Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آلاء: नेमतें, उपकार, अनगिनत अहसान।
- تُكَذِّبَانِ: तुम दोनों झुठलाते हो, इनकार करते हो।
- رَبِّكُمَا: तुम दोनों (इंसानों और जिन्नात) के रब की।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ इंसानों और जिन्नात की जमात! तुम्हारे रब ने तुम पर जो अनगिनत नेमतें बरसाई हैं—ज़िंदगी दी, शरीर दिया, आँखें दीं, कान दिए, ज़बान दी, सूरज-चाँद, ज़मीन-आसमान, पानी और रिज़्क़—इन सब में से कौन सी नेमत ऐसी है जिसे तुम झुठला सकते हो? क्या तुममें साहस है कि कहो कि ये नेमतें हमारे रब की तरफ से नहीं हैं? या कहो कि ये अहसान हम पर नहीं हैं?
यह आयत एक प्यार भरी डाँट है, एक मोह भरी पुकार है। अल्लाह तआला बार-बार अपनी नेमतें गिनाता है और हर नेमत के बाद पूछता है: "तो फिर तुम कौन सी नेमत को झुठलाओगे?" यह सवाल दिल को हिला देने वाला है। जब कोई बाप अपने बच्चे से प्यार से कहे, "मैंने तुम्हें इतना कुछ दिया, फिर भी तुम मुझसे मुँह मोड़ते हो?" तो बच्चे की आँखों में आँसू आ जाते हैं। यही अंदाज़ अल्लाह का है—वह हमें याद दिलाता है कि उसकी नेमतें अनगिनत हैं, और हमें चाहिए कि हम उसका शुक्र अदा करें, उसकी इबादत करें और उसके दिए हुए हर उपहार को पहचानें।
याद रखो! यह आयत सिर्फ इंसानों से नहीं, बल्कि जिन्नात से भी खिताब करती है। यानी अल्लाह की नेमतें और उसकी रहमत दोनों जमातों पर छाई हुई हैं। और जब रब इतना मेहरबान है, तो हमें उसका शुक्रगुज़ार होना चाहिए। क्या हम उस रब को भूल सकते हैं जो हर साँस में हमें ज़िंदगी देता है? क्या हम उसके दीन को छोड़ सकते हैं जिसने हमें कुरआन जैसी नेमत दी? हरगिज़ नहीं!
इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की नेमतों को गिनें, उन पर गौर करें, और हर नेमत के बदले उसका शुक्र अदा करें। शुक्र का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम उसकी इबादत करें, उसके हुक्मों पर चलें और उसके रास्ते पर साबित रहें। क्योंकि जो रब इतनी नेमतें देता है, उसका हक़ है कि उसकी नाफ़रमानी न की जाए।
📜 आयत 55-59 — सूरा अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 57
सूरा अर-रहमान आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों को…सूरा आयत 57/78 — सूरा अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रहमान सुनें, सूरा अर-रहमान अनुवाद, सूरा अर-रहमान mp3, सूरा अर-रहमान pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अर-रहमान
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


