अल-क़मर · 13/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
وَحَمَلْنَاهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلْوَاحٍ وَدُسُرٍ ۝١٣
Wa hamalnaahu `alaa zaati alwaahinw wa dusur
📖 हिंदी अर्थ
और हमने एक कश्ती पर जो तख्तों और कीलों से तैयार की गयी थी सवार किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذَاتِ أَلْوَاحٍ: लकड़ी के तख्तों वाली (सतह वाली)।
  • وَدُسُرٍ: "دُسُر" शब्द "دِسَار" का बहुवचन है, जिसका अर्थ है कीलें (मेखें) जिनसे तख्तों को जोड़ा जाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी नूह (अलैहिस्सलाम) पर यह अहसान फ़रमाया कि जब उनकी क़ौम ने हक़ को झुटलाया और ज़ुल्म व सरकशी पर अड़ी रही, तो अल्लाह ने उन्हें सिखाया कि एक मज़बूत कश्ती (नाव) बनाओ। यह कश्ती लकड़ी के मोटे तख्तों से बनी थी, और उन तख्तों को कीलों (मेखों) से इस तरह जोड़ा गया था कि वह पानी के दबाव को सहन कर सके। अल्लाह ने उस कश्ती को अपनी ख़ास क़ुदरत से चलाया और नूह (अलैहिस्सलाम) को उनके साथियों समेत उस पर सवार कराया, ताकि वे तूफ़ान से महफ़ूज़ रहें।

यह अल्लाह की रहमत और क़ुदरत का नमूना है कि उसने एक साधारण सी दिखने वाली चीज़ (लकड़ी और कीलों) को वसीला बनाकर अपने नेक बंदों को हलाकत से बचाया। जब पूरी दुनिया में तूफ़ान आया और हर ऊँची जगह पर पानी चढ़ गया, तो यही कश्ती नूह (अलैहिस्सलाम) और उनके ईमान वालों के लिए रहमत का ज़रिया बनी, जबकि काफ़िरों के लिए वही पानी अज़ाब बन गया।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह पर भरोसा करके जब इंसान अपना काम करता है, तो अल्लाह उसे कामयाबी देता है। नूह (अलैहिस्सलाम) ने सालों मेहनत करके कश्ती बनाई, और अल्लाह ने उसे महफ़ूज़ रखा। आज भी जो इंसान अल्लाह के हुक्म पर चलता है और उसकी राह में कोशिश करता है, अल्लाह उसे हर मुश्किल से निकालने का रास्ता दिखाता है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की निगरानी और हिफ़ाज़त में जो चीज़ हो, वह कभी तबाह नहीं हो सकती। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन की हर कश्ती (हर काम) को अल्लाह के भरोसे पर चलाएँ, क्योंकि वही सबसे बड़ा रक्षक और मददगार है।



📜 आयत 11-15 — अल-क़मर

11فَفَتَحْنَا أَبْوَابَ السَّمَاءِ بِمَاءٍ مُّنْهَمِرٍ
तो अब तू ही (इनसे) बदला ले तो हमने मूसलाधार पानी से आसमान के दरवाज़े खोल दिए
12وَفَجَّرْنَا الْأَرْضَ عُيُونًا فَالْتَقَى الْمَاءُ عَلَىٰ أَمْرٍ قَدْ قُدِرَ
और ज़मीन से चश्में जारी कर दिए, तो एक काम के लिए जो मुक़र्रर हो चुका था (दोनों) पानी मिलकर एक हो गया
13وَحَمَلْنَاهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلْوَاحٍ وَدُسُرٍ
और हमने एक कश्ती पर जो तख्तों और कीलों से तैयार की गयी थी सवार किया
14تَجْرِي بِأَعْيُنِنَا جَزَاءً لِّمَن كَانَ كُفِرَ
और वह हमारी निगरानी में चल रही थी (ये) उस शख़्श (नूह) का बदला लेने के लिए जिसको लोग न मानते थे
15وَلَقَد تَّرَكْنَاهَا آيَةً فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
और हमने उसको एक इबरत बना कर छोड़ा तो कोई है जो इबरत हासिल करे
अल-क़मरकुरान सूची
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अनुवाद — अल-क़मर 13

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Tuesday, August 18, 2026

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