फिर जिसकी उन्हें नसीहत की गयी थी जब उसको भूल गए तो हमने उन पर (ढील देने के लिए) हर तरह की (दुनियावी) नेअमतों के दरवाज़े खोल दिए यहाँ तक कि जो नेअमतें उनको दी गयी थी जब उनको पाकर ख़ुश हुए तो हमने उन्हें नागाहाँ (एक दम) ले डाला तो उस वक्त वह नाउम्मीद होकर रह गए
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
پھر جب انہوں نے اس نصیحت کو جو ان کو کے گئی تھی فراموش کردیا تو ہم نے ان پر ہر چیز کے دروازے کھول دیئے۔ یہاں تک کہ جب ان چیزوں سے جو ان کو دی گئی تھیں خوب خوش ہوگئے تو ہم نے ان کو ناگہاں پکڑ لیا اور وہ اس وقت مایوس ہو کر رہ گئے
फिर जिसकी उन्हें नसीहत की गयी थी जब उसको भूल गए तो हमने उन पर (ढील देने के लिए) हर तरह की (दुनियावी) नेअमतों के दरवाज़े खोल दिए यहाँ तक कि जो नेअमतें उनको दी गयी थी जब उनको पाकर ख़ुश हुए तो हमने उन्हें नागाहाँ (एक दम) ले डाला तो उस वक्त वह नाउम्मीद होकर रह गए
📜
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
نَسُوا: भूल गए, अर्थात उपेक्षा की और उस पर अमल नहीं किया।
ذُكِّرُوا بِهِ: जिस चीज़ की उन्हें नसीहत दी गई थी, यानी अल्लाह के आदेश और चेतावनियाँ।
فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ أَبْوَابَ كُلِّ شَيْءٍ: हमने उन पर हर चीज़ के दरवाज़े खोल दिए, यानी खूब रिज़्क़ और आराम की नेमतें दे दीं।
فَرِحُوا: वे खुश हो गए, इतरा गए और घमंड में आ गए।
أَخَذْنَاهُم بَغْتَةً: हमने उन्हें अचानक पकड़ लिया, यानी अचानक अज़ाब आ गया।
مُبْلِسُونَ: निराश, हैरान और हर भलाई से कटे हुए, ऐसे लोग जिनके पास कोई जवाब न हो।
तफ़सीर:
जब उन लोगों ने उन नसीहतों और चेतावनियों को भुला दिया जो उन्हें दी गई थीं, और अल्लाह के आदेशों पर अमल करना छोड़ दिया, तो अल्लाह ने उनके साथ एक विशेष व्यवहार किया। उन पर अज़ाब के बजाय दुनिया की नेमतों के दरवाज़े खोल दिए — ग़रीबी के बाद दौलत दी, बीमारी के बाद सेहत दी, तंगी के बाद खुशहाली दी। यह उनके लिए रहमत नहीं, बल्कि एक परीक्षा और धीरे-धीरे पकड़ने (इस्तिदराज) का तरीक़ा था। वे इन नेमतों को देखकर खुश हो गए, इतरा गए और घमंड में आ गए, और अपनी ग़लतियों से तौबा नहीं किया। फिर जब वे इन चीज़ों में पूरी तरह मग्न थे और उन्हें यक़ीन था कि सब कुछ ठीक है, तो अचानक अल्लाह का अज़ाब आ गया। वे सख्त निराशा और हैरानी में डूब गए, हर तरफ़ से उनकी उम्मीदें टूट गईं, और उनके पास कोई जवाब या बचाव का रास्ता नहीं बचा।
फ़ायदे:
यह आयत बताती है कि नेमतें हमेशा अल्लाह की रज़ा का सबूत नहीं होतीं; कभी-कभी वे इस्तिदराज (धीरे-धीरे पकड़) का ज़रिया होती हैं। इसलिए इंसान को नेमतों पर घमंड नहीं करना चाहिए।
अल्लाह की चेतावनियों और नसीहतों को भूलना या उन पर अमल न करना बहुत बड़ी ग़लती है, जिसका अंजाम बहुत बुरा होता है।
अज़ाब अचानक आ सकता है, इसलिए इंसान को हर वक़्त अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए और अपनी ग़लतियों से तौबा करते रहना चाहिए।
यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि दुनिया की चीज़ों पर भरोसा न करें, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसकी इबादत को ही अपना असली लक्ष्य बनाएं, ताकि अल्लाह की पकड़ से बचे रहें।
और तकलीफ़ में गिरफ्तार किया ताकि वह लोग (हमारी बारगाह में) गिड़गिड़ाए तो जब उन (के सर) पर हमारा अज़ाब आ खड़ा हुआ तो वह लोग क्यों नहीं गिड़गिड़ाए (कि हम अज़ाब दफा कर देते) मगर उनके दिल तो सख्त हो गए थे ओर उनकी कारस्तानियों को शैतान ने आरास्ता कर दिखाया था (फिर क्योंकर गिड़गिड़ाते)
फिर जिसकी उन्हें नसीहत की गयी थी जब उसको भूल गए तो हमने उन पर (ढील देने के लिए) हर तरह की (दुनियावी) नेअमतों के दरवाज़े खोल दिए यहाँ तक कि जो नेअमतें उनको दी गयी थी जब उनको पाकर ख़ुश हुए तो हमने उन्हें नागाहाँ (एक दम) ले डाला तो उस वक्त वह नाउम्मीद होकर रह गए
(कि क़िस्सा पाक हुआ) (ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर ख़ुदा तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे लें ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर कर दे तो ख़ुदा के सिवा और कौन मौजूद है जो (फिर) तुम्हें ये नेअमतें (वापस) दे (ऐ रसूल) देखो तो हम किस किस तरह अपनी दलीले बयान करते हैं इस पर भी वह लोग मुँह मोडे ज़ाते हैं
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।