने जान लिया।
- فَاكْتُبْنَا: हमें लिख ले, हमें दर्ज कर ले।
- الشَّاهِدِينَ: गवाही देने वालों में, यानी उम्मत-ए-मुहम्मदीyah जो क़यामत के दिन अन्य उम्मतों पर गवाह होंगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन पवित्र आत्माओं का वर्णन करती है जिनके दिल सत्य की पहचान से रोशन हो गए थे। जब ये लोग—जिनमें नजाशी (हबशा के न्यायप्रिय बादशाह) और उनके साथी शामिल थे—रसूलुल्लाह ﷺ पर उतारे गए क़ुरआन की आयतें सुनते थे, तो उनकी आँखें आँसुओं से भर जाती थीं। यह आँसू किसी दिखावे या ज़बरदस्ती के नहीं थे, बल्कि इसलिए थे क्योंकि उन्होंने सत्य को पहचान लिया था। उन्होंने महसूस किया कि यह कलाम किसी इंसान का नहीं, बल्कि अल्लाह का उतारा हुआ है, और यह उन सच्चाइयों की पुष्टि करता है जो पहले आए नबियों—ख़ासकर हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम)—पर उतारी गई थीं।
उनके दिल नर्म थे, उनकी आँखें नम थीं, और उनकी ज़ुबान पर सिर्फ़ एक ही दुआ थी: "ऐ हमारे रब! हम ईमान लाए, हमें उन लोगों के साथ दर्ज कर ले जो गवाही देने वाले हैं।" यानी उन्होंने अल्लाह से यह माँग की कि उन्हें उम्मत-ए-मुहम्मदीyah का हिस्सा बना लिया जाए—वह उम्मत जो क़यामत के दिन अन्य उम्मतों पर गवाही देगी कि उनके नबियों ने उन्हें सत्य का संदेश पहुँचा दिया था।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान वही है जो दिल की गहराई से निकले, आँखों से आँसू बहाए और ज़ुबान से सच्ची गवाही दे। ये लोग कितने खुशनसीब थे कि उन्होंने सिर्फ़ सुनते ही सत्य को पहचान लिया और बिना किसी लाग-लपेट के ईमान ले आए। अल्लाह उनकी इस हालत से इतना प्रसन्न हुआ कि उनकी तारीफ़ क़ुरआन में हमेशा के लिए दर्ज कर दी।
आज हमारे लिए भी यही रास्ता है—जब क़ुरआन सुनें तो दिल से सुनें, उस पर अमल करें, और अल्लाह से दुआ करें कि हमें भी उन सच्चे गवाहों में शामिल करे जो क़यामत के दिन सत्य की गवाही देंगे। यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम का दामन बहुत विस्तृत है—जो भी सत्य को पहचान ले और ईमान ले आए, वही अल्लाह के यहाँ सम्मानित है, चाहे वह किसी भी ज़माने, किसी भी मुल्क या किसी भी नस्ल से हो।
📜 आयत 81-85 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 83
सूरा अल-माइदा आयत 83 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तू देखता है कि जब यह लोग (इस कुरान)…सूरा आयत 83/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 81–85. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


