Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَفِيظًا: निगरानी रखने वाला, देखभाल करने वाला, जो हर काम को गिनता और संभालता हो।
- وَكِيل: कार्यभार सौंपा हुआ, अधिकार रखने वाला, जो लोगों के मामलों का प्रबंधन करे और उन्हें बाध्य कर सके।
तफसीर (व्याख्या):
यदि अल्लाह तआला चाहता कि ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) शिर्क न करें, तो वे कभी शिर्क न करते। लेकिन अल्लाह ने उन्हें स्वतंत्र इच्छा और चुनाव का अधिकार दिया है, और वह जानता है कि वे अपनी बुरी पसंद और टेढ़ी इच्छाओं के कारण शिर्क का रास्ता चुनेंगे। अल्लाह की मशीयत (इच्छा) उनके शिर्क को जबरन रोकने पर नहीं टिकी, बल्कि उसने उन्हें आज़माइश के लिए छोड़ दिया है।
ऐ नबी! हमने आपको इन लोगों पर निगरानी रखने वाला नहीं बनाया है, जो उनके हर अच्छे-बुरे काम को गिनता रहे, और न ही आप उन पर अधिकार रखने वाले हो कि उन्हें ज़बरदस्ती इस्लाम पर ला खड़ा करें। आपका काम केवल संदेश (रिसालत) पहुँचाना है। हिदायत देना और दिलों को बदलना अल्लाह के हाथ में है। आप पर उनके कर्मों की ज़िम्मेदारी नहीं है, और न ही आपको उन्हें मजबूर करने का अधिकार दिया गया है।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं है। हर व्यक्ति को अपनी मर्जी से ईमान लाने और अच्छे कर्म करने की आज़ादी दी गई है। इस्लाम तर्क, दलील और नेकी के ज़रिए लोगों के दिल जीतता है, ज़बरदस्ती से नहीं।
- नबी करीम ﷺ की उम्मत के अनुयायियों को भी यही सिखाया गया है कि वे दूसरों को केवल अच्छे तरीके से समझाएँ, उनके गलत कामों पर अफ़सोस करें, लेकिन उन्हें बदलने की कोशिश में अपनी हद से आगे न बढ़ें। हिदायत देना अल्लाह का काम है।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की मशीयत (इच्छा) उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) के अनुसार होती है। वह चाहता तो सबको मोमिन बना देता, लेकिन उसने इंसान को आज़माइश के लिए छोड़ा है, ताकि सच्चे और झूठे लोग सामने आ जाएँ।
- इस आयत से मुसलमानों को यह तसल्ली मिलती है कि उनकी ज़िम्मेदारी सिर्फ अच्छा संदेश पहुँचाना है, नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। इससे दिल को सुकून मिलता है और इंसान अपने फर्ज़ पर डटा रहता है।
📜 आयत 105-109 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 107
सूरा अल-अनआम आयत 107 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ख़ुदा चाहता तो ये लोग शिर्क ही न…सूरा आयत 107/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 105–109. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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