अत-तूर · 39/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
أَمْ لَهُ الْبَنَاتُ وَلَكُمُ الْبَنُونَ ۝٣٩
Am lahul banaatu wa lakumul banoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या ख़ुदा के लिए बेटियाँ हैं और तुम लोगों के लिए बेटे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَمْ: यहाँ पर यह "بل" और "همزة" के अर्थ में है, यानी इन्कार और तिरस्कार के लिए।
  • الْبَنَاتُ: बेटियाँ।
  • الْبَنُونَ: बेटे।

तफ़सीर:

यह आयत उन मुशरिकीन (बहुदेववादियों) की बात का खंडन करती है जो अल्लाह के बारे में बड़ी ही बेतुकी बातें कहते थे। वे कहते थे कि अल्लाह के लिए बेटियाँ हैं और अपने लिए बेटे। यह उनकी बड़ी ही बेहूदा और झूठी बात थी, क्योंकि वे खुद बेटियों को अपने लिए बड़ी शर्म और अपमान की बात मानते थे। जब उनमें से किसी को बेटी पैदा होती थी तो उसका चेहरा काला पड़ जाता था और वह ग़म से भर जाता था।

अल्लाह तआला उनकी इस बेतुकी सोच पर तंज़ (व्यंग्य) करते हुए फ़रमाते हैं: क्या अल्लाह के लिए बेटियाँ हैं और तुम्हारे लिए बेटे? यानी तुम अपने लिए तो वह चीज़ पसंद करते हो जो तुम्हें अच्छी लगती है, और अल्लाह के लिए वह चीज़ ठहराते हो जिसे तुम खुद बुरा और अपमानजनक समझते हो। यह कितनी बड़ी नाइंसाफ़ी और जुर्म है! अल्लाह तआला इससे पाक और मुक़द्दस है।

यह आयत उनके इस झूठे दावे का खंडन करती है और उनकी सोच की बुनियाद को हिला देती है। अगर वे सच में बेटियों को कमतर समझते हैं, तो फिर अल्लाह के लिए बेटियाँ कैसे ठहरा सकते हैं? यह उनकी जाहिलियत और हठधर्मिता की सबसे बड़ी दलील है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला हर उस बात से पाक है जो इंसान उसके बारे में गढ़ता है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के बारे में सिर्फ वही कहें जो उसने खुद अपने बारे में बताया है। इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हम अपने रब की तारीफ़ और उसकी शान में कोई कमी न आने दें। अल्लाह तआला सबसे बड़ा, सबसे ऊँचा और हर ऐब से पाक है। हमें चाहिए कि हम उसकी तारीफ़ करें, उसकी बड़ाई बयान करें और उसके सिवा किसी को उसका हमसर (समकक्ष) न ठहराएँ। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) की असली रूह है — यह यक़ीन करना कि अल्लाह हर चीज़ से बेहतर है, हर कमी से पाक है और उसके लिए कोई औलाद या साथी नहीं है।

🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — अत-तूर

37أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَبِّكَ أَمْ هُمُ الْمُصَيْطِرُونَ
क्या तुम्हारे परवरदिगार के ख़ज़ाने इन्हीं के पास हैं या यही लोग हाकिम हैं
38أَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَسْتَمِعُونَ فِيهِ ۖ فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُم بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
या उनके पास कोई सीढ़ी है जिस पर (चढ़ कर आसमान से) सुन आते हैं जो सुन आया करता हो तो वह कोई सरीही दलील पेश करे
39أَمْ لَهُ الْبَنَاتُ وَلَكُمُ الْبَنُونَ
क्या ख़ुदा के लिए बेटियाँ हैं और तुम लोगों के लिए बेटे
40أَمْ تَسْأَلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ
या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत की) उजरत माँगते हो कि ये लोग कर्ज़ के बोझ से दबे जाते हैं
41أَمْ عِندَهُمُ الْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ
या इन लोगों के पास ग़ैब (का इल्म) है कि वह लिख लेते हैं
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीRevelation
39आयत

अनुवाद — अत-तूर 39

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Tuesday, August 18, 2026

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