Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَسُوا: भूल गए, अर्थात उपेक्षा की और उस पर अमल नहीं किया।
- ذُكِّرُوا بِهِ: जिस चीज़ की उन्हें नसीहत दी गई थी, यानी अल्लाह के आदेश और चेतावनियाँ।
- فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ أَبْوَابَ كُلِّ شَيْءٍ: हमने उन पर हर चीज़ के दरवाज़े खोल दिए, यानी खूब रिज़्क़ और आराम की नेमतें दे दीं।
- فَرِحُوا: वे खुश हो गए, इतरा गए और घमंड में आ गए।
- أَخَذْنَاهُم بَغْتَةً: हमने उन्हें अचानक पकड़ लिया, यानी अचानक अज़ाब आ गया।
- مُبْلِسُونَ: निराश, हैरान और हर भलाई से कटे हुए, ऐसे लोग जिनके पास कोई जवाब न हो।
तफ़सीर:
जब उन लोगों ने उन नसीहतों और चेतावनियों को भुला दिया जो उन्हें दी गई थीं, और अल्लाह के आदेशों पर अमल करना छोड़ दिया, तो अल्लाह ने उनके साथ एक विशेष व्यवहार किया। उन पर अज़ाब के बजाय दुनिया की नेमतों के दरवाज़े खोल दिए — ग़रीबी के बाद दौलत दी, बीमारी के बाद सेहत दी, तंगी के बाद खुशहाली दी। यह उनके लिए रहमत नहीं, बल्कि एक परीक्षा और धीरे-धीरे पकड़ने (इस्तिदराज) का तरीक़ा था। वे इन नेमतों को देखकर खुश हो गए, इतरा गए और घमंड में आ गए, और अपनी ग़लतियों से तौबा नहीं किया। फिर जब वे इन चीज़ों में पूरी तरह मग्न थे और उन्हें यक़ीन था कि सब कुछ ठीक है, तो अचानक अल्लाह का अज़ाब आ गया। वे सख्त निराशा और हैरानी में डूब गए, हर तरफ़ से उनकी उम्मीदें टूट गईं, और उनके पास कोई जवाब या बचाव का रास्ता नहीं बचा।
फ़ायदे:
- यह आयत बताती है कि नेमतें हमेशा अल्लाह की रज़ा का सबूत नहीं होतीं; कभी-कभी वे इस्तिदराज (धीरे-धीरे पकड़) का ज़रिया होती हैं। इसलिए इंसान को नेमतों पर घमंड नहीं करना चाहिए।
- अल्लाह की चेतावनियों और नसीहतों को भूलना या उन पर अमल न करना बहुत बड़ी ग़लती है, जिसका अंजाम बहुत बुरा होता है।
- अज़ाब अचानक आ सकता है, इसलिए इंसान को हर वक़्त अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए और अपनी ग़लतियों से तौबा करते रहना चाहिए।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि दुनिया की चीज़ों पर भरोसा न करें, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसकी इबादत को ही अपना असली लक्ष्य बनाएं, ताकि अल्लाह की पकड़ से बचे रहें।
📜 आयत 42-46 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 44
सूरा अल-अनआम आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जिसकी उन्हें नसीहत की गयी थी जब उसको भूल…सूरा आयत 44/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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