अज़-ज़ारियात · 35/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
فَأَخْرَجْنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ الْمُؤْمِنِينَ ۝٣٥
Fa akhrajnaa man kaana feehaa minal mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ वहाँ जितने लोग मोमिनीन थे उनको हमने निकाल दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَأَخْرَجْنَا: हमने निकाल लिया (बाहर कर दिया)
  • مِنَ الْمُؤْمِنِينَ: ईमानवालों में से

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम के उस विनाशकारी अज़ाब का ज़िक्र किया है, जो उनकी बस्तियों पर आया। लेकिन इसी के साथ अल्लाह ने अपनी रहमत का एक अज़ीम नमूना भी पेश किया है। जब अज़ाब का फ़रमान आया, तो अल्लाह तआला ने उन बस्तियों में जो भी ईमानवाले मौजूद थे — यानी जिन्होंने हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की दावत को क़बूल किया था और उन पर ईमान लाए थे — उन सबको पहले ही उस इलाक़े से निकाल लिया। अल्लाह ने उन्हें उस तबाही से बचा लिया जो काफ़िरों और मुजरिमों पर नाज़िल होने वाली थी।

यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि वह अपने नेक बंदों को हमेशा अज़ाब से पहले निकाल लेता है या उन्हें महफ़ूज़ रखता है। यह उसकी रहमत और इंसाफ़ का तक़ाज़ा है कि वह किसी बस्ती को तबाह करने से पहले वहाँ के मोमिनीन को अलग कर लेता है, ताकि नेक और बदनसीब लोगों का हश्र एक जैसा न हो। यही अल्लाह का इंसाफ़ है — वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर इंसान को उसके अमल के मुताबिक़ जज़ा देता है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि ईमान ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के अज़ाब से बचाती है। चाहे पूरी दुनिया गुनाह में डूबी हो, लेकिन जो लोग अल्लाह और उसके रसूल पर सच्चे दिल से ईमान रखते हैं और नेक अमल करते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उनके लिए निकलने का रास्ता बनाता है और उन्हें हर मुसीबत से महफ़ूज़ रखता है। यह हमारे लिए बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अगर हम सच्चे मोमिन बन जाएँ, तो अल्लाह की पनाह हमारे साथ है — इस दुनिया में भी और आख़िरत में भी।



📜 आयत 33-37 — सूरा अज़-ज़ारियात

33لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن طِينٍ
ताकि उन पर मिटटी के पथरीले खरन्जे बरसाएँ
34مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَ
जिन पर हद से बढ़ जाने वालों के लिए तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान लगा दिए गए हैं
35فَأَخْرَجْنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
ग़रज़ वहाँ जितने लोग मोमिनीन थे उनको हमने निकाल दिया
36فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٍ مِّنَ الْمُسْلِمِينَ
और वहाँ तो हमने एक के सिवा मुसलमानों का कोई घर पाया भी नहीं
37وَتَرَكْنَا فِيهَا آيَةً لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
और जो लोग दर्दनाक अज़ाब से डरते हैं उनके लिए वहाँ (इबरत की) निशानी छोड़ दी और मूसा (के हाल) में भी (निशानी है)
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 35

सूरा अज़-ज़ारियात आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ वहाँ जितने लोग मोमिनीन थे उनको हमने निकाल दिया

सूरा आयत 35/60 — सूरा अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ारियात सुनें, सूरा अज़-ज़ारियात अनुवाद, सूरा अज़-ज़ारियात mp3, सूरा अज़-ज़ारियात pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए