अज़-ज़ारियात · 32/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ ۝٣٢
Qaalooo innaaa ursilnaaa ilaa qawmim mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
वह बोले हम तो गुनाहगारों (क़ौमे लूत) की तरफ भेजे गए हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أُرْسِلْنَا: हमें भेजा गया है।
  • قَوْمٍ مُجْرِمِينَ: अपराधी क़ौम, यानी वे लोग जो बड़े-बड़े गुनाहों में डूबे हुए थे।

तफ़सीर:

जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने फ़रिश्तों से पूछा कि तुम्हें किस काम के लिए भेजा गया है, तो उन्होंने जवाब दिया: "हमें अल्लाह तआला ने एक अपराधी क़ौम की तरफ भेजा है।" यह क़ौम हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम थी, जो अपनी शरारतों और गुनाहों में हद से गुज़र चुकी थी। उन्होंने अल्लाह की इतनी बड़ी नाफ़रमानी की थी कि उन पर अज़ाब का फ़रमान सच हो गया। ये लोग न सिर्फ़ आम गुनाह करते थे, बल्कि ऐसे घिनौने काम करते थे जो उनसे पहले किसी क़ौम ने नहीं किए थे। उनका जुर्म इतना बड़ा था कि अल्लाह ने उन्हें पक्की मिट्टी के पत्थरों से हलाक करने का फैसला किया, जो उनके रब के पास निशान लगाए हुए थे, उन हद से गुज़रने वालों के लिए तैयार किए गए थे।

यहाँ से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह तआला की रहमत बहुत बड़ी है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। जब कोई क़ौम गुनाहों में इतनी आगे बढ़ जाती है कि उसे सुधारने की कोई उम्मीद नहीं रहती, तो अल्लाह उस पर अपना अज़ाब नाज़िल करता है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक बनाएं। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, वो तौबा करने वालों को माफ कर देता है, लेकिन जो लोग अपनी सरकशी और जुर्म पर अड़े रहते हैं, उनके लिए उसका अज़ाब बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखें और उसके अज़ाब से डरते हुए नेक काम करते रहें।



📜 आयत 30-34 — सूरा अज़-ज़ारियात

30قَالُوا كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ
लड़का क्यों कर होगा फ़रिश्ते बोले तुम्हारे परवरदिगार ने यूँ ही फरमाया है वह बेशक हिकमत वाला वाक़िफ़कार है
31۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ
तब इबराहीम ने पूछा कि (ऐ ख़ुदा के) भेजे हुए फरिश्तों आख़िर तुम्हें क्या मुहिम दर पेश है
32قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ
वह बोले हम तो गुनाहगारों (क़ौमे लूत) की तरफ भेजे गए हैं
33لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن طِينٍ
ताकि उन पर मिटटी के पथरीले खरन्जे बरसाएँ
34مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَ
जिन पर हद से बढ़ जाने वालों के लिए तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान लगा दिए गए हैं
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
32आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 32

सूरा अज़-ज़ारियात आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह बोले हम तो गुनाहगारों (क़ौमे लूत) की तरफ भेजे…

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Friday, October 2, 2026

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