अल-अनआम · 106/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
اتَّبِعْ مَا أُوحِيَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ وَأَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِكِينَ ۝١٠٦
ittabi` maaa oohiya ilaika mir Rabbika laaa ilaaha illaa Huwa wa a`rid `anil mushrikeen
📖 हिंदी अर्थ
जो कुछ तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से 'वही' की जाए बस उसी पर चलो अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुशरिको से किनारा कश रहो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّبِعْ: अनुसरण करो, पालन करो।
  • أُوحِيَ إِلَيْكَ: जो आपकी ओर वह्य (प्रकाशना) की गई।
  • وَأَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِكِينَ: मुशरिकों (बहुदेववादियों) से उपेक्षा करो, उनकी ओर ध्यान मत दो।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उस हिदायत और निर्देश का पूर्ण रूप से अनुसरण करें जो आपके रब की ओर से आप पर उतारी गई है। यह वह्य ही आपके लिए मार्गदर्शन का एकमात्र स्रोत है, जिसमें आदेश और निषेध दोनों शामिल हैं। इस वह्य की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा यह है कि सच्ची इबादत के योग्य केवल अल्लाह ही है, उसके अलावा कोई पूज्य नहीं। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) का मूल सिद्धांत है।

फिर अल्लाह आपको निर्देश देता है कि मुशरिकों के साथ उनके बहुदेववाद और हठधर्मिता के कारण व्यर्थ के विवादों में न पड़ें, न उनकी बातों से विचलित हों और न उनके दबाव में आकर सत्य से समझौता करें। उनकी जिद और विरोध आपके मिशन में रुकावट न बने। आपका काम केवल संदेश पहुंचाना है, जबकि उनका हिसाब अल्लाह के सुपुर्द है। उनकी ओर से आने वाली तकलीफों को सहन करें और उनसे किनारा कर लें।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. एक मुसलमान का कर्तव्य है कि वह केवल अल्लाह की ओर से आई हुई शिक्षा (कुरआन और सुन्नत) का अनुसरण करे, न कि अपनी इच्छाओं या समाज के दबाव का।
  2. तौहीद (अल्लाह की एकता) इस्लाम की सबसे बड़ी नींव है, और इसी पर सारी इबादतें टिकी हैं।
  3. बुराई और बहुदेववाद से दूर रहना चाहिए, लेकिन उनसे निपटने का तरीका सब्र और उपेक्षा है, न कि घबराहट या समझौता।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए مخالفों की बातों से विचलित न हों, क्योंकि अल्लाह ही सब कुछ देखने वाला और न्याय करने वाला है।
  5. इस आयत में मुसलमानों के लिए धैर्य और दृढ़ता का पाठ है, जो हर युग में उन्हें अपने ईमान पर क़ायम रहने की ताक़त देता है।


📜 आयत 104-108 — सूरा अल-अनआम

104قَدْ جَاءَكُم بَصَائِرُ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَنْ عَمِيَ فَعَلَيْهَا ۚ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ
तुम्हारे पास तो सुझाने वाली चीज़े आ ही चुकीं फिर जो देखे (समझे) तो अपने दम के लिए और जो अन्धा बने तो (उसका ज़रर (नुकसान) भी) ख़ुद उस पर है और (ऐ रसूल उन से कह दो) कि मै तुम लोगों का कुछ निगेहबान तो हूँ नहीं
105وَكَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ وَلِيَقُولُوا دَرَسْتَ وَلِنُبَيِّنَهُ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
और हम (अपनी) आयतें यूं उलट फेरकर बयान करते है (ताकि हुज्जत तमाम हो) और ताकि वह लोग ज़बानी भी इक़रार कर लें कि तुमने (क़ुरान उनके सामने) पढ़ दिया और ताकि जो लोग जानते है उनके लिए (क़ुरान का) खूब वाजेए करके बयान कर दें
106اتَّبِعْ مَا أُوحِيَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ وَأَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِكِينَ
जो कुछ तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से 'वही' की जाए बस उसी पर चलो अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुशरिको से किनारा कश रहो
107وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ مَا أَشْرَكُوا ۗ وَمَا جَعَلْنَاكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظًا ۖ وَمَا أَنتَ عَلَيْهِم بِوَكِيلٍ
और अगर ख़ुदा चाहता तो ये लोग शिर्क ही न करते और हमने तुमको उन लोगों का निगेहबान तो बनाया नहीं है और न तुम उनके ज़िम्मेदार हो
108وَلَا تَسُبُّوا الَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ فَيَسُبُّوا اللَّهَ عَدْوًا بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ كَذَٰلِكَ زَيَّنَّا لِكُلِّ أُمَّةٍ عَمَلَهُمْ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِم مَّرْجِعُهُمْ فَيُنَبِّئُهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और ये (मुशरेकीन) जिन की अल्लाह के सिवा (ख़ुदा समझ कर) इबादत करते हैं उन्हें तुम बुरा न कहा करो वरना ये लोग भी ख़ुदा को बिना समझें अदावत से बुरा (भला) कह बैठें (और लोग उनकी ख्वाहिश नफसानी के) इस तरह पाबन्द हुए कि गोया हमने ख़ुद हर गिरोह के आमाल उनको सॅवाकर अच्छे कर दिखाए फिर उन्हें तो (आख़िरकार) अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है तब जो कुछ दुनिया में कर रहे थे ख़ुदा उन्हें बता देगा
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
106आयत

अनुवाद — अल-अनआम 106

सूरा अल-अनआम आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो कुछ तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से 'वही'…

सूरा आयत 106/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 104–108. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Sunday, October 4, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए