अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أُرْسِلْنَا: हमें भेजा गया है।
- قَوْمٍ مُجْرِمِينَ: अपराधी क़ौम, यानी वे लोग जो बड़े-बड़े गुनाहों में डूबे हुए थे।
तफ़सीर:
जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने फ़रिश्तों से पूछा कि तुम्हें किस काम के लिए भेजा गया है, तो उन्होंने जवाब दिया: "हमें अल्लाह तआला ने एक अपराधी क़ौम की तरफ भेजा है।" यह क़ौम हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम थी, जो अपनी शरारतों और गुनाहों में हद से गुज़र चुकी थी। उन्होंने अल्लाह की इतनी बड़ी नाफ़रमानी की थी कि उन पर अज़ाब का फ़रमान सच हो गया। ये लोग न सिर्फ़ आम गुनाह करते थे, बल्कि ऐसे घिनौने काम करते थे जो उनसे पहले किसी क़ौम ने नहीं किए थे। उनका जुर्म इतना बड़ा था कि अल्लाह ने उन्हें पक्की मिट्टी के पत्थरों से हलाक करने का फैसला किया, जो उनके रब के पास निशान लगाए हुए थे, उन हद से गुज़रने वालों के लिए तैयार किए गए थे।
यहाँ से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह तआला की रहमत बहुत बड़ी है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। जब कोई क़ौम गुनाहों में इतनी आगे बढ़ जाती है कि उसे सुधारने की कोई उम्मीद नहीं रहती, तो अल्लाह उस पर अपना अज़ाब नाज़िल करता है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक बनाएं। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, वो तौबा करने वालों को माफ कर देता है, लेकिन जो लोग अपनी सरकशी और जुर्म पर अड़े रहते हैं, उनके लिए उसका अज़ाब बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखें और उसके अज़ाब से डरते हुए नेक काम करते रहें।
📜 आयत 30-34 — अज़-ज़ारियात
अनुवाद — अज़-ज़ारियात 32
सूरा अज़-ज़ारियात आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह बोले हम तो गुनाहगारों (क़ौमे लूत) की तरफ भेजे…सूरा आयत 32/60 — अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ारियात सुनें, अज़-ज़ारियात अनुवाद, अज़-ज़ारियात mp3, अज़-ज़ारियात pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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