अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَمَا وَجَدْنَا – और हमने नहीं पाया
- غَيْرَ بَيْتٍ – एक घर के अलावा
- مِنَ الْمُسْلِمِينَ – मुसलमानों (आज्ञाकारियों) में से
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि जब उनके फ़रिश्ते हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की बस्ती में पहुँचे और वहाँ के हालात का जायज़ा लिया, तो उस पूरी बस्ती में अल्लाह के आज्ञाकारी और ईमानवाले लोगों का सिर्फ़ एक ही घर मिला — और वह था हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) का घर। यानी उस बस्ती में ईमान और नेकी की मशाल सिर्फ़ एक ही घर में जल रही थी, बाक़ी पूरी बस्ती कुफ़्र, गुनाह और अल्लाह की नाफ़रमानी में डूबी हुई थी।
ये आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ सिखाती है कि सच्चाई और ईमान पर क़ायम रहने के लिए भीड़ का साथ होना ज़रूरी नहीं। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) अकेले थे, लेकिन उन्होंने हक़ पर क़ायम रहकर अल्लाह का हुक्म पूरा किया। अल्लाह ने उनके उसी सब्र और ईमान की वजह से उन्हें और उनके घरवालों को उस तबाही से बचा लिया जो पूरी बस्ती पर आई।
इससे हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह के नज़दीक असली इज़्ज़त तक़वा और ईमान है, न कि तादाद और ताक़त। एक मुसलमान भी अल्लाह की रहमत का हक़दार बन सकता है, बशर्ते वो अपने ईमान और अमल को दुरुस्त रखे। ये आयत उन लोगों के लिए तसल्ली है जो नेकी पर अकेले चल रहे हैं — उन्हें यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह उनके साथ है और उनकी मेहनत राईगाँ नहीं जाएगी।
आज के दौर में जब बुराई हर तरफ़ फैली हुई है, हमें हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) के घर से सबक़ लेना चाहिए कि अगर हमारा घर अल्लाह की इबादत और नेकी का केंद्र बन जाए, तो हम भी अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त के हक़दार बन सकते हैं। अल्लाह हमें अपने घरों को ईमान और नेकी की रोशनी से मुनव्वर करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 34-38 — अज़-ज़ारियात
अनुवाद — अज़-ज़ारियात 36
सूरा अज़-ज़ारियात आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वहाँ तो हमने एक के सिवा मुसलमानों का कोई…सूरा आयत 36/60 — अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ारियात सुनें, अज़-ज़ारियात अनुवाद, अज़-ज़ारियात mp3, अज़-ज़ारियात pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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