अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذُرِّيَّتُهُم (उनकी संतान): उनकी औलाद, चाहे वे छोटे हों या बड़े।
- أَلْحَقْنَا (हम मिला देंगे): हम उन्हें उनके पिताओं के साथ मिला देंगे।
- أَلَتْنَاهُمْ (हम कम करेंगे): हम उनके कर्मों का प्रतिफल कम नहीं करेंगे।
- رَهِينٌ (गिरवी/बंधक): हर व्यक्ति अपने कर्मों के साथ बंधा हुआ है, वह अपने कर्मों से नहीं बच सकता।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला की उस महान कृपा और दया का वर्णन करती है जो वह अपने ईमानवाले बंदों पर करता है। अल्लाह फरमाता है कि जो लोग ईमान लाए और उनकी संतान ने भी उसी ईमान का अनुसरण किया — चाहे वे बड़े हों और अपने ईमान के कारण, या छोटे हों और अपने माता-पिता के ईमान की बदौलत उन्हीं के साथ जुड़े हों — तो अल्लाह उन संतानों को उनके माता-पिता के साथ जन्नत के उसी दर्जे में मिला देगा, भले ही उनके अमल (कर्म) उनके माता-पिता के अमल के बराबर न हों। यह अल्लाह की ओर से माता-पिता के लिए सम्मान और उनकी आँखों की ठंडक का सामान है, ताकि उन्हें अपनी संतान के साथ जन्नत में रहने की खुशी मिले।
और अल्लाह फरमाता है कि हम उनके (माता-पिता के) कर्मों का प्रतिफल कम नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें पूरा-पूरा देंगे। यह अल्लाह का अतिरिक्त अनुग्रह है कि वह संतान को माता-पिता के दर्जे में मिला देता है, जबकि माता-पिता के कर्मों में कोई कमी नहीं की जाती।
फिर अल्लाह तआला एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बयान करता है: "हर व्यक्ति अपने किए हुए कर्मों के साथ बंधा हुआ है।" यानी हर इंसान अपने अच्छे या बुरे कर्मों का जिम्मेदार है, और कोई किसी दूसरे के गुनाह का बोझ नहीं उठाएगा। यह न्याय का सिद्धांत है, जो अल्लाह की रहमत और अद्ल दोनों को दर्शाता है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत मोमिनिन के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है! यह बताती है कि अल्लाह अपने बंदों से कितना प्यार करता है और उन्हें कितनी बड़ी नेमतें देना चाहता है। जब एक इंसान ईमान लाता है और अपनी संतान को भी ईमान पर स्थिर रखता है, तो अल्लाह उसे यह इनाम देता है कि उसकी संतान भी उसी के साथ जन्नत के ऊँचे दर्जे में होगी। यह उन माता-पिता के लिए सबसे बड़ी खुशी है जो अपनी औलाद की इस्लाह (सुधार) और उन्हें नेक बनाने की कोशिश करते हैं।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी संतान की परवरिश ईमान और अच्छे अख्लाक पर करनी चाहिए, क्योंकि यही वह नेकी है जो हमें और हमारी संतान को जन्नत में एक साथ ले जाएगी। साथ ही, यह भी याद रखें कि हर व्यक्ति अपने कर्मों का जिम्मेदार है, इसलिए हमें अपने अमल की इस्लाह पर ध्यान देना चाहिए और अपनी संतान को भी अच्छे कर्मों की तालीम देनी चाहिए। अल्लाह की रहमत बहुत विस्तृत है, और वह अपने बंदों को उनकी उम्मीद से भी बढ़कर इनाम देता है।
📜 आयत 19-23 — अत-तूर
अनुवाद — अत-तूर 21
सूरा अत-तूर आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और उनकी औलाद…सूरा आयत 21/49 — अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तूर सुनें, अत-तूर अनुवाद, अत-तूर mp3, अत-तूर pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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