अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَجَّرْنَا: हमने फोड़कर बहा दिया।
- عُيُونًا: सोते (चश्मे)।
- فَالْتَقَى الْمَاءُ: तो पानी मिल गया (आसमानी पानी और ज़मीनी पानी)।
- عَلَى أَمْرٍ قَدْ قُدِرَ: उस आदेश पर (जो) पहले से तय किया जा चुका था (यानी उनका हलाक होना)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के अज़ाब के लिए दुआ माँगी, तो अल्लाह ने उनकी दुआ क़बूल की और आसमान के दरवाज़े खोल दिए, जिससे मूसलाधार पानी बरसा। साथ ही, ज़मीन को चीरकर उसमें से सोते उबाल दिए, यहाँ तक कि पूरी ज़मीन पानी के चश्मों में बदल गई। फिर आसमानी पानी और ज़मीनी पानी आपस में मिल गए और एक हो गए। यह सब उस फ़ैसले के तहत हुआ जो अल्लाह ने पहले से लिख दिया था कि क़ौमे-नूह को उनके शिर्क और नाफ़रमानी की सज़ा में डुबोकर हलाक किया जाए। इस तरह सारे काफ़िर डूब गए, और सिर्फ़ वही लोग बचे जिन्हें अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती में सवार होकर नजात दी।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत और उसके फ़ैसले की अटलता पर ईमान लाने की तरबियत देती है। जब अल्लाह किसी क़ौम पर अज़ाब का फ़ैसला कर लेता है, तो पूरी कायनात उसके हुक्म की ताबेदार बन जाती है — आसमान बरसता है, ज़मीन उबलती है, और पानी भी उसके हुक्म का पैरोकार बन जाता है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें और उसकी रहमत का ज़रिया पकड़ें। जिस तरह नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती ईमानवालों के लिए नजात का ज़रिया बनी, उसी तरह आज भी ईमान और नेक अमल हमारे लिए नजात का ज़रिया है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उसके अज़ाब से पहले है — जो लोग नूह (अलैहिस्सलाम) की दावत पर ईमान लाए, वे बच गए। आज भी जो व्यक्ति क़ुरआन और सुन्नत पर अमल करेगा, वह दुनिया और आख़िरत की मुसीबतों से महफूज़ रहेगा। अल्लाह हमें अपने फ़ैसलों पर रज़ा और अपनी ताबेदारी की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 10-14 — अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 12
सूरा अल-क़मर आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ज़मीन से चश्में जारी कर दिए, तो एक काम…सूरा आयत 12/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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