अर-रहमान · 58/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
كَأَنَّهُنَّ الْيَاقُوتُ وَالْمَرْجَانُ ۝٥٨
ka annahunnal yaaqootu wal marjaan
📖 हिंदी अर्थ
(ऐसी हसीन) गोया वह (मुजस्सिम) याक़ूत व मूँगे हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْيَاقُوتُ (याक़ूत): एक बहुमूल्य रत्न जो पारदर्शी, चमकीला और अत्यंत सुंदर होता है।
  • الْمَرْجَانُ (मरजान): लाल मूंगा, जो समुद्र से निकलने वाला एक कीमती पत्थर है, जो लालिमा और चमक में अद्वितीय होता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में जन्नत की उन पाक दुल्हनों (हूरों) का वर्णन कर रहे हैं जो मोमिनों के लिए तैयार की गई हैं। फ़रमाता है कि वे हूरें ऐसी हैं जैसे वे याक़ूत (ruby) और मरजान (coral) हों — यानी उनके चेहरे की लालिमा मरजान जैसी, और उनकी सफ़ेदी, पवित्रता और चमक याक़ूत जैसी है। उनकी खूबसूरती, सफ़ाई और नूरानियत में ये दोनों कीमती चीज़ें झलकती हैं। यह एक ऐसा दृश्य है जिसकी मिसाल दुनिया की किसी भी चीज़ से नहीं दी जा सकती, क्योंकि याक़ूत अपनी शफ़्फ़ाफ़ियत (पारदर्शिता) और रौनक में बेमिसाल है, और मरजान अपनी लालिमा और नर्मी में।

यहाँ अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों को जन्नत की उन नेमतों से आगाह किया है जो उनकी आँखों की ठंडक और दिलों की खुशी का सबब बनेंगी। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी बशारत (खुशखबरी) है जो दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके हुक्मों का पालन करते हैं और उसकी रहमत के उम्मीदवार रहते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला की रहमत और इनाम का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जो लोग दुनिया में अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक ढालते हैं, वे आख़िरत में ऐसी नेमतों से नवाज़े जाएँगे जिनका कोई हिसाब नहीं। यह हमें अमल की तरफ़ राग़िब करता है कि हम अपनी ज़िंदगी को नेकियों से भर दें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए ये खूबसूरत इनाम तैयार किए गए हैं। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें जन्नत की इन नेमतों का हक़दार बनाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 56-60 — अर-रहमान

56فِيهِنَّ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ
इसमें (पाक दामन ग़ैर की तरफ ऑंख उठा कर न देखने वाली औरतें होंगी जिनको उन से पहले न किसी इन्सान ने हाथ लगाया होगा) और जिन ने
57فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे
58كَأَنَّهُنَّ الْيَاقُوتُ وَالْمَرْجَانُ
(ऐसी हसीन) गोया वह (मुजस्सिम) याक़ूत व मूँगे हैं
59فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों से मुकरोगे
60هَلْ جَزَاءُ الْإِحْسَانِ إِلَّا الْإِحْسَانُ
भला नेकी का बदला नेकी के सिवा कुछ और भी है
अर-रहमानकुरान सूची
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अनुवाद — अर-रहमान 58

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सूरा आयत 58/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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