अत-तूर · 21/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
وَالَّذِينَ آمَنُوا وَاتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُم بِإِيمَانٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَا أَلَتْنَاهُم مِّنْ عَمَلِهِم مِّن شَيْءٍ ۚ كُلُّ امْرِئٍ بِمَا كَسَبَ رَهِينٌ ۝٢١
Wallazeena aamanoo wattaba`at hum zurriyyatuhum bieemaanin alhaqnaa bihim zurriyyatahum wa maaa alatnaahum min `amalihim min shai`; kullum ri`im bimaa kasaba raheen
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और उनकी औलाद ने भी ईमान में उनका साथ दिया तो हम उनकी औलाद को भी उनके दर्जे पहुँचा देंगे और हम उनकी कारगुज़ारियों में से कुछ भी कम न करेंगे हर शख़्श अपने आमाल के बदले में गिरवी है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذُرِّيَّتُهُم (उनकी संतान): उनकी औलाद, चाहे वे छोटे हों या बड़े।
  • أَلْحَقْنَا (हम मिला देंगे): हम उन्हें उनके पिताओं के साथ मिला देंगे।
  • أَلَتْنَاهُمْ (हम कम करेंगे): हम उनके कर्मों का प्रतिफल कम नहीं करेंगे।
  • رَهِينٌ (गिरवी/बंधक): हर व्यक्ति अपने कर्मों के साथ बंधा हुआ है, वह अपने कर्मों से नहीं बच सकता।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की उस महान कृपा और दया का वर्णन करती है जो वह अपने ईमानवाले बंदों पर करता है। अल्लाह फरमाता है कि जो लोग ईमान लाए और उनकी संतान ने भी उसी ईमान का अनुसरण किया — चाहे वे बड़े हों और अपने ईमान के कारण, या छोटे हों और अपने माता-पिता के ईमान की बदौलत उन्हीं के साथ जुड़े हों — तो अल्लाह उन संतानों को उनके माता-पिता के साथ जन्नत के उसी दर्जे में मिला देगा, भले ही उनके अमल (कर्म) उनके माता-पिता के अमल के बराबर न हों। यह अल्लाह की ओर से माता-पिता के लिए सम्मान और उनकी आँखों की ठंडक का सामान है, ताकि उन्हें अपनी संतान के साथ जन्नत में रहने की खुशी मिले।

और अल्लाह फरमाता है कि हम उनके (माता-पिता के) कर्मों का प्रतिफल कम नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें पूरा-पूरा देंगे। यह अल्लाह का अतिरिक्त अनुग्रह है कि वह संतान को माता-पिता के दर्जे में मिला देता है, जबकि माता-पिता के कर्मों में कोई कमी नहीं की जाती।

फिर अल्लाह तआला एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बयान करता है: "हर व्यक्ति अपने किए हुए कर्मों के साथ बंधा हुआ है।" यानी हर इंसान अपने अच्छे या बुरे कर्मों का जिम्मेदार है, और कोई किसी दूसरे के गुनाह का बोझ नहीं उठाएगा। यह न्याय का सिद्धांत है, जो अल्लाह की रहमत और अद्ल दोनों को दर्शाता है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत मोमिनिन के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है! यह बताती है कि अल्लाह अपने बंदों से कितना प्यार करता है और उन्हें कितनी बड़ी नेमतें देना चाहता है। जब एक इंसान ईमान लाता है और अपनी संतान को भी ईमान पर स्थिर रखता है, तो अल्लाह उसे यह इनाम देता है कि उसकी संतान भी उसी के साथ जन्नत के ऊँचे दर्जे में होगी। यह उन माता-पिता के लिए सबसे बड़ी खुशी है जो अपनी औलाद की इस्लाह (सुधार) और उन्हें नेक बनाने की कोशिश करते हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी संतान की परवरिश ईमान और अच्छे अख्लाक पर करनी चाहिए, क्योंकि यही वह नेकी है जो हमें और हमारी संतान को जन्नत में एक साथ ले जाएगी। साथ ही, यह भी याद रखें कि हर व्यक्ति अपने कर्मों का जिम्मेदार है, इसलिए हमें अपने अमल की इस्लाह पर ध्यान देना चाहिए और अपनी संतान को भी अच्छे कर्मों की तालीम देनी चाहिए। अल्लाह की रहमत बहुत विस्तृत है, और वह अपने बंदों को उनकी उम्मीद से भी बढ़कर इनाम देता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — अत-तूर

19كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
जो जो कारगुज़ारियाँ तुम कर चुके हो उनके सिले में (आराम से) तख्तों पर जो बराबर बिछे हुए हैं
20مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ سُرُرٍ مَّصْفُوفَةٍ ۖ وَزَوَّجْنَاهُم بِحُورٍ عِينٍ
तकिए लगाकर ख़ूब मज़े से खाओ पियो और हम बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूर से उनका ब्याह रचाएँगे
21وَالَّذِينَ آمَنُوا وَاتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُم بِإِيمَانٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَا أَلَتْنَاهُم مِّنْ عَمَلِهِم مِّن شَيْءٍ ۚ كُلُّ امْرِئٍ بِمَا كَسَبَ رَهِينٌ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और उनकी औलाद ने भी ईमान में उनका साथ दिया तो हम उनकी औलाद को भी उनके दर्जे पहुँचा देंगे और हम उनकी कारगुज़ारियों में से कुछ भी कम न करेंगे हर शख़्श अपने आमाल के बदले में गिरवी है
22وَأَمْدَدْنَاهُم بِفَاكِهَةٍ وَلَحْمٍ مِّمَّا يَشْتَهُونَ
और जिस क़िस्म के मेवे और गोश्त को उनका जी चाहेगा हम उन्हें बढ़ाकर अता करेंगे
23يَتَنَازَعُونَ فِيهَا كَأْسًا لَّا لَغْوٌ فِيهَا وَلَا تَأْثِيمٌ
वहाँ एक दूसरे से शराब का जाम ले लिया करेंगे जिसमें न कोई बेहूदगी है और न गुनाह
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीRevelation
21आयत

अनुवाद — अत-तूर 21

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Tuesday, August 18, 2026

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