अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- كَفَرُوا: अल्लाह की एकता और उसके रसूल (ﷺ) की नबुव्वत का इनकार किया, अर्थात कुफ्र किया।
- كَذَّبُوا: झुठलाया, अस्वीकार किया।
- بِآيَاتِنَا: हमारी आयतों को, जो हमने अपने रसूलों पर उतारीं (क़ुरआन और पिछली किताबें)।
- أَصْحَابُ الْجَحِيمِ: जहन्नम (भड़कती हुई आग) में हमेशा रहने वाले, उसके साथी।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के अंजाम को बयान करती है जिन्होंने अल्लाह की वहदानियत (एकता) से इनकार किया, उसके रसूल मुहम्मद (ﷺ) की नबुव्वत को नहीं माना, और अल्लाह की उन आयतों को झुठलाया जो उसने अपने रसूलों पर उतारीं। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने फैसला सुना दिया है कि वे जहन्नम के साथी हैं—यानी वे उस भड़कती हुई, बहुत तेज़ आग में हमेशा रहने वाले हैं, और उससे कभी निकलने वाले नहीं। यह उनका स्थायी ठिकाना होगा, क्योंकि उन्होंने हक़ (सत्य) को जानते हुए या जिद्दो-इनकार के साथ उसे ठुकरा दिया और अल्लाह की निशानियों को झूठ कहा। यह उनके कुफ्र और तकज़ीब (झुठलाने) का सीधा और न्यायपूर्ण परिणाम है।
फ़ायदे (सबक़):
- यह आयत हमें सचेत करती है कि अल्लाह की आयतों को झुठलाना और उसके रसूलों का इनकार करना सबसे बड़ा गुनाह है, जिसकी सज़ा जहन्नम है। इससे हमें बचना चाहिए।
- यह हमें अल्लाह के इंसाफ़ (न्याय) की याद दिलाती है—जो हक़ को जानकर उसे ठुकराए, उसके लिए सख्त अज़ाब है, लेकिन जो ईमान लाए और नेक अमल करे, उसके लिए जन्नत है (जैसा पिछली आयत में बयान हुआ)।
- यह आयत हमें क़ुरआन और रसूल (ﷺ) की महत्वपूर्ण भूमिका समझाती है—यही हिदायत का ज़रिया है, और इन्हें मानना ही नजात (मुक्ति) का रास्ता है।
- यह हमें अल्लाह के डर और उसकी रहमत की ओर रुजू करने की तरग़ीब देती है—कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें, आयतों पर अमल करें, और उन लोगों के हाल से इबरत हासिल करें जिन्होंने हक़ को झुठलाया और जहन्नम के हक़दार बने।
📜 आयत 84-88 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 86
सूरा अल-माइदा आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों…सूरा आयत 86/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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