अल-माइदा · 86/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ ۝٨٦
Wallazeena kafaroo wa kazzaboo bi Aayaatinaaa ulaaa`ika Ashaabul Jaheem
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया यही लोग जहन्नुमी हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَرُوا: अल्लाह की एकता और उसके रसूल (ﷺ) की नबुव्वत का इनकार किया, अर्थात कुफ्र किया।
  • كَذَّبُوا: झुठलाया, अस्वीकार किया।
  • بِآيَاتِنَا: हमारी आयतों को, जो हमने अपने रसूलों पर उतारीं (क़ुरआन और पिछली किताबें)।
  • أَصْحَابُ الْجَحِيمِ: जहन्नम (भड़कती हुई आग) में हमेशा रहने वाले, उसके साथी।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के अंजाम को बयान करती है जिन्होंने अल्लाह की वहदानियत (एकता) से इनकार किया, उसके रसूल मुहम्मद (ﷺ) की नबुव्वत को नहीं माना, और अल्लाह की उन आयतों को झुठलाया जो उसने अपने रसूलों पर उतारीं। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने फैसला सुना दिया है कि वे जहन्नम के साथी हैं—यानी वे उस भड़कती हुई, बहुत तेज़ आग में हमेशा रहने वाले हैं, और उससे कभी निकलने वाले नहीं। यह उनका स्थायी ठिकाना होगा, क्योंकि उन्होंने हक़ (सत्य) को जानते हुए या जिद्दो-इनकार के साथ उसे ठुकरा दिया और अल्लाह की निशानियों को झूठ कहा। यह उनके कुफ्र और तकज़ीब (झुठलाने) का सीधा और न्यायपूर्ण परिणाम है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत हमें सचेत करती है कि अल्लाह की आयतों को झुठलाना और उसके रसूलों का इनकार करना सबसे बड़ा गुनाह है, जिसकी सज़ा जहन्नम है। इससे हमें बचना चाहिए।
  2. यह हमें अल्लाह के इंसाफ़ (न्याय) की याद दिलाती है—जो हक़ को जानकर उसे ठुकराए, उसके लिए सख्त अज़ाब है, लेकिन जो ईमान लाए और नेक अमल करे, उसके लिए जन्नत है (जैसा पिछली आयत में बयान हुआ)।
  3. यह आयत हमें क़ुरआन और रसूल (ﷺ) की महत्वपूर्ण भूमिका समझाती है—यही हिदायत का ज़रिया है, और इन्हें मानना ही नजात (मुक्ति) का रास्ता है।
  4. यह हमें अल्लाह के डर और उसकी रहमत की ओर रुजू करने की तरग़ीब देती है—कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें, आयतों पर अमल करें, और उन लोगों के हाल से इबरत हासिल करें जिन्होंने हक़ को झुठलाया और जहन्नम के हक़दार बने।


📜 आयत 84-88 — अल-माइदा

84وَمَا لَنَا لَا نُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَمَا جَاءَنَا مِنَ الْحَقِّ وَنَطْمَعُ أَن يُدْخِلَنَا رَبُّنَا مَعَ الْقَوْمِ الصَّالِحِينَ
और हमको क्या हो गया है कि हम ख़ुदा और जो हक़ बात हमारे पास आ चुकी है उस पर तो ईमान न लाएँ और (फिर) ख़ुदा से उम्मीद रखें कि वह अपने नेक बन्दों के साथ हमें (बेहिश्त में) पहुँचा ही देगा
85فَأَثَابَهُمُ اللَّهُ بِمَا قَالُوا جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ الْمُحْسِنِينَ
तो ख़ुदा ने उन्हें उनके (सदक़ दिल से) अर्ज़ करने के सिले में उन्हें वह (हरे भरे) बाग़ात अता फरमाए जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी हैं (और) वह उसमें हमेशा रहेंगे और (सदक़ दिल से) नेकी करने वालों का यही ऐवज़ है
86وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया यही लोग जहन्नुमी हैं
87يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تُحَرِّمُوا طَيِّبَاتِ مَا أَحَلَّ اللَّهُ لَكُمْ وَلَا تَعْتَدُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَدِينَ
ऐ ईमानदार जो पाक चीज़े ख़ुदा ने तुम्हारे वास्ते हलाल कर दी हैं उनको अपने ऊपर हराम न करो और हद से न बढ़ो क्यों कि ख़ुदा हद से बढ़ जाने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
88وَكُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ حَلَالًا طَيِّبًا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي أَنتُم بِهِ مُؤْمِنُونَ
और जो हलाल साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने तुम्हें दी हैं उनको (शौक़ से) खाओ और जिस ख़ुदा पर तुम ईमान लाए हो उससे डरते रहो
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीRevelation
86आयत

अनुवाद — अल-माइदा 86

सूरा अल-माइदा आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों…

सूरा आयत 86/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए