अत-तूर · 40/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
أَمْ تَسْأَلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ ۝٤٠
Am tas`aluhum ajran fahum mim maghramim musqaloon
📖 हिंदी अर्थ
या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत की) उजरत माँगते हो कि ये लोग कर्ज़ के बोझ से दबे जाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَمْ: यहाँ पर इसका अर्थ है "क्या" (प्रश्नवाचक)।
  • تَسْأَلُهُمْ أَجْرًا: उनसे कोई पारिश्रमिक या बदला माँगना।
  • مَغْرَم: हर्जाना, खर्चा, या वह चीज़ जो लाज़मी तौर पर अदा करनी पड़े।
  • مُثْقَلُونَ: बोझ से दबे हुए, भारी बोझ उठाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या आप इन मुशरिकों से इस्लाम की दावत और रिसालत पहुँचाने के बदले कोई उजरत या मेहनताना माँगते हैं? क्या आप उनसे कोई माली मुआवज़ा तलब करते हैं जिसके डर से वे इस बोझ को उठाने से कतराते हैं और आपके पैग़ाम को क़बूल करने से इनकार कर देते हैं?

हरगिज़ नहीं! आप तो उन्हें सिर्फ़ अल्लाह की राह की तरफ़ बुलाते हैं, और इस पर आप कोई अज्र नहीं चाहते। आपकी दावत बिल्कुल मुफ़्त और ख़ालिस अल्लाह की रज़ा के लिए है। आप उनसे कोई माली माँग नहीं करते, न ही उन पर कोई जुर्माना या हर्जाना लादते हैं। फिर भी वे इस सच्चाई को क़बूल करने से क्यों भागते हैं?

अगर आप उनसे कोई मेहनताना माँगते, तो शायद उनके पास यह बहाना होता कि यह बोझ हमारे लिए भारी है। लेकिन जब आपकी दावत बिल्कुल मुफ़्त है, उसमें कोई दुनियावी मतलब नहीं, तो फिर उनके इनकार की कोई वजह नहीं बनती। यह साफ़ दलील है कि वे सिर्फ़ हठधर्मी और सच्चाई से मुँह मोड़ने की वजह से ईमान नहीं लाते।


दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि दीन की दावत और अल्लाह की राह में काम करना बिल्कुल निःस्वार्थ होना चाहिए। जब दावत ख़ालिस अल्लाह के लिए होती है, तो लोगों के दिलों पर उसका असर ज़्यादा होता है। और जो लोग सच्चाई को समझकर भी उसे ठुकराते हैं, उनका हिसाब अल्लाह के सुपुर्द है। हमें चाहिए कि हम अपने अमल से लोगों को इस्लाम की खूबसूरती दिखाएँ, और उन्हें बताएँ कि इस दीन में कोई दुनियावी غرض नहीं, बल्कि यह तो सिर्फ़ इंसान की भलाई और उसकी कामयाबी के लिए है।



📜 आयत 38-42 — सूरा अत-तूर

38أَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَسْتَمِعُونَ فِيهِ ۖ فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُم بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
या उनके पास कोई सीढ़ी है जिस पर (चढ़ कर आसमान से) सुन आते हैं जो सुन आया करता हो तो वह कोई सरीही दलील पेश करे
39أَمْ لَهُ الْبَنَاتُ وَلَكُمُ الْبَنُونَ
क्या ख़ुदा के लिए बेटियाँ हैं और तुम लोगों के लिए बेटे
40أَمْ تَسْأَلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ
या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत की) उजरत माँगते हो कि ये लोग कर्ज़ के बोझ से दबे जाते हैं
41أَمْ عِندَهُمُ الْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ
या इन लोगों के पास ग़ैब (का इल्म) है कि वह लिख लेते हैं
42أَمْ يُرِيدُونَ كَيْدًا ۖ فَالَّذِينَ كَفَرُوا هُمُ الْمَكِيدُونَ
या ये लोग कुछ दाँव चलाना चाहते हैं तो जो लोग काफ़िर हैं वह ख़ुद अपने दांव में फँसे हैं
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अत-तूर 40

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Thursday, October 1, 2026

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