Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ: ज़मीन और समुद्र के अंधेरे, यानी उनकी कठिनाइयाँ, ख़तरे और मुसीबतें।
- تَضَرُّعًا: झुककर, गिड़गिड़ाकर, पूरी विनम्रता के साथ (खुले तौर पर)।
- وَخُفْيَةً: चुपके से, छिपकर, दिल ही दिल में।
- لَئِنْ أَنجَانَا: अगर उसने हमें बचा लिया।
- الشَّاكِرِينَ: एहसान मानने वाले, आभार व्यक्त करने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! इन मुशरिकों से पूछिए: "कौन है जो तुम्हें ज़मीन और समुदर के अंधेरों (यानी मुसीबतों, तूफ़ानों और ख़तरों) से नजात दिलाता है?" जब तुम पर कोई मुसीबत आती है—चाहे ज़मीन पर कोई ख़तरा हो या समुद्र में कोई तूफ़ान—तो तुम किसे पुकारते हो? उसी वक़्त तुम सारे झूठे माबूदों को भूल जाते हो और सिर्फ अल्लाह को पुकारते हो, कभी खुले तौर पर गिड़गिड़ाकर तो कभी चुपके से अपने दिलों में। तुम उससे वादा करते हो कि "अगर तूने हमें इस मुसीबत से बचा लिया, तो हम ज़रूर तेरे शुक्रगुज़ार बंदों में से होंगे।"
यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जो मुश्किलों में तो अल्लाह को याद करते हैं, लेकिन आसानी और खुशहाली में उसे भूल जाते हैं और दूसरों की इबादत करने लगते हैं। अल्लाह तआला उन्हें याद दिलाता है कि जिसने मुसीबत में तुम्हारी सुन ली, उसी की इबादत तुम्हें हमेशा करनी चाहिए।
फ़ायदे (सबक):
- मुसीबत के वक़्त इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) साफ़ हो जाती है और वह सिर्फ अल्लाह को याद करता है—यह साबित करता है कि सच्चा माबूद सिर्फ अल्लाह है।
- दुआ में तड़प और विनम्रता (गिड़गिड़ाना) बहुत ज़रूरी है—चाहे ज़ोर से हो या चुपके से, अल्लाह दोनों को सुनता है।
- अल्लाह से किया गया वादा निभाना चाहिए—जब हम मुसीबत में उससे वादा करते हैं कि हम शुक्रगुज़ार होंगे, तो निजात मिलने के बाद उसे पूरा करना हमारा फर्ज़ है।
- शुक्र का मतलब सिर्फ ज़बान से "शुक्र" कहना नहीं, बल्कि अल्लाह की नेमतों को उसकी रज़ा के मुताबिक इस्तेमाल करना और उसके सिवा किसी की इबादत न करना है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जो अल्लाह मुसीबत में काम आता है, उसी को खुशहाली में भी याद रखना चाहिए—यही सच्चे ईमान की निशानी है।
📜 आयत 61-65 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 63
सूरा अल-अनआम आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) उनसे पूछो कि तुम ख़ुश्की और तरी के…सूरा आयत 63/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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