अल-अनआम · 63/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قُلْ مَن يُنَجِّيكُم مِّن ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ تَدْعُونَهُ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً لَّئِنْ أَنجَانَا مِنْ هَٰذِهِ لَنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِرِينَ ۝٦٣
Qul mai yunajjeekum min zulumaatil barri walbahri tad`oonahoo tadarru`anw wa khufyatann la`in anjaanaa min haazihee lanakoonana minash shaakireen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) उनसे पूछो कि तुम ख़ुश्की और तरी के (घटाटोप) ऍधेरों से कौन छुटकारा देता है जिससे तुम गिड़ गिड़ाकर और (चुपके) दुआएं मॉगते हो कि अगर वह हमें (अब की दफ़ा) उस (बला) से छुटकारा दे तो हम ज़रुर उसके शुक्र गुज़ार (बन्दे होकर) रहेगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ: ज़मीन और समुद्र के अंधेरे, यानी उनकी कठिनाइयाँ, ख़तरे और मुसीबतें।
  • تَضَرُّعًا: झुककर, गिड़गिड़ाकर, पूरी विनम्रता के साथ (खुले तौर पर)।
  • وَخُفْيَةً: चुपके से, छिपकर, दिल ही दिल में।
  • لَئِنْ أَنجَانَا: अगर उसने हमें बचा लिया।
  • الشَّاكِرِينَ: एहसान मानने वाले, आभार व्यक्त करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! इन मुशरिकों से पूछिए: "कौन है जो तुम्हें ज़मीन और समुदर के अंधेरों (यानी मुसीबतों, तूफ़ानों और ख़तरों) से नजात दिलाता है?" जब तुम पर कोई मुसीबत आती है—चाहे ज़मीन पर कोई ख़तरा हो या समुद्र में कोई तूफ़ान—तो तुम किसे पुकारते हो? उसी वक़्त तुम सारे झूठे माबूदों को भूल जाते हो और सिर्फ अल्लाह को पुकारते हो, कभी खुले तौर पर गिड़गिड़ाकर तो कभी चुपके से अपने दिलों में। तुम उससे वादा करते हो कि "अगर तूने हमें इस मुसीबत से बचा लिया, तो हम ज़रूर तेरे शुक्रगुज़ार बंदों में से होंगे।"

यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जो मुश्किलों में तो अल्लाह को याद करते हैं, लेकिन आसानी और खुशहाली में उसे भूल जाते हैं और दूसरों की इबादत करने लगते हैं। अल्लाह तआला उन्हें याद दिलाता है कि जिसने मुसीबत में तुम्हारी सुन ली, उसी की इबादत तुम्हें हमेशा करनी चाहिए।

फ़ायदे (सबक):

  1. मुसीबत के वक़्त इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) साफ़ हो जाती है और वह सिर्फ अल्लाह को याद करता है—यह साबित करता है कि सच्चा माबूद सिर्फ अल्लाह है।
  2. दुआ में तड़प और विनम्रता (गिड़गिड़ाना) बहुत ज़रूरी है—चाहे ज़ोर से हो या चुपके से, अल्लाह दोनों को सुनता है।
  3. अल्लाह से किया गया वादा निभाना चाहिए—जब हम मुसीबत में उससे वादा करते हैं कि हम शुक्रगुज़ार होंगे, तो निजात मिलने के बाद उसे पूरा करना हमारा फर्ज़ है।
  4. शुक्र का मतलब सिर्फ ज़बान से "शुक्र" कहना नहीं, बल्कि अल्लाह की नेमतों को उसकी रज़ा के मुताबिक इस्तेमाल करना और उसके सिवा किसी की इबादत न करना है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि जो अल्लाह मुसीबत में काम आता है, उसी को खुशहाली में भी याद रखना चाहिए—यही सच्चे ईमान की निशानी है।


📜 आयत 61-65 — अल-अनआम

61وَهُوَ الْقَاهِرُ فَوْقَ عِبَادِهِ ۖ وَيُرْسِلُ عَلَيْكُمْ حَفَظَةً حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَحَدَكُمُ الْمَوْتُ تَوَفَّتْهُ رُسُلُنَا وَهُمْ لَا يُفَرِّطُونَ
वह अपने बन्दों पर ग़ालिब है वह तुम लोगों पर निगेहबान (फ़रिश्ततें तैनात करके) भेजता है-यहाँ तक कि जब तुम में से किसी की मौत आए तो हमारे भेजे हुये फ़रिश्ते उसको (दुनिया से) उठा लेते हैं और वह (हमारे तामीले हुक्म में ज़रा भी) कोताही नहीं करते
62ثُمَّ رُدُّوا إِلَى اللَّهِ مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ ۚ أَلَا لَهُ الْحُكْمُ وَهُوَ أَسْرَعُ الْحَاسِبِينَ
फिर ये लोग अपने सच्चे मालिक ख़ुदा के पास वापस बुलाए गए-आगाह रहो कि हुक़ूमत ख़ास उसी के लिए है और वह सबसे ज्यादा हिसाब लेने वाला है
63قُلْ مَن يُنَجِّيكُم مِّن ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ تَدْعُونَهُ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً لَّئِنْ أَنجَانَا مِنْ هَٰذِهِ لَنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِرِينَ
(ऐ रसूल) उनसे पूछो कि तुम ख़ुश्की और तरी के (घटाटोप) ऍधेरों से कौन छुटकारा देता है जिससे तुम गिड़ गिड़ाकर और (चुपके) दुआएं मॉगते हो कि अगर वह हमें (अब की दफ़ा) उस (बला) से छुटकारा दे तो हम ज़रुर उसके शुक्र गुज़ार (बन्दे होकर) रहेगें
64قُلِ اللَّهُ يُنَجِّيكُم مِّنْهَا وَمِن كُلِّ كَرْبٍ ثُمَّ أَنتُمْ تُشْرِكُونَ
तुम कहो उन (मुसीबतों) से और हर बला में ख़ुदा तुम्हें नजात देता है (मगर अफसोस) उस पर भी तुम शिर्क करते ही जाते हो
65قُلْ هُوَ الْقَادِرُ عَلَىٰ أَن يَبْعَثَ عَلَيْكُمْ عَذَابًا مِّن فَوْقِكُمْ أَوْ مِن تَحْتِ أَرْجُلِكُمْ أَوْ يَلْبِسَكُمْ شِيَعًا وَيُذِيقَ بَعْضَكُم بَأْسَ بَعْضٍ ۗ انظُرْ كَيْفَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ لَعَلَّهُمْ يَفْقَهُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि वही उस पर अच्छी तरह क़ाबू रखता है कि अगर (चाहे तो) तुम पर अज़ाब तुम्हारे (सर के) ऊपर से नाज़िल करे या तुम्हारे पॉव के नीचे से (उठाकर खड़ा कर दे) या एक गिरोह को दूसरे से भिड़ा दे और तुम में से कुछ लोगों को बाज़ आदमियों की लड़ाई का मज़ा चखा दे ज़रा ग़ौर तो करो हम किस किस तरह अपनी आयतों को उलट पुलट के बयान करते हैं ताकि लोग समझे
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अनुवाद — अल-अनआम 63

सूरा अल-अनआम आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) उनसे पूछो कि तुम ख़ुश्की और तरी के…

सूरा आयत 63/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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