Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अम (أَمْ): क्या, या फिर (यहाँ प्रश्नवाचक और इनकार के अर्थ में है)
- अल-ग़ैब (الْغَيْبُ): छिपी हुई बातें, अदृश्य का ज्ञान, भविष्य की जानकारी
- यकतुबून (يَكْتُبُونَ): लिखते हैं, दर्ज करते हैं
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों से पूछ रहा है जो रसूल ﷺ की बातों को झुठलाते हैं और उनके पास आने वाली वह़ी (प्रकाशना) को नहीं मानते। अल्लाह फ़रमाता है: क्या इन लोगों के पास ग़ैब (अदृश्य) का ज्ञान है? क्या इनके पास लौह-ए-महफ़ूज़ (सुरक्षित पट्टिका) है जिसमें अल्लाह ने सब कुछ लिख दिया है, और ये लोग उसमें से पढ़कर लोगों को बता रहे हैं? क्या ये लोग भविष्य की घटनाओं, छिपी हुई बातों और उन रहस्यों को जानते हैं जिन्हें सिर्फ़ अल्लाह ही जानता है?
यह एक अलंकारिक प्रश्न है जिसका उत्तर स्पष्ट है — हरगिज़ नहीं! ये लोग ग़ैब का ज्ञान नहीं रखते, न ही इनके पास कोई ऐसा स्रोत है जिससे ये छिपी बातें जान सकें। अल्लाह तआला ने ग़ैब का ज्ञान केवल अपने पास रखा है। आसमानों और ज़मीन में जो कुछ भी छिपा है, उसका पूरा ज्ञान सिर्फ़ अल्लाह को है। ये लोग जो कुछ भी कहते हैं, वह सिर्फ़ अटकलें और झूठ हैं।
इस आयत में एक बड़ी सीख है — हमें यह यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला है। वही जानता है कि कल क्या होगा, किसके साथ क्या होगा, और कौन सी बात कब सामने आएगी। इसलिए हमें अपने जीवन के हर फ़ैसले में अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि जो लोग अल्लाह के रसूल ﷺ की बातों को झुठलाते हैं, वे वास्तव में उस ज्ञान को झुठलाते हैं जो अल्लाह ने अपने पैग़म्बरों पर उतारा है। जबकि सच्चाई यह है कि रसूल ﷺ जो कुछ भी बताते थे, वह अल्लाह की ओर से होता था, न कि अपनी ओर से। अल्लाह ने अपने रसूल को जो ज्ञान दिया, वही सच्चा ज्ञान है, और उसी पर चलना हमारे लिए नजात (मुक्ति) का ज़रिया है।
इसलिए ऐ इंसान! अल्लाह के दीन को क़बूल कर, उसके रसूल ﷺ पर ईमान ला, और यक़ीन रख कि अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला है। उसी की तरफ़ लौटना है और उसी से हिसाब लेना है। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 39-43 — सूरा अत-तूर
अनुवाद — अत-तूर 41
सूरा अत-तूर आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या इन लोगों के पास ग़ैब (का इल्म) है कि…सूरा आयत 41/49 — सूरा अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तूर सुनें, सूरा अत-तूर अनुवाद, सूरा अत-तूर mp3, सूरा अत-तूर pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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