Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- करब (कर्ब): संकट, कठिनाई, दुःख और चिंता।
- तुनज्जीकुम (يُنَجِّيكُم): वह तुम्हें मुक्ति देता है, बचाता है।
- तुशरिकून (تُشْرِكُونَ): तुम साझीदार बनाते हो (अल्लाह के साथ दूसरों को पूजा में)।
व्याख्या:
हे नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि जब तुम सागर की गहराइयों में या जंगल के अंधेरों में किसी विपत्ति में फंस जाते हो, और तुम्हारे सारे सहारे टूट जाते हैं, तो उस समय तुम अपने झूठे देवताओं को भूल जाते हो और केवल अल्लाह को पुकारते हो। वही अकेला है जो तुम्हें उस संकट से और हर प्रकार की कठिनाई, चिंता और दुःख से मुक्ति दिलाता है। वही तुम्हारी सुनता है और वही तुम्हें बचाता है। लेकिन फिर भी, जैसे ही वह तुम्हें बचाकर खुशहाली और सुरक्षा की स्थिति में पहुँचाता है, तुम उसी अल्लाह के साथ दूसरों को उसकी पूजा में साझीदार बनाने लगते हो। तुम उन मूर्तियों और देवताओं को पुकारते हो जो न तो तुम्हें नुकसान पहुँचा सकते हैं और न ही लाभ। यह कैसा अन्याय और कृतघ्नता है कि जिसने तुम्हें बचाया, उसे भूलकर उन्हें याद करते हो जो कुछ नहीं कर सकते। यह तुम्हारी अज्ञानता और अहंकार का प्रमाण है कि विपत्ति में तो तुम अल्लाह को पुकारते हो, लेकिन सुख-समृद्धि में उसके साथ शिर्क करते हो।
शिक्षाएँ और लाभ:
- यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा मुक्तिदाता और सहायक केवल अल्लाह है। विपत्ति में भी और खुशहाली में भी उसी को याद करना चाहिए।
- मनुष्य की कृतघ्नता और कमज़ोरी यह है कि वह मुसीबत में अल्लाह को याद करता है, लेकिन आराम में उसे भूल जाता है। यह एक बुरी आदत है जिससे बचना चाहिए।
- शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाना) सबसे बड़ा अन्याय और पाप है, क्योंकि यह अल्लाह की महानता और उसके अकेले होने का अपमान है।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हर हालत में अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए, चाहे वह विपत्ति से मुक्ति हो या सुख-समृद्धि। शुक्र अदा करने से अल्लाह और नेमतें बढ़ाता है।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रहमत और मदद असीम है। वह हर संकट से निकालने की शक्ति रखता है, बशर्ते हम सच्चे दिल से उसी की ओर रुजू करें।
📜 आयत 62-66 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 64
सूरा अल-अनआम आयत 64 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम कहो उन (मुसीबतों) से और हर बला में ख़ुदा…सूरा आयत 64/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 62–66. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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